*वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रभक्ति से गूंजा गीता निकेतन विद्या मंदिर*
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर विद्यार्थियों ने लिया राष्ट्रसेवा एवं संस्कारों का संकल्प
हिंदू शिक्षा समिति एवं विद्या भारती हरियाणा के अंतर्गत संचालित गीता निकेतन विद्या मंदिर, मोहन नगर, कुरुक्षेत्र में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं आचार्य परिवार ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए राष्ट्रप्रेम, एकता, सेवा, संस्कार और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री श्याम लाल जी कौशल, वरिष्ठ आचार्या श्रीमती रजनी गुप्ता जी, अधिवक्ता श्री कृष्ण पांचाल जी बतौर मुख्य वक्ता तथा जिला बाल कल्याण विभाग कुरुक्षेत्र के विभाग अध्यक्ष श्री राजीव मोदगिल जी बतौर मुख्य अतिथि एवं इनके साथ वार्ड नंबर 4 के पार्षद श्री कमल किशोर जी, वार्ड नंबर 1 के पार्षद श्री गौरव भट्ट जी,वरिष्ठ समाज सेविका श्रीमती शालू यादव जी, स्वयंसेवक कार्यकर्ता श्रीमान दर्शन जी ,एकल विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती मर्जिना जी ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके वंदना की । इसके पश्चात विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में राष्ट्रभक्ति गीत प्रस्तुत कर भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और राष्ट्रभाव का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया।
इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों एवं आचार्यों ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। एक साथ गूंजते हजारों कंठों से विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से गुंजायमान हो उठा। सामूहिक गायन ने विद्यार्थियों में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, गौरव और कर्तव्यबोध की भावना को और सुदृढ़ किया।
कार्यक्रम में छात्रा जाह्नवी ने ‘कुटुंब प्रबोधन’ विषय पर प्रभावशाली कविता प्रस्तुत की। कविता के माध्यम से परिवार में संस्कार, आपसी प्रेम, सहयोग, एकता तथा भारतीय पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित जनों ने सराहा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर उनके जीवन, विचारों और राष्ट्रसेवा के आदर्शों को भी स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भारतीय चिंतन पर आधारित एकात्म मानववाद और अंत्योदय की भावना को समाज के सामने रखा। उनका जीवन सादगी, राष्ट्रनिष्ठा, सेवा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का संदेश देता है। विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया गया।
मुख्य वक्ता श्री कृष्ण पांचाल जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन भी राष्ट्रसेवा, स्वदेशी चिंतन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की भावना से प्रेरित था। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रभाव को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि श्री राजीव मोदगिल जी ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य विद्यालयों में तैयार होने वाली संस्कारवान पीढ़ी के हाथों में है। विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन से प्रेरणा लेकर समाजहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री श्याम लाल जी कौशल ने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती का यह अवसर राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को स्मरण करने का अवसर है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को देश के इतिहास, संस्कृति, महापुरुषों के विचारों और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सेवा एवं जिम्मेदारी का भाव विकसित करते हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, संस्कृत में राष्ट्रभक्ति गीत, मां सरस्वती की वंदना, कुटुंब प्रबोधन पर कविता तथा ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन ने कार्यक्रम को विशेष रूप से प्रभावशाली बना दिया। विद्यालय परिसर में राष्ट्रभक्ति, संस्कार और राष्ट्रीय चेतना का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया।
यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वंदे मातरम् के प्रति श्रद्धा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों से प्रेरणा तथा नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, सेवा और संस्कारों का संकल्प जगाने वाला प्रेरणादायी अवसर बना।