गणपति विसर्जन: बप्पा को विदाई के साथ मोह-माया त्यागने और पंचतत्व में विलीन होने का संदेश, विसर्जन सिखाता है—आना और जाना प्रकृति का नियम है...🙏🏻
गणपति विसर्जन केवल बप्पा को विदाई देने की परंपरा नहीं, बल्कि मोह से मुक्ति और जीवन के चक्र को समझने का आध्यात्मिक संदेश भी माना जाता है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने 10 दिनों तक भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनाई और गणेशजी ने उसे लिखा, जिसके बाद उन्हें शीतल करने के लिए जल में ले जाया गया। इसी मान्यता से गणेश विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। विसर्जन से पहले परिवार के साथ गणेशजी की आरती, भोग और प्रसाद करें, नए वस्त्र अर्पित करें तथा दूर्वा, सुपारी, मोदक और दक्षिणा की पोटली साथ रखें। बप्पा से जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगकर श्रद्धा के साथ विसर्जन करें। विसर्जन को साकार से निराकार और पंचतत्व में विलीन होने का प्रतीक माना जाता है। गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!
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