नाला चोक, घरों में पानी और जिम्मेदारों की खामोशी—ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान
बारिश से दर्जनों घरों में घुसा पानी, निजी खर्च पर जेसीबी बुलवाकर ग्रामीणों ने कराई सफाई
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप, अब निष्पक्ष जांच और स्थायी समाधान की मांग
✒️रिपोर्ट सहयोगी सुनील व प्रमोद यादव के साथ राजेश सोनकर
जसरा, प्रयागराज। लगातार बारिश के बाद घूरपुर क्षेत्र के दलवाबारी गांव में जलनिकासी व्यवस्था ध्वस्त होने से दर्जनों घरों में पानी भर गया। ग्रामीणों का आरोप है कि नाला लंबे समय से कचरे से जाम था और कई शिकायतों के बावजूद सफाई नहीं कराई गई। हालात बिगड़ने पर ग्रामीणों ने सरकारी सहायता का इंतजार करने के बजाय स्वयं चंदा और निजी खर्च से जेसीबी मशीन बुलाकर नाले की सफाई कराई, जिसके बाद पानी की निकासी शुरू हो सकी।
बारिश के दौरान गांव के पीछे स्थित मुख्य नाला पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण पानी उफनकर घरों में घुस गया। इससे अनाज, कपड़े, घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं पानी में भीग गईं। कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय निवासी सोनू सिंह ने बताया कि उनके घर के पीछे का नाला लंबे समय से जाम था। बारिश के बाद सबसे पहले उनके घर में पानी घुसा और धीरे-धीरे आसपास के कई मकान भी जलमग्न हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या की जानकारी कई बार ग्राम पंचायत को दी गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने खुद उठाया जिम्मा
सरकारी मदद न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने स्वयं समाधान का रास्ता चुना। सोनू सिंह और मूलचन्द पटवा ने अपने निजी खर्च से जेसीबी मशीन मंगवाई और अपने साथियों के सहयोग से नाले व नालियों की सफाई शुरू कराई। कई घंटों की मेहनत के बाद जाम हटाया गया, जिससे गांव में भरे पानी की निकासी शुरू हो सकी।
शिकायतें पहले भी, कार्रवाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, 21 जुलाई को ग्राम पंचायत सचिव को लिखित प्रार्थना पत्र देकर नाले की सफाई की मांग की गई थी। इसके अलावा आरजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन उनका आरोप है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कुछ ग्रामीणों ने सफाई के नाम पर कथित रूप से 10 से 20 हजार रुपये की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि ND NEWS इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थायी समाधान की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है। उनका मानना है कि केवल अस्थायी सफाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। नालों की नियमित सफाई, जलनिकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था और समय-समय पर निरीक्षण ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय करने, गांव की जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने देने की मांग की है।
यह मामला केवल एक गांव की जलभराव समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के रखरखाव पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो संभवतः लोगों को अपने घरों को डूबने से बचाने के लिए स्वयं संसाधन नहीं जुटाने पड़ते। अब ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं।
🟥अपील करता है कि जलभराव जैसी समस्याओं को आपदा बनने से पहले प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। ग्राम पंचायतों में नालों की नियमित सफाई, पारदर्शी कार्यप्रणाली और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वहीं ग्रामीण भी नालों में कूड़ा-कचरा न डालें और सामुदायिक स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
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