1984 में सोमन वांगचुक के पिता सोमन वांग्याल ने लद्दाख के आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए क्रमिक भूख हड़ताल की थीं।
इस अनशन को समाप्त करने के लिए 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लेह गई थीं।
उन्होंने वांग्याल को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया था और लद्दाख के समुदायों को आदिवासी (ST) का दर्जा दिलाने का वादा किया था।
परंतु अब की तानाशाही सरकार सत्ता के घमंड में इतनी चूर है कि चाहे कोई मरे या जीये इसे कोई फर्क नहीं पड़ता।
सोनम वांगचुंग 18 दिनों से भूख हड़ताल पर है पर इस तानाशाही सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।
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