तीन गांवों की फसल जलमग्न, किसानों ने डीएम से लगाई गुहार; नाले से अतिक्रमण हटाकर सफाई की मांग
ऊंचाबेरा, बेरागढ़िवा और खालीबेरा के किसानों का आरोप—अतिक्रमण से रुकी जलनिकासी, धान की फसल बर्बाद
किसानों की चेतावनी—समय रहते समाधान नहीं हुआ तो गेहूं की बुवाई भी होगी प्रभावित, प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
फतेहपुर, 1 अक्टूबर 2026। फतेहपुर जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र के ऊंचाबेरा, बेरागढ़िवा और खालीबेरा गांवों के किसानों ने जलभराव और नाले पर कथित अतिक्रमण की समस्या को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि लखनऊ मार्ग से जुड़े नाले की नियमित सफाई न होने और कथित अतिक्रमण के कारण वर्षा का पानी खेतों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। इसके चलते बड़ी संख्या में धान की फसल जलमग्न होकर खराब हो गई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आगामी गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होगी, जिससे ग्रामीणों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
किसानों ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि तीनों गांवों के बीच से गुजरने वाला नाला वर्षों से जलनिकासी का प्रमुख स्रोत रहा है, लेकिन वर्तमान में नाले के कई हिस्सों पर कथित अतिक्रमण होने और समय पर सफाई न होने से वर्षा का पानी खेतों में भर गया है। परिणामस्वरूप सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया और धान की तैयार फसल बर्बाद होने लगी।
ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण फसल सड़ने लगी है। यदि जल्द जलनिकासी नहीं कराई गई तो नुकसान और बढ़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से नाले की पैमाइश कराकर अतिक्रमण हटाने तथा स्थायी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि यह केवल वर्तमान फसल का संकट नहीं है, बल्कि यदि खेतों से पानी नहीं निकला तो रबी सीजन की गेहूं की बुवाई भी समय पर नहीं हो सकेगी। इससे पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था प्रभावित होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो जाएगी।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि संबंधित राजस्व, सिंचाई और ग्राम्य विकास विभाग की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में तत्काल राहत कार्य शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि समय पर कार्रवाई होने से हजारों किसानों को राहत मिल सकती है।
प्रशासन की ओर से ज्ञापन प्राप्त होने के बाद मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की जानकारी किसानों ने दी है। हालांकि खबर लिखे जाने तक नाले से अतिक्रमण हटाने या सफाई अभियान शुरू होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी।
जनपद में लगातार सामने आ रही जलभराव की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बरसात से पहले नालों की नियमित सफाई, अतिक्रमण हटाने और जलनिकासी तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध कार्रवाई से किसानों की फसलों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
एनडी न्यूज़ की अपील
किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। प्रशासन, सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय निकायों को संयुक्त रूप से जलनिकासी संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। साथ ही ग्रामीणों से भी अपील है कि सरकारी नालों और जलमार्गों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न होने दें तथा ऐसी जानकारी तत्काल संबंधित विभाग को दें।
ऐसी समस्याओं से बचने के सुझाव
बरसात से पहले सभी नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
सरकारी नालों और जलमार्गों से अतिक्रमण हटाने का विशेष अभियान चलाया जाए।
जलनिकासी व्यवस्था की समय-समय पर तकनीकी जांच कराई जाए।
किसानों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जाए।
राजस्व,सिंचाई और ग्राम पंचायत स्तर पर संयुक्त निरीक्षण की व्यवस्था बनाई जाए।
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