संस्कृत विद्यालयों में अध्ययन-अध्यापन का बेहतर वातावरण बने, मध्यमा परीक्षा 2027 में विद्यार्थियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य : मृत्युंजय कुमार झा
दरभंगा, 26 सितंबर।
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत दरभंगा जिले के सभी संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक एवं प्राचार्यों की महत्वपूर्ण बैठक आज जिला अतिथिगृह, दरभंगा में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने की।
बैठक में जिले के सभी संस्कृत विद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से मध्यमा परीक्षा 2026 में विद्यालयवार आवेदन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या, परीक्षा परिणाम, सप्लीमेंट्री परीक्षा में विद्यार्थियों की सहभागिता तथा विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा की गई। साथ ही आगामी मध्यमा परीक्षा 2027 के लिए विद्यालयवार लक्ष्य निर्धारित किया गया।
अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि मध्यमा परीक्षा 2027 में पिछले वर्ष की तुलना में विद्यार्थियों की संख्या कम-से-कम दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालय केवल परीक्षा केंद्र न बनें, बल्कि वहां नियमित रूप से अध्ययन-अध्यापन, अनुशासन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित हो।
उन्होंने बैठक में उपस्थित जिला शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत संचालित विद्यालयों के विद्यार्थियों को अन्य विद्यालयों की तरह सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का समुचित लाभ मिले। विशेष रूप से मध्याह्न भोजन, प्रोत्साहन राशि, छात्र-छात्राओं से जुड़ी अन्य सरकारी सुविधाओं एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों तक सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक पहल करने को कहा।
बैठक में संस्कृत विद्यालयों की आधारभूत संरचना के विकास पर भी व्यापक चर्चा हुई। विद्यालयों में भवन, कक्षाओं एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए स्थानीय विधायकों, विधान पार्षदों एवं सांसदों के माध्यम से विशेष पहल करने तथा सरकार एवं विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से संस्कृत विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इस अवसर पर बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सदस्य एवं सचेतक प्रो. विनय चौधरी का बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा द्वारा मिथिला की परंपरागत पाग, टोपटा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। प्रो. विनय चौधरी ने संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं, आधारभूत संरचना, शिक्षकों के हित एवं विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने के विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने मध्यमा परीक्षा 2027 में अधिक से अधिक विद्यार्थियों का आवेदन सुनिश्चित करने तथा परीक्षा में उनकी सहभागिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
बोर्ड के सदस्य अरुण झा ने सभी प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों से विद्यालयों की आधारभूत संरचना के साथ-साथ विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मध्यमा परीक्षा 2027 में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए सभी विद्यालयों को मिशन मोड में कार्य करना होगा।
बैठक में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को गंभीरता से लिपिबद्ध किया तथा आश्वस्त किया कि संस्कृत विद्यालयों को मध्याह्न भोजन, प्रोत्साहन राशि सहित अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक पहल की जाएगी। उन्होंने मध्यमा परीक्षा 2027 के लक्ष्य को प्राप्त करने में विभाग की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
इस अवसर पर संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों एवं जिला शिक्षक संघ की ओर से बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा को मिथिला की प्रसिद्ध मखाना माला, अंगवस्त्र एवं पाग से सम्मानित किया गया। वहीं सुपौल से आए शिक्षक धर्मेंद्र कुमार आचार्य ने भगवती की चुनरी भेंट कर मंगलकामना एवं आशीर्वाद प्रदान किया।
बैठक में संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सदस्यगण तथा जिला शिक्षा विभाग के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि संस्कृत शिक्षा को मजबूत करना, संस्कृत विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण बनाना और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की प्राथमिकताओं में है। मध्यमा परीक्षा 2027 के लिए निर्धारित लक्ष्य को सभी के सामूहिक प्रयास से पूरा किया जाएगा।