सफलता की कहानी
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कौआसरई के 30 परिवारों ने अपनाई प्राकृतिक खेती, कम लागत में बढ़ रही आमदनी
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खेती की लागत कम होने और जैविक उत्पादों के मूल्य संवर्धन से महिलाएं भी उत्साहित
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वर्मी कम्पोस्ट, एजोला एवं हरी खाद, जीवामृत स्वयं तैयार करती हैं महिलाएं
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जिले के कौआसरई ग्राम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल अब किसानों के लिए कम लागत में बेहतर उत्पादन और आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है। ग्राम के 30 परिवारों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है, जिसमें महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी है। रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम होने तथा जैविक उत्पादों के मूल्य संवर्धन से किसान परिवारों को खेती में नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
गांव की सीआरपी की महिलाएं आरती सिंह एवं रानू यादव ने बताया कि पूर्व में जब रासायनिक उर्वरक का उपयोग करते थे तो एक एकड़ में 03 बोरी यूरिया एवं 02 बोरी डीएपी इस तरह 04 हजार रूपए लग जाते थे। अब घर मे ही वर्मी कम्पोष्ट एजोला, हरी खाद तथा जीवामृत आदि तैयार कर लेते हैं। जिससे एक एकड़ में 1500 रूपए की लागत आती है। प्राकृतिक खेती से प्रथम वर्ष उत्पादन में कमी आई है। जिसकी प्रतिपूर्ति जैविक अनाज के मूल्य संवर्धन से हो जाती है। उन्होंने बताया कि चना, कुटकी, अलसी, मटर, गेहूं, धान एवं सब्जी का उत्पादन करते हैं। बाजारों में ये अधिक मूल्य पर बिक जाते हैं।
प्राकृतिक खेती से आस-पास के ग्रामों की 300 किसान महिलाएं जुड़ी हुई हैं। प्राकृतिक खेती करने से भूमि बंजर होने से बच जाती है, बीमारियों में कमी आती है। सिंचाई के लिए पनी कम लगता है तथा उपज का अधिक मूल्य मिलता है।
किसान खेती के लिए आवश्यक जैविक संसाधनों को स्थानीय स्तर पर स्वयं तैयार कर रहे हैं। किसान वर्मी कम्पोस्ट, एजोला एवं हरी खाद तैयार कर उसका उपयोग खेतों में कर रहे हैं। इससे बाहरी आदानों पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल रही है।
साथ ही जैविक संसाधनों के उपयोग से खेतों की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में भी किसान आगे बढ़ रहे हैं।
कृषि विभाग और प्रधान एनजीओ दे रहे तकनीकी मार्गदर्शन
प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों को कृषि विभाग एवं प्रधान एनजीओ द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न विधियों, जैविक खाद तैयार करने तथा खेतों में उसके उपयोग की तकनीक की जानकारी दी जा रही है। विभागीय अमले एवं संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है।
कौआसरई ग्राम में विधायक श्री शरद कोल, कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल, पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिलाओं एवं किसानों से रूबरू चर्चा कर तकनीकी जानकारी विक्रय, बीज की उपलब्धता आदि के संबंध में चर्चा की। कलेक्टर ने जैविक उत्पाद को सीधे बाजार में बेचने तथा ब्रांडिंग कर उत्पाद की पहचान एवं मूल्य संवर्धन के लिए एफपीओ बनाकर काम करने की समझाइश दी।
उप संचालक कृषि श्री केएस यादव ने बताया कि शासन द्वारा इन किसानों को 04 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से अनुदान भी दिया गया है। साथ ही बीआरसी को आवश्यक संयंत्रों की खरीदी हेतु जल्द ही 01 लाख रूपए का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
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