मसूरी एमपीजी कॉलेज में चढ़ा छात्रसंघ चुनाव का रंग, चार संगठनों ने उतारे प्रत्याशी
नामांकन के साथ छात्र संगठनों ने दिखाया दमखम, अध्यक्ष पद को लेकर एबीवीपी, एनएसयूआई और मसूरी छात्र संगठन आमने-सामने
मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी के एकमात्र एमपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव का रंग अब पूरी तरह चढ़ गया है। सोमवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने छात्रसंघ के अलग-अलग पदों के लिए अपने प्रत्याशियों का नामांकन कराया। नामांकन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), एनएसयूआई, मसूरी छात्र संगठन और जौनपुर ग्रुप ने शक्ति प्रदर्शन कर चुनावी माहौल को गरमा दिया। प्रत्याशियों के समर्थन में छात्र नेताओं ने अपनी ताकत दिखाते हुए जीत के दावे किए। एबीवीपी ने कॉलेज को अपना पुराना मजबूत आधार बताते हुए कहा कि एमपीजी कॉलेज में संगठन लंबे समय से छात्रहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है। संगठन के नेताओं ने कहा कि पिछली बार कुछ कमियों के कारण अध्यक्ष पद की सीट हाथ से निकल गई थी, लेकिन इस बार ठोस रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं। एबीवीपी ने सभी प्रमुख पदों पर जीत का दावा करते हुए कहा कि संगठन छात्र-छात्राओं की समस्याओं को कॉलेज स्तर से लेकर हर मंच तक उठाता रहा है।
वहीं एनएसयूआई ने छात्र हितों के साथ देश में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को चुनावी चर्चा का हिस्सा बनाया। एनएसयूआई नेताओं ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भी छात्रों के मुद्दों को विभिन्न मंचों पर उठाया जा रहा है। एनएसयूआई ने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखने की बात कही।
जौनपुर ग्रुप की भूमिका पर निगाहें
छात्रसंघ चुनाव में जौनपुर ग्रुप ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। ग्रुप के नेताओं ने कहा कि वह लंबे समय से छात्रसंघ चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाता आया है। इस बार महासचिव पद पर अपना प्रत्याशी मैदान में उतारने के साथ अध्यक्ष पद के चुनाव में भी उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। ग्रुप ने दावा किया कि वह जिस प्रत्याशी का समर्थन करेगा, उसे जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत लगाएगा। इधर मसूरी छात्र संगठन ने अध्यक्ष और महासचिव पद पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। संगठन के नेताओं ने कहा कि पिछले चुनाव में छात्रों ने उनके प्रत्याशी को समर्थन दिया था और अध्यक्ष पद पर जीत दिलाई थी। संगठन का कहना है कि एमपीजी कॉलेज की भूमि से जुड़े मुद्दे सहित कॉलेज की विभिन्न समस्याओं को उसने लगातार उठाया है। कुछ काम अभी अधूरे हैं, जिन्हें पूरा कराने के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखने की बात कही गई।
अब मुद्दों और रणनीति की परीक्षा
नामांकन के साथ ही एमपीजी कॉलेज का चुनाव अब केवल प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि छात्र संगठनों की रणनीति और उनके मुद्दों की भी परीक्षा बन गया है। एक ओर संगठन अपनी पुरानी पकड़ और छात्रहित के कार्यों को आधार बना रहे हैं, तो दूसरी ओर पेपर लीक, कॉलेज की समस्याएं, छात्र सुविधाएं और लंबित कार्य चुनावी चर्चा में हैं। आने वाले दिनों में प्रत्याशियों का प्रचार और छात्रों के बीच संवाद यह तय करेगा कि कौन संगठन अपने पक्ष में समर्थन जुटा पाता है।
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Mussoorie, Dehradun | Sep 24, 2026