
04 प्रेस नोट 29.09.2026
मृतक की जेब से मिली डायरी के एक सुराग से पहुंची हत्यारों तक पहुंची थी पंचकूला पुलिस, महज 24 घंटे में सुलझाई थी ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री, पत्नी व उसके प्रेमी को उम्रकैद की सजा, 52-52 हजार जुर्माना भी लगाया
अवैध प्रेम प्रसंग के चलते युवक को नींद की दवा देकर गला घोंटकर की थी हत्या
पंचकूला/ 29 सितंबर:- पंचकूला पुलिस द्वारा वर्ष 2022 में सुलझाई गई ब्लाइंड मर्डर की एक गुत्थी में माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायधीश बिक्रमजीत अरोड़ा ने दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। थाना चंडीमंदिर में 2 फरवरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/201/34 के तहत दर्ज इस मामलें में अदालत ने संजय कुमार गुप्ता और अनिता देवी को धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत आजीवन कठोर कारावास तथा 50-50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 201 सहपठित धारा 34 के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास तथा 2-2 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है।
मामला फरवरी 2022 का है, जब सेक्टर-26 स्थित आशियाना बी-ब्लॉक के पास गटर में एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को बाहर निकलवाया। प्रारंभ में मृतक की पहचान नहीं हो पाई। बाद में उसकी पहचान सियाराम शाह के रूप में हुई। मृतक के भाई की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पंचकूला पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर की जांच में मृतक की जेब से मिली डायरी को अहम सुराग बनाया और इसी से जांच को आगे बढ़ाते हुए संदिग्धों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि सियाराम शाह की पत्नी अनिता देवी और संजय कुमार गुप्ता के बीच अवैध प्रेम प्रसंग के चलते कथित तौर पर योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया। पहले खाने में नींद की दवा मिलाई गई और गहरी नींद में जाने के बाद सियाराम का गला उसके ही सफेद गमछे से घोंट दिया गया। इसके बाद लोहे के हथियार से गले पर वार किए गए। शव को कंबल में लपेटकर रात करीब दो बजे गटर में फेंक दिया गया तथा वारदात से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने का प्रयास किया गया।
डीसीपी पंचकूला आईपीएस अदिति सिंह के अनुसार पुलिस ने महज 24 घंटे में ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल लोहे की छैंदी, वारदात के समय पहने कपड़े, मृतक का क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन तथा शव को ले जाते समय की सीसीटीवी फुटेज सहित महत्वपूर्ण साक्ष्य कब्जे में लिए गए। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के प्रयास सामने आने पर मामले में धारा 201 भी जोड़ी गई। मामलें की जांच सब इंस्पेक्टर सुखविन्द्र पाल द्वारा की गई।
पंचकूला पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन ने कहा कि पंचकूला पुलिस की जांच में मौके से मिले हर सुराग को वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जोड़ा गया। मृतक की जेब से मिली डायरी, घटनास्थल के साक्ष्य, आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी और सीसीटीवी फुटेज ने जांच को दिशा दी। पुलिस द्वारा साक्ष्य-आधारित जांच के परिणामस्वरूप मामले में अदालत के समक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिसके आधार पर दोनों दोषियों को न्यायालय द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई। एक बात स्पष्ट है कि अपराध के बाद साक्ष्यों को छिपाने या मिटाने के प्रयास के बावजूद कानून की पहुंच से बचना आसान नहीं है। पंचकूला पुलिस भविष्य में भी गंभीर अपराधों में तकनीकी साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच और पेशेवर अनुसंधान के माध्यम से मामलों को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।