करनाल के शिक्षण संस्थानों में गुंजा अंगदान जागरूकता का संदेश
करनाल, 04 अक्तूबर। मृत्यु के बाद भी किसी को जीवन दिया जा सकता है, बस उसके लिए जरूरत है एक जागरूक निर्णय की। इसी भावना के साथ मोहन फाउंडेशन से जुड़ी ऑर्गन डोनेशन एम्बेसडर तथा सहायक प्रोफेसर बीआरएम कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन घरौंडा में कार्यरत डॉ नीना ने करनाल जिले के विभिन्न कॉलेजों में चलाएं अंगदान जागरूकता सप्ताह के तहत सैकड़ों युवाओं और आने वाले शिक्षकों को अंगदान के प्रति जागरूक किया।
व्यक्ति जीवित रहते हुए ऑर्गन डोनेशन फॉर्म भरकर मृत्यु के बाद अपने अंगदान की इच्छा दर्ज कर सकता है। उन्होंने समझाया कि मृत्यु की स्थिति के अनुसार अंगदान की संभावनाएं अलग-अलग होती हैं। कार्डियक डेथ की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आंखों / कार्निया का दान किया जा सकता है जबकि ब्रेन डेथ की स्थिति में चिकित्सकीय एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत कई अंग जरूरतमंद मरीज के लिए प्रत्यारोपण के लिए दान किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जीते जी तो हम एक दूसरे के काम आते हैं ,लेकिन मृत्यु के बाद भी हमारे अंग किसी जरूरतमंद को जीवन ,रोशनी और नई उम्मीद दे सकते हैं। एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों और अनेक परिवारों के जीवन में खुशियां वापस ला सकता है। डॉ नीना ने करनाल जिले के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों में जाकर अंगदान के महत्व को बताया। आर एल कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन दरार , गुरु नानक कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन कालरी जागीर इंद्री, ज्ञान भारती कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन इंदरगढ़ इंद्री, गुरु रामदास इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन राहत खाना, बीआरएम कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन घरौंडा तथा गुरु रामदास इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन राहत खाना प्रमुख रहे। डॉक्टर नीना ने कहा कि अंगदान न केवल जीवन बचाता है बल्कि यह समाज में मानवीय संवेदनाओं को भी सशक्त बनाता है। सभी को टोल फ्री नंबर 18 00 103 7 10 0 सांझा करते हुए ऑर्गन डोनर कार्ड के विषय में जानकारी दी कि कोई भी व्यक्ति अंग दान का संकल्प लेना चाहता है तो इस नंबर पर संपर्क कर सकता है। अंत में विद्यार्थियों ने कहा कि हम इस मुहिम को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएंगे।
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