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कोडरमा: "हर घर तिरंगा" अभियान के तहत मॉडर्न पब्लिक स्कूल में निकली भव्य देशभक्ति झांकी, 'वंदे मातरम्' के नारों से गूँजा परिसर
Koderma, Kodarma
| Aug 14, 2026
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Koderma, Kodarma | Aug 16, 2026
झुमरी तिलैया के बाईपास रेलवे ओवरब्रिज से महाराणा प्रताप चौक तक सर्विस लेन पर गैराज और ट्रकों का कब्जा, हादसे की आशंका झुमरी तिलैया के बाईपास रेलवे ओवरब्रिज से महाराणा प्रताप चौक तक सर्विस लेन पर गैराज संचालकों और ट्रक चालकों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। सड़क किनारे वाहनों के खड़े रहने से सर्विस लेन में आवागमन प्रभावित हो रहा है। वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। पूर्व में एसडीओ द्वारा सड़क पर वाहन खड़ा करने वालों को चेतावनी देते हुए जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों ने रविवार को 11 बजे बताया कि प्रशासन से सर्विस लेन को अतिक्रमणमुक्त कर सुचारू आवागमन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
Koderma, Kodarma | Aug 16, 2026
वंदे मातरम: आजादी की लड़ाई की आवाज से लाल किले तक 150 साल का सफर क्या आप जानते हैं कि वंदे मातरम, जो कभी आजादी की लड़ाई की सबसे बुलंद आवाज था, उसे लाल किले तक पहुंचने में करीब 80 साल लग गए? बहुत से लोगों को लगता है कि हर 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम गाया जाता होगा। लेकिन ऐसा नहीं है। आजादी के बाद लंबे समय तक लाल किले से स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ ही गूंजता रहा। अब 15 अगस्त 2026 को वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे विशेष रूप से समारोह का हिस्सा बनाया जा रहा है। वंदे मातरम की कहानी सिर्फ एक गीत की कहानी नहीं है। यह उस दौर की कहानी है जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में इसके दो शब्द—‘वंदे मातरम’—नारे बने, हौसला बने और कई क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा बने। बंकिम से टैगोर तक वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं सदी में की। बाद में यह उनकी प्रसिद्ध कृति ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बना। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया। इसके बाद यह गीत धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान बनता चला गया। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में जब स्वदेशी आंदोलन तेज हुआ, तब ‘वंदे मातरम’ हर जुलूस और सभा की आवाज बन गया। अंग्रेजी सरकार ने इसे दबाने की कोशिश की, लेकिन जिस गीत पर रोक लगाई गई, वही और अधिक लोगों की जुबान पर चढ़ गया। क्रांतिकारी जेल जाते, आंदोलनकारी लाठियां खाते, फिर भी ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई देती रही। इस तरह यह गीत महज गीत नहीं रहा, बल्कि आजादी की लड़ाई का प्रतीक बन गया। विवाद की वजह क्या थी? वंदे मातरम को लेकर विवाद इसके पूरे मूल पाठ को लेकर रहा है। गीत के आगे के हिस्सों में मातृभूमि की तुलना देवी दुर्गा से की गई है। इसी कारण कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इसके पूरे पाठ को लेकर धार्मिक आपत्ति जताई। वहीं, इसके समर्थकों का तर्क रहा कि इसमें मातृभूमि को मां के रूप में सम्मान दिया गया है और स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी संख्या में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने भी ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए थे। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए 1937 में कांग्रेस ने निर्णय लिया कि सार्वजनिक अवसरों पर वंदे मातरम के शुरुआती हिस्से का ही इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर आज भी कई लोग ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ को लेकर भ्रमित रहते हैं। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अंतिम चरण में यह स्पष्ट किया गया कि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है, जबकि ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत का सम्मान प्राप्त है। दोनों का अपना ऐतिहासिक महत्व है। राष्ट्रगान को सरकारी और संवैधानिक समारोहों में निर्धारित स्थान मिला, जबकि वंदे मातरम स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बना रहा। 150 साल बाद फिर इतिहास के केंद्र में अब वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 15 अगस्त 2026 को इसके सम्मान में विशेष आयोजन हो रहे हैं और लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी इसे प्रमुखता दी जा रही है। यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस गीत की 150 साल लंबी यात्रा को याद करने का अवसर है—एक ऐसा गीत जिसे बंकिम चंद्र ने लिखा, रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वर दिया और जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में लाखों भारतीयों के भीतर देशभक्ति की भावना को मजबूत किया। बाद के दौर में ए.आर. रहमान ने ‘मां तुझे सलाम’ के जरिए वंदे मातरम की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाया। इसलिए जब 15 अगस्त को वंदे मातरम की गूंज सुनाई दे, तो इसे सिर्फ दो शब्द समझकर नजरअंदाज मत कीजिएगा। इन दो शब्दों के पीछे डेढ़ सौ साल का इतिहास है—आंदोलन है, संघर्ष है, विवाद है और सबसे बढ़कर उन अनगिनत भारतीयों की स्मृति है, जिन्होंने आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। वंदे मातरम। जय हिंद। जय भारत।
Koderma, Kodarma | Aug 15, 2026
चंदवारा थाना प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक श्री शशि भूषण कुमार को सर्वश्रेष्ठ थाना प्रभारी का सम्मान मिलने पर बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं🌹
Koderma, Kodarma | Aug 15, 2026
देश के टॉप-100 पुलिस कप्तानों में झारखंड के पांच अफसर, लिस्ट में बनाई खास जगह। झारखंड के पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। फेम इंडिया–एशिया पोस्ट की ओर से जारी देश के 100 सर्वश्रेष्ठ पुलिस कप्तानों की सूची में झारखंड के पांच आइपीएस अधिकारियों ने जगह बनाई है। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नेतृत्व और जनविश्वास जैसे मानकों के आधार पर तैयार इस सूची में राज्य के इन अधिकारियों का चयन हुआ है। सूची में कोडरमा के निवर्तमान एसपी एवं वर्तमान में पाकुड़ के एसपी श्री अनुदीप सिंह के नाम शामिल हैं। सर को बहुत-बहुत बधाई🌹 #PakurPolice #anudipsingh #ips
Koderma, Kodarma | Aug 15, 2026