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Jodhpur, Jodhpur | Jul 29, 2026

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रीढ़ की सर्जरी का मतलब हमेशा बड़ा चीरा लगना नहीं होता।

आज की आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की मदद से रीढ़ की कई सर्जरी बहुत छोटे छेदों के माध्यम से की जा सकती हैं, जिसमें माइक्रोस्कोप या एंडोस्कोप का उपयोग किया जाता है। इससे मांसपेशियों को होने वाली क्षति और रक्तस्राव को कम करने में मदद मिल सकती है, साथ ही उपयुक्त मरीजों में तेजी से रिकवरी और जल्दी चलने-फिरने में सहायता मिलती है।

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी अलग-अलग तकनीकों से की जा सकती है, जिनमें यूनिपोर्टल और बाइपोर्टल तकनीक प्रमुख हैं।

लेकिन सवाल है—इनमें से बेहतर विकल्प कौन-सा है?

इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। सही तकनीक का चुनाव मरीज की रीढ़ की समस्या, उसकी स्थिति और सर्जन की विशेषज्ञता एवं प्रशिक्षण पर निर्भर करता है।

उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है—हर मरीज के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त तकनीक का चुनाव करना।

👨‍⚕️ डॉ. दिव्यम शर्मा
सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन

रीढ़ की सर्जरी का मतलब हमेशा बड़ा चीरा लगना नहीं होता। आज की आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की मदद से रीढ़ की कई सर्जरी बहुत छोटे छेदों के माध्यम से की जा सकती हैं, जिसमें माइक्रोस्कोप या एंडोस्कोप का उपयोग किया जाता है। इससे मांसपेशियों को होने वाली क्षति और रक्तस्राव को कम करने में मदद मिल सकती है, साथ ही उपयुक्त मरीजों में तेजी से रिकवरी और जल्दी चलने-फिरने में सहायता मिलती है। एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी अलग-अलग तकनीकों से की जा सकती है, जिनमें यूनिपोर्टल और बाइपोर्टल तकनीक प्रमुख हैं। लेकिन सवाल है—इनमें से बेहतर विकल्प कौन-सा है? इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। सही तकनीक का चुनाव मरीज की रीढ़ की समस्या, उसकी स्थिति और सर्जन की विशेषज्ञता एवं प्रशिक्षण पर निर्भर करता है। उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है—हर मरीज के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त तकनीक का चुनाव करना। 👨‍⚕️ डॉ. दिव्यम शर्मा सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन

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