भारत के कुछ 'बुद्धिजीवी' और विपक्षी दल (Opposition) अक्सर 'वंदे मातरम्' के खिलाफ बयान देते हैं। उन्हें इस गीत से आपत्ति है, क्योंकि उन्होंने इसे 'सांप्रदायिक' और 'हिंदू राष्ट्रवादी' करार दे रखा है। 🤨
लेकिन दूसरी तरफ, अरब देशों (Arabs) के लोग – जिनका धर्म इस्लाम है, और जिनकी अपनी एक अलग संस्कृति है – वे 'वंदे मातरम्' को खुले दिल और पूरे गर्व के साथ गा रहे हैं! 👏🇮🇳
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अरब देशों (संभवतः UAE या सऊदी अरब) में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोग 'वंदे मातरम्' गाते हुए दिख रहे हैं। वे न सिर्फ गा रहे हैं, बल्कि इसके हर शब्द को सम्मान और प्रेम दे रहे हैं।
सोचिए, उस माँ (Motherland) का सम्मान जिससे विदेशी प्यार करते हैं, क्या वहाँ के बच्चों को यह पढ़ाना नहीं चाहिए?
जब अरब देश हमारे राष्ट्रीय गीत का सम्मान कर रहे हैं, तो जो लोग यहाँ 'वंदे मातरम्' पर रोष मोल लेते हैं, क्या उन्हें शर्म नहीं आनी चाहिए?
तथ्य यह है कि: 'वंदे मातरम्' सिर्फ एक गीत नहीं है – यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर रचना है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में लाखों क्रांतिकारियों को जोश दिया था। यह किसी धर्म की बात नहीं, यह इस मिट्टी की बात है।
कमेंट में बताएं: क्या आपको नहीं लगता कि इन तथाकथित 'सेक्युलर' लोगों को अरब देशों से सीखना चाहिए? क्या आप उन लोगों का विरोध करते हैं जो 'वंदे मातरम्' का अपमान करते हैं? 👇😡
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