गरीबों को पहले मिला PM आवास का सहारा, अब उसी आशियाने पर मंडराया संकट“मकान गिरा तो बच्चों को लेकर कहां जाएंगे?”—आशियाना बचाने तहसीलदार से लगाई गुहार जिस छत ने दी थी उम्मीद, अब उसी छत को बचाने के लिए गरीब परिवारों की लड़ाई
गुनौर। गुनौर नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 9 के क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए मकानों को जबरन गिराए जाने के आरोपों को लेकर गरीब परिवारों में आक्रोश है। पीड़ितों ने कुछ प्रभावशाली लोगों पर दबाव बनाकर उनके आवास हटवाने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने एवं कार्रवाई होने तक मकान हटाने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
पीड़ित सिल्लू बाई कोरी, पति स्वर्गीय संतोष कोरी ने तहसील प्रशासन को दिए आवेदन में बताया कि वह विधवा महिला हैं और मजदूरी कर अपने बच्चों का भरण-पोषण करती हैं। उनके अनुसार उनके ससुर मनुवा कोरी का खसरा नंबर 1222 में करीब 50-60 वर्षों से मकान बना हुआ है। इसी स्थान पर वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्मित है। उनके साथ उषा बाई रैकवार, किरन रैकवार, पूजा कोरी सहित अन्य गरीब परिवारों के भी प्रधानमंत्री आवास बने हुए हैं।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अशोक मिश्रा, मीरा मिश्रा, सुमन पाठक पति आमोद पाठक तथा रानी पाठक पति अखिलेश कुमार पाठक द्वारा इन गरीब परिवारों के मकानों को हटवाने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ितों का कहना है कि संबंधित भूमि को लेकर पूर्व में भी राजस्व न्यायालय में मामला चला था।
पीड़ित पक्ष के मुताबिक, 13 दिसंबर 2014 को तहसीलदार द्वारा सुमन पति आमोद पाठक विरुद्ध रामचरण सहित अन्य के मामले में आवेदन निरस्त किया गया था। इसके बाद अपील अधिकारी द्वारा भी 27 मई 2016 को धारा 250 के तहत प्रस्तुत आवेदन को खारिज कर दिया गया था। पीड़ितों का आरोप है कि इसके बावजूद अब उन्हें उनके प्रधानमंत्री आवास से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है।
मकान हटाने पहुंचा प्रशासनिक अमला
मामले को लेकर बुधवार को गुनौर तहसीलदार, नगर परिषद के सीएमओ, पटवारी सहित प्रशासनिक अमला मौके पर मकान हटाने के लिए पहुंचा। हालांकि किसी कारणवश कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी और मकान नहीं हटाए गए। इसके बाद प्रभावित परिवार तहसील कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी पूरी बात रखी।
पीड़ित परिवारों ने तहसीलदार से मांग की कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके प्रधानमंत्री आवासों को किसी भी स्थिति में न हटाया जाए। गरीब परिवारों का कहना है कि यदि उनके मकान गिरा दिए गए तो वे अपने बच्चों और परिवार के साथ कहां जाएंगे।
तहसीलदार ने दिया जांच का भरोसा
पीड़ितों की शिकायत सुनने के बाद तहसीलदार ने उन्हें मामले की जांच कराने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए उनके आशियानों को बिना उचित जांच एवं वैधानिक प्रक्रिया के नहीं हटाया जाएगा। अब देखना होगा कि राजस्व रिकॉर्ड और पूर्व में हुए न्यायालयीन आदेशों की जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता है।