वक़्त बदला... बाज़ार बदले... शहर बदला... लेकिन इन गलियों की रूह आज भी वही है। ( शिवगंगा लेन)
कभी फुर्सत मिले तो इन गलियों में ज़रूर आइएगा...
शायद किसी पुराने मकान की चौखट, किसी दुकान की खुशबू या चूड़ियों की खनक के बीच आपको देवघर की वो पुरानी याद फिर से मिल जाए, जो कहीं पीछे छूट गई है।