₹75 लाख नाली के नाम पर पैसे की बर्बादी...यह ₹75 लाख की ड्रेनेज नाली है या वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट?: शैलेंद्र गुप्ता
मंत्री धनीराम शांडिल जी का ड्रीम प्रोजेक्ट, लेकिन पैदल मार्ग की चौड़ाई और ₹75 लाख की नाली पर सवाल
सोलन। स्थानीय मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल जी द्वारा चंबाघाट से पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस तक बनाए जा रहे पैदल मार्ग को ड्रीम प्रोजेक्ट बताया जा रहा है, लेकिन इस निर्माण की वास्तविक स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि *जब इस नाली/मार्ग को प्रस्तावित किया गया था, तब इसकी चौड़ाई 1.20 मीटर रखी गई थी, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद मौके पर इसकी चौड़ाई मात्र लगभग 80 सेंटीमीटर दिखाई दे रही है।*
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब निर्धारित चौड़ाई ही पूरी नहीं की गई तो पैदल चलने वालों को इस परियोजना का वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा?
जब यह परियोजना पैदल चलने वालों की सुविधा के लिए है, तो रास्ते की पर्याप्त चौड़ाई और उपयोगिता सुनिश्चित करना जरूरी है। 1.20 मीटर प्रस्तावित मार्ग का लगभग 80 सेंटीमीटर रह जाना अपने आप में निर्माण की योजना और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर को दर्शाता है। संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित चौड़ाई और वास्तविक निर्मित चौड़ाई में अंतर क्यों है।
इसके साथ ही पानी की निकासी के लिए बनाई जा रही नाली भी सवालों के घेरे में है। इस कार्य के लिए नगर निगम सोलन द्वारा ₹75 लाख की राशि दी गई है और करीब एक मीटर चौड़ाई की नाली बनाए जाने की बात कही गई थी। लेकिन मौके पर बनी नाली की संरचना देखकर यह समझना मुश्किल है कि इसमें बारिश का पानी आखिर जाएगा कैसे।
नाली इतनी संकरी दिखाई देती है कि एक व्यक्ति का आना-जाना तक संभव नहीं है और ऊपर से इसे ढक दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि पानी इसमें प्रवेश कैसे करेगा, इसकी सफाई कैसे होगी और पानी की निकासी कैसे होगी?
तो फिर सवाल बिल्कुल सीधा है—₹75 लाख की नाली है या वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट?
अगर इसका उद्देश्य पानी को ड्रेन करना है, तो इसकी डिजाइन और निर्माण को देखकर ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है कि पानी की निकासी के बजाय पानी को रोकने की व्यवस्था तैयार हो गई है?
यह पहली बार नहीं है जब सोलन में किसी निर्माण कार्य की उपयोगिता और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शामती बाईपास सहित पूर्व के कुछ निर्माण कार्य भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में इस परियोजना में भी केवल इसे “ड्रीम प्रोजेक्ट” कह देना पर्याप्त नहीं है।
जनता के पैसे का जवाब जनता को मिलना चाहिए। पीडब्ल्यूडी और नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि ₹75 लाख की लागत से बनी इस नाली का तकनीकी उद्देश्य क्या है, इसकी स्वीकृत चौड़ाई कितनी है, प्रस्तावित 1.20 मीटर की चौड़ाई घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर क्यों रह गई और पैदल मार्ग की निर्धारित चौड़ाई क्या है।
*ड्रीम प्रोजेक्ट वही होता है जो जनता की समस्या का समाधान करे। जनता यह पूछने को मजबूर न हो कि “यह ₹75 लाख की ड्रेनेज नाली है या वाटर हार्वेस्टिंग टैंक?”*
Solan, Solan | Oct 1, 2026