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आज कोटा में NEET री-एग्जाम के बीच मानवता की एक खूबसूरत मिसाल आज NEET री-एग्जाम के दौरान भीमगंज थाना क्षेत्र के आसपास बने परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को छोड़ने आए थे। परीक्षा, रिपोर्टिंग और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया के कारण कई अभिभावकों को 4-5 घंटे तक बाहर इंतजार करना पड़ रहा था। ऐसे समय में गिरिराज खंडेलवाल जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शिखा खंडेलवाल ने अपने घर के दरवाजे अभिभावकों के लिए खोल दिए। बैठने की व्यवस्था की, बारिश से बचने के लिए आश्रय दिया और अपने घर के वॉशरूम तक सभी के लिए उपलब्ध करवा दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज़ से आए अभिभावकों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। लेकिन इस कहानी के असली नायक केवल गिरिराज जी और शिखा जी ही नहीं हैं। धीरे-धीरे पूरा मोहल्ला इस सेवा कार्य में शामिल हो गया। किसी ने चाय की व्यवस्था की, किसी ने कचौरी मंगवाई, किसी ने लस्सी का इंतजाम किया। जो भी बन पड़ा, लोगों ने मिलकर किया ताकि बाहर इंतजार कर रहे अभिभावकों को थोड़ी राहत मिल सके। आज जब हम अक्सर समाज में संवेदनशीलता की कमी की बातें करते हैं, तब कोटा के इस छोटे से मोहल्ले ने दिखा दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। बिना किसी प्रचार, बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी अपेक्षा के अनजान लोगों के लिए अपने घर, अपना समय और अपने संसाधन खोल देना वास्तव में मानवता का सबसे सुंदर रूप है। इतना ही नहीं, परीक्षा के नियमों के कारण कुछ विद्यार्थियों को अपने आभूषण बाहर उतारने पड़े। एक छात्रा ने अपने कुंडल भी इनके पास सुरक्षित रखे और निश्चिंत होकर परीक्षा देने चली गई। यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि विश्वास का भी प्रतीक है। मैं संयोगवश वहाँ एक विद्यार्थी को छोड़ने गया था। गिरिराज जी मेरे कॉलेज के सीनियर भी हैं। वहाँ का माहौल देखकर लगा कि कोटा की पहचान केवल कोचिंग संस्थानों, परीक्षाओं और परिणामों से नहीं है। कोटा की असली पहचान ऐसे लोग हैं, जो जरूरत पड़ने पर अजनबियों को भी अपना बना लेते हैं। 🙏 ऐसे ही लोगों की वजह से समाज में भरोसा और इंसानियत कायम है। #NEETReExam #Kota #Humanity #ServiceBeforeSelf #GirirajKhandelwal #ShikhaKhandelwal #इंसानियत #मानवता #कोटासरकार - Ladpura News