
#भाजपा_के_भीतर_की_खींचतान_कांग्रेस_के_लिए_बन_सकती_है_सत्ता_की_चाबी
#बिसाऊ में चेयरमैन की कुर्सी बनी सियासी अखाड़ा, 13 सीटों का बहुमत, फिर भी भाजपा में घमासान !
बिसाऊ। नगरपालिका चुनाव के नतीजों ने भाजपा को भले ही 13 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत दे दिया हो, लेकिन चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचने से पहले ही पार्टी के भीतर सियासी घमासान शुरू हो गया है। बहुमत एक तरफ और गुटों की खींचतान दूसरी तरफ साफ दिखाई दे रही है। हालात ऐसे हैं कि भाजपा के पास संख्या बल होने के बावजूद चेयरमैन पद को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है
25 वार्डों में हुए चुनाव में भाजपा ने 13 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। निर्दलीय खाता तक नहीं खोल सके। चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के लिए सत्ता की राह आसान मानी जा रही थी, लेकिन चेयरमैन पद की दावेदारी ने पार्टी के भीतर ही नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक हलकों में भाजपा के 13 पार्षदों को लेकर अलग-अलग गुटों की चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि कुछ पार्षद एक खेमे के साथ हैं, जबकि शेष पार्षदों को लेकर दो-तीन अलग-अलग धड़ों की सक्रियता सामने आ रही है। यही वजह है कि चेयरमैन पद के लिए आम सहमति बनाना भाजपा के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सवाल अब यह नहीं कि भाजपा के पास बहुमत है या नहीं, सवाल यह है कि बहुमत के 13 पार्षद एक साथ हैं या नहीं।
चेयरमैन पद के लिए पूर्व चेयरमैन हारुन खत्री की पत्नी जुलेखा बानो का नाम चर्चा में है। वहीं सोनम देवी के नाम को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा कुछ अन्य नामों को लेकर भी अंदरखाने सियासी गणित साधे जाने की चर्चा है। यानी भाजपा के सामने चुनौती विपक्ष की नहीं, बल्कि अपने ही खेमे में सर्वसम्मति कायम करने की दिखाई दे रही है।
भाजपा की अंदरूनी खींचतान के बीच कांग्रेस ने भी अब उम्मीद नहीं छोड़ी है। राजनीतिक चर्चाओं में पूर्व पार्षद सलीम सैयद की पत्नी सलमा बानो और युसुफ अली की पत्नी समीना बानो का नाम चेयरमैन पद के संभावित चेहरे के रूप में सामने आ रहा है। कांग्रेस के पास 12 पार्षद हैं और भाजपा के पास 13 सामान्य स्थिति में भाजपा का बोर्ड बनना तय माना जाएगा, लेकिन एक सीट का यह अंतर अब बिसाऊ की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस बन गया है। अगर भाजपा के पार्षदों में किसी भी स्तर पर टूट या क्रॉस-वोटिंग जैसी स्थिति बनती है, तो कांग्रेस पूरे समीकरण को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है।
बिसाऊ में अब नगरपालिका की सत्ता का फैसला केवल चुनावी आंकड़ों से नहीं, बल्कि चेयरमैन चुनाव के दिन पार्षदों की एकजुटता और राजनीतिक रणनीति से तय होगा। भाजपा के सामने जहां अपने 13 पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस के सामने एक सीट के अंतर को पाटकर सत्ता तक पहुंचने की मुश्किल लेकिन संभावित कोशिश है। जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। अब असली परीक्षा राजनीतिक दलों की है। 13 सीटों का बहुमत भाजपा की ताकत है लेकिन अगर यही बहुमत गुटबाजी में उलझ गया, तो 12 सीटों वाली कांग्रेस के लिए बंद दरवाजा भी खुल सकता है। लोगों का मानना है कि इस बार चेयरमैन की कुर्सी के लिए नए भजनलाल का जन्म हो सकता है।
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