
कृतज्ञता और आत्मिक शांति के लिए समर्पित श्राद्ध पक्ष :
डॉ. सुरेश मिश्रा
श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और मां दुर्गा चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि सनातन संस्कृति में पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्मिक शांति के लिए समर्पित श्राद्ध पक्ष इस वर्ष 26 सितंबर 2026 ,शनिवार से प्रारंभ होने जा रहा है, जो 10 अक्टूबर 2026 ,शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ संपन्न होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस साल श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ और समापन दोनों ही शनिवार के दिन हो रहा है, जिसे शास्त्रों में पितृ कृपा और दान-पुण्य के लिए एक दुर्लभ व कल्याणकारी संयोग माना गया है।
हिंदू धर्म में तीन प्रकार के ऋण बताए गए हैं - देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। इनमें से पितृ ऋण को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों के निमित्त किया गया तर्पण और दान न केवल उन्हें तृप्ति प्रदान करता है, बल्कि वंशजों को सुख, समृद्धि, दीर्घायु और संतान सुख का आशीर्वाद भी देता है।
श्राद्ध पक्ष के मुख्य नियम और अनुष्ठान : कुशा और काले तिल से तर्पण: हर दिन ब्रह्म मुहूर्त या दोपहर के समय जल में काले तिल, दूध और कुशा मिलाकर पितरों को अंजलि दी जाती है।
ब्राह्मण भोज और पंचबलि: श्राद्ध तिथि पर ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है।
इसके साथ ही पंचबलि भोग गाय, कुत्ता, कौआ, देवादि और चींटियों के लिए भोजन का अंश निकाला जाता है।
दान का महत्व: इस दौरान अन्न, वस्त्र, भूमि और गौ दान का विशेष महत्व माना गया है।
धार्मिक मान्यताएं :धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इन 16 दिनों के लिए यमराज पितरों को मुक्त कर देते हैं, जिससे वे अपने वंशजों के हाथों से जल और अन्न ग्रहण करने के लिए पृथ्वी लोक पर आते हैं। जो लोग किन्हीं कारणों से अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि भूल गए हैं, वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन सामूहिक रूप से अपने सभी पितरों का श्राद्ध कर सकते है।
जो 10 अक्टूबर 2026 ,शनिवार को है।