35 साल का संघर्ष खत्म, सेम गांव पहुंचा पहला वाहन!! 1991 से सड़क का इंतजार कर रहे ग्रामीणों का सपना हुआ साकार, दरमोला से सेम तक 2.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा, वाहनों पर पुष्पवर्षा कर जताई खुशी!!
पलायन कर चुके ग्रामीणों के लौटने की जगी उम्मीद!!
रुद्रप्रयाग। भरदार पट्टी के सेम गांव में बुधवार का दिन ग्रामीणों के लिए ऐतिहासिक बन गया। वर्ष 1991 से सड़क का इंतजार कर रहे ग्रामीणों का 35 वर्षों का संघर्ष आखिरकार रंग लाया और पहली बार वाहन गांव तक पहुंचा। लंबे इंतजार के बाद गांव में गाड़ी पहुंचने पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा और तिलक लगाकर वाहनों का स्वागत किया। इस दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ठेकेदार मुकेश राणा को फूल-मालाएं पहनाकर और शॉल भेंटकर सम्मानित किया। वहीं, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजेश कुमार का भी स्वागत कर आभार जताया।
सड़क गांव तक पहुंचने से ग्रामीणों में खुशी के साथ नई उम्मीद भी जगी है। अब तक सड़क के अभाव में ग्रामीणों को आवागमन, दैनिक जरूरतों का सामान लाने और सामाजिक आयोजनों के दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। विशेष रूप से शादी-विवाह के अवसरों पर सामान ढोना बड़ी चुनौती बना रहता था। अब वाहन गांव तक पहुंचने से इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण नितिन डिमरी ने बताया कि कुछ दिनों बाद उनकी बहन की शादी है। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण शादी का सामान गांव तक पहुंचाना मुश्किल होता था, लेकिन अब वाहन गांव तक आने से यह परेशानी दूर होगी। उन्होंने कहा कि सड़क बनने से गांव के सभी लोगों को लाभ मिलेगा।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1991 में रतनपुर-स्विली-चौरास मोटर मार्ग का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन विभिन्न विवादों के कारण सड़क सेम गांव तक नहीं पहुंच पाई। इसके बाद वर्ष 2004-05 में दरमोला-सेम मोटर मार्ग के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन तब भी ग्रामीणों को सड़क सुविधा नहीं मिल सकी। वर्ष 2014-15 में भूमि संबंधी विवादों और आवश्यक सहमति नहीं बन पाने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।
इसके बावजूद ग्रामीण लगातार सड़क निर्माण की मांग उठाते रहे।
स्थानीय निवासी एवं वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मी प्रसाद डिमरी ने बताया कि गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए उन्होंने वर्ष 1991 से लगातार संघर्ष किया। इस दौरान कई बार विवादों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं में आई अड़चनों के कारण निर्माण कार्य बाधित हुआ। सड़क निर्माण के लिए संघर्ष समिति के माध्यम से भी प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि आज गांव तक वाहन पहुंचना वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि दरमोला से सेम गांव तक लगभग 2.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण 1 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से पूरा किया गया है। गांव में पहली बार वाहन पहुंचने पर ग्रामीणों की खुशी देखकर उन्हें भी प्रसन्नता हुई। सड़क बनने से ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
पलायन के कारण सेम गांव के अधिकांश घर खाली हो चुके हैं। ऐसे में सड़क पहुंचने को ग्रामीण गांव के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि बेहतर सड़क संपर्क से गांव में बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी, कृषि एवं अन्य दैनिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार तथा आवागमन की संभावनाएं बेहतर होंगी। ग्रामीणों को विश्वास है कि सड़क सुविधा मिलने से पलायन कर चुके लोग भी अपने पैतृक गांव लौटने के लिए प्रेरित होंगे और लंबे समय से सूने पड़े घरों में फिर से चहल-पहल दिखाई देगी।