बद्रीनाथ में शंख क्यों नहीं बजाया जाता? पूर्व धर्माधिकारी ने बताई धार्मिक मान्यता
बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार, बद्रीनाथ मंदिर में शंख पूजा में रखा जाता है, लेकिन उसे बजाने की परंपरा नहीं है। इसके पीछे शंख को लेकर कोई आपत्ति नहीं, बल्कि धाम की विशिष्ट पूजा-पद्धति और धार्मिक मान्यताएं बताई जाती हैं।
उनियाल के मुताबिक बद्रीनाथ में भगवान साक्षात विराजमान माने जाते हैं, इसलिए उनके आह्वान के लिए शंखनाद की आवश्यकता नहीं मानी जाती। बद्रीनाथ को शांति और तपस्या का स्थल भी माना जाता है।
उन्होंने तुलसी और शंखचूड़ से जुड़ी पौराणिक मान्यता का भी उल्लेख किया। बद्रीनाथ में माता तुलसी को लक्ष्मी स्वरूप माना जाता है और इसी मान्यता से शंख को पूजा में रखने, लेकिन न बजाने की परंपरा को जोड़ा जाता है। यानी बद्रीनाथ में शंख का धार्मिक महत्व बना हुआ है, लेकिन शंखनाद धाम की विशेष पूजा-पद्धति का हिस्सा नहीं माना जाता।
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