बरेली में रासलीला का चौथा दिन: वृंदावन की मंडली ने सुनाई खाटू श्याम की अलौकिक कथा
@Bareillylive: श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में आयोजित रासलीला एवं भक्त लीला के चौथे दिन शनिवार 3 अक्टूबर को वृंदावन से पधारे स्वामी देवकीनंदन महाराज की मंडली द्वारा श्री खाटू श्याम चरित्र लीला का मनोहारी मंचन किया गया। कार्यक्रम में भारी संख्या में भक्त उपस्थित रहे और बाबा श्याम के भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया।
बर्बरीक की कथा का मार्मिक वाचन:
स्वामी देवकीनंदन महाराज ने कथा वाचन के दौरान बताया कि खाटू श्याम का मूल नाम बर्बरीक था, जो पांडव पुत्र भीम और हिडम्बा के पौत्र तथा घटोत्कच और मौरवी (अहिल्यावती) के पुत्र थे। भगवान शिव और भगवती की कठोर तपस्या से उन्हें तीन अत्यंत शक्तिशाली बाण प्राप्त हुए थे, जिनकी शक्ति इतनी अपार थी कि वे एक ही बाण से पूरे युद्ध का नक्शा बदल सकते थे।
महाभारत युद्ध आरंभ होने पर बर्बरीक युद्ध देखने मैदान की ओर जा रहे थे। भगवान कृष्ण को ज्ञात हुआ कि बर्बरीक ने प्रतिज्ञा ली है कि जो सेना हार रही होगी, वे उसी की ओर से लड़ेंगे। इससे युद्ध का संतुलन बिगड़ सकता था। अतः भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धारण कर बर्बरीक से वार्ता की और उनकी प्रतिज्ञा का कारण जाना।
बर्बरीक ने कहा कि वे एक तीर से सारे युद्ध का नक्शा बदल देंगे। भगवान कृष्ण ने उनकी शक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक पेड़ की ओर इशारा किया और कहा कि यदि वे उस पेड़ के प्रत्येक पत्ते में छेद कर दें, तो ही उनकी शक्ति पर विश्वास करेंगे। बर्बरीक ने एक ही तीर चलाया और सारे पत्तों में छेद हो गए। भगवान कृष्ण ने अपना पैर हटाकर देखा तो जो पत्ता उनके पैर के नीचे दबा था, उसमें भी छेद हो चुका था।
प्रभु समझ गए कि बर्बरीक सारा युद्ध एक दिन में ही समाप्त कर देगा और पांडव हार जाएंगे। अतः उन्होंने बर्बरीक से दान में उसका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने खुशी-खुशी अपना शीश दान कर दिया। तब भगवान कृष्ण अपने असली रूप में आ गए और बर्बरीक को आशीर्वाद दिया कि कलयुग में उनकी पूजा खाटू श्याम के नाम से होगी। बर्बरीक की इच्छा के अनुसार भगवान ने उसके शीश को एक पर्वत पर स्थापित कर दिया, जहां से उसने पूरा महाभारत युद्ध देखा।
कलयुग में यह शीश राजस्थान के सीकर जिले के खाटू नगर में प्रकट हुआ, जहां आज खाटू श्याम का भव्य मंदिर स्थित है।
यजमान एवं आयोजक समिति का सहयोग:
मीडिया प्रभारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि आज के यजमान विवेक शरण अग्रवाल, संजय गोयल और वीरेंद्र स्वरूप अग्रवाल रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कमेटी के जुगल किशोर साबू, मोहन गुप्ता, सुरेश मिन्ना, विकास शर्मा, कैलाश शर्मा, प्रेम शंकर अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, नवीन गोयल, संजय शर्मा, समित अग्रवाल, आशीष मालू, कृष्णा अग्रवाल, संजय अग्रवाल, मुकेश शर्मा, मनोज अग्रवाल, निरंकार ओबेरॉय, सत्य प्रकाश ओबेरॉय, शिव कुमार सिंह, विपिन सक्सेना, रिंकू, शुभम आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
कल होगा गिरिराज पूजन एवं छप्पन भोग लीला:
कमेटी ने बताया कि कल रविवार 4 अक्टूबर को सायंकाल 6:00 बजे से 9:30 बजे तक गिरिराज पूजन और छप्पन भोग की लीला का मंचन किया जाएगा। भक्त जन इस पावन अवसर पर शामिल होने के लिए आमंत्रित हैं।