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आज 'अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी' के ग्रामीण युवाओं के साथ एक लंबा संवाद हुआ। सच कहूँ तो मैं वहाँ सिर्फ़ सिखाने गया था, लेकिन इनसे बहुत कुछ सीखकर वापस लौटा हूँ। ये वो युवा हैं जो उसी समाज और उन्हीं ग्रामीण परिवारों से आते हैं, जहाँ आज के इस आधुनिक दौर में भी रूढ़िवादिता और कुप्रथाओं को 'परंपरा' का नाम देकर पाला जा रहा है। ऐसे माहौल में, अपनों के ही बीच जाकर संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों और बदलाव की बात करना लोहे के चने चबाने जैसा है। सामाजिक विरोध का डर कदम-कदम पर होता है। लेकिन इन युवाओं का हौसला, अटूट उत्साह और निर्भीकता देखकर ऐसा लगता ही नहीं कि इनके लिए कोई भी रास्ता मुश्किल है। ग्राउंड जीरो पर संसाधनों और आधुनिक उपकरणों का भारी अभाव है, मगर इनके काम करने का जज़्बा कमाल का है। आज इनकी शानदार प्रेजेंटेशन देखने के बाद एक पत्रकार के रूप में मुझे यह बात गहराई से महसूस हुई—यदि हमारे प्रशासनिक ढाँचे में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जमीनी स्तर पर अपनी कागजी योजनाओं को अमली जामा पहनाने की सिर्फ 'ईमानदार चेष्टा' भी कर लें, तो ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी। संसाधनों की कमी के बावजूद समाज को बदलने निकले इन सभी ऊर्जावान और निडर युवाओं को भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं! आप बदलते रहिए, देश बदलेगा। अब्दुल वसीम अंसारी (Environment Journalist, ग्राउंड रिपोर्ट) #AhinsaWelfareSociety #YouthPower #SocialChange #GroundReality #AbdulWasimAnsari #GroundReport #EnvironmentJournalist #RuralEmpowerment #SocialJustice - Rajgarh News