बांस की शिल्पकला में साकार हो रही ऐतिहासिक धरोहरें
हुनर हाट में एक छत के नीचे देश-विदेश की ऐतिहासिक
हिमाचल प्रदेश के तहसील मुख्यालय पंचरुखी से सटे गांव लदोह निवासी लब्धप्रतिष्ठित शिल्पकार विनय कुमार अवस्थी ने बांस की सामग्री से सृजित ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पुरातात्त्विक महत्व की धरोहरों को अपनी अद्भुत शिल्पकला के माध्यम से ‘हुनर हाट’ में एक छत के नीचे इस प्रकार साकार किया है कि इन्हें देखने वाला बरबस दांतों तले उंगली दबाने को विवश हो जाता है।
सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि शिल्पकार विनय कुमार अवस्थी को यह कला किसी पारंपरिक शिल्प विरासत के रूप में प्राप्त नहीं हुई। उनकी कला-साधना को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी दिव्य शक्ति की प्रेरणा ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ाया हो।
1964 में जन्मे विनय कुमार अवस्थी का संबंध एक सामान्य कृषक परिवार से है। उन्होंने अपनी युवा शक्ति भारतीय सेना की शिक्षा कोर को समर्पित की। इसके पश्चात हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में शास्त्री शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं और वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद उनके भीतर शिल्पकला के प्रति एक नई लालसा जागृत हुई। देखते ही देखते यह लालसा साधना में बदल गई और उनके हाथों से एक के बाद एक अद्भुत कलाकृतियां आकार लेने लगीं।
धीरे-धीरे इन कलाकृतियों की कतार बढ़ती गई और इनके दर्शन के लिए आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ने लगी। दूसरी ओर, विभिन्न आयोजकों एवं संस्थाओं की ओर से उनकी कलाकृतियों को प्रदर्शनियों की शोभा बढ़ाने के लिए आमंत्रण मिलने लगे। अब तक राज्य स्तर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न आयोजनों में भी विनय कुमार अवस्थी की कलाकृतियां अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं।
विनय कुमार अवस्थी की बोतल आर्ट पर आधारित कलाकृतियां तथा बांस से निर्मित शिल्पकृतियां देश-विदेश की अनेक गणमान्य विभूतियों के कार्यालयों एवं निजी संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं।
उनकी शिल्प-साधना और ‘हुनर हाट’ में प्रदर्शित अप्रतिम कलाकृतियों से प्रभावित होकर एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने भी उनकी उपलब्धियों को अपने रिकॉर्ड्स में स्थान देकर उनकी कला-साधना को एक नई पहचान प्रदान की है।
हुनर हाट में साकार प्रमुख धार्मिक धरोहरें
हुनर हाट में बांस से निर्मित अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के प्रतिरूप दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनमें प्रमुख हैं—
1. रेणुका देवी मंदिर, नाहन
2. हिडिंबा माता मंदिर, मनाली
3. श्रीराम मंदिर, अयोध्या
4. केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड
5. शिव मंदिर, बैजनाथ, हिमाचल प्रदेश
6. पंचवक्त्र मंदिर, मंडी, हिमाचल प्रदेश
7. आशापुरी मंदिर, जयसिंहपुर, हिमाचल प्रदेश
8. भीमाकाली मंदिर, शिमला, हिमाचल प्रदेश
9. चौरासी मंदिर, भरमौर, हिमाचल प्रदेश
10. लक्ष्मी नारायण मंदिर, चंबा, हिमाचल प्रदेश
11. पराशर ऋषि मंदिर, मंडी, हिमाचल प्रदेश
12. स्वर्ण मंदिर, अमृतसर, पंजाब
13. महाकाल मंदिर, बैजनाथ, हिमाचल प्रदेश
14. चामुंडा नंदिकेश्वर धाम, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
15. बिजली महादेव मंदिर, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश
16. काष्ठकुणी शैली का मंदिर, किन्नौर
मंदिरों के अलावा भी अनूठी कलाकृतियां
विनय कुमार अवस्थी की कला केवल मंदिरों के प्रतिरूप तक सीमित नहीं है। उनकी हुनर हाट में विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं जीवनशैली से जुड़ी कलाकृतियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इनमें प्रमुख हैं—
1. रिज चर्च, शिमला, हिमाचल प्रदेश
2. ताजमहल, आगरा
3. एफिल टावर, फ्रांस
4. स्टीम रेल इंजन
5. छोटी सेलिंग बोट
6. बड़ी सेलिंग बोट
7. प्राचीन शैली पर आधारित हिमाचली घर
8. प्राचीन दो मंजिला हिमाचली मकान
9. पुरातन आटा चक्की (घराट)
10. पुरातन हिंडोला
11. ट्री हाउस
12. दूल्हे की पालकी (सुखपाल)
13. दुल्हन की पालकी
बांस में बसती है इतिहास और संस्कृति की कहानी
विनय कुमार अवस्थी की कलाकृतियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने बांस जैसी प्राकृतिक एवं सामान्य सामग्री को अपनी कल्पनाशीलता, धैर्य और सूक्ष्म शिल्प-कौशल के माध्यम से इतिहास, आस्था और संस्कृति के जीवंत प्रतीकों में परिवर्तित कर दिया है।
उनका ‘हुनर हाट’ केवल कलाकृतियों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, धार्मिक आस्था, हिमाचली संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली का एक लघु संसार प्रतीत होता है। एक ही छत के नीचे देश के विभिन्न क्षेत्रों की प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को देखकर दर्शक न केवल शिल्पकार की कला से प्रभावित होते हैं, बल्कि इन धरोहरों के प्रति अपने जुड़ाव को भी महसूस करते हैं।
एक सामान्य कृषक परिवार से निकलकर भारतीय सेना, शिक्षा विभाग और फिर शिल्पकला के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले विनय कुमार अवस्थी की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा यदि साधना, लगन और समर्पण से जुड़ जाए तो साधारण संसाधनों से भी असाधारण सृजन संभव है।