बद्री-केदार की आस्था बनी पहाड़ की बेटियों की कमाई का जरिया!!!
मंदिरों के खूबसूरत स्मृति चिह्न बनाकर आत्मनिर्भर हो रहीं अगस्त्यमुनि की महिलाएं, समूह ने एक साल में कमाया ₹3.95 लाख का मुनाफा!
रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि की ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बद्रीनाथ, केदारनाथ, धारी देवी, कार्तिक स्वामी और कालीमठ जैसे प्रसिद्ध धामों के आकर्षक मंदिर मॉडल तैयार कर रही हैं।
पहाड़ी वास्तुकला और बद्री-केदार की धार्मिक पहचान को स्मृति चिह्नों में ढालकर महिलाएं घर के आसपास ही रोजगार और आय का मजबूत साधन तैयार कर रही हैं।
कमाल की उपलब्धि देखिए—
2024-25 में शुद्ध लाभ: ₹2.54 लाख
2025-26 में शुद्ध लाभ: ₹3.95 लाख
चालू वित्तीय वर्ष में अब तक बिक्री: करीब ₹7 लाख
समूह से जुड़ी युवती दिव्या पढ़ाई के साथ धूपबत्ती, अगरबत्ती और मंदिरों के स्मृति चिह्न तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद घर के पास ही रोजगार का अवसर मिला है।
स्थानीय संस्कृति + हुनर + बाजार = आत्मनिर्भरता,
इन महिलाओं की मेहनत सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं बदल रही, बल्कि बद्री-केदार की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को स्मृति चिह्नों के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाने का काम भी कर रही है।
पहाड़ की बेटियां अब सिर्फ पहाड़ की पहचान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नई तस्वीर भी गढ़ रही हैं।
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Rudraprayag, Rudraprayag | Aug 19, 2026