
हिण्डौन सिटी। शताब्दी साहित्यकार पद्मश्री रामदरश मिश्र के जन्मदिन पर रामदरश मिश्र न्यास द्वारा प्रतिष्ठित शताब्दी सृजन सम्मान साहित्यकार कृष्ण बिहारी पाठक को प्रदान किया गया। गौरतलब है रामदरश मिश्र न्यास द्वारा वर्ष 2024में शुरू किये गए सम्मान की श्रृंखला में इस वर्ष पहली बार किसी आलोचना कृति को यह सम्मान दिया गया है।
समारोह में कृष्ण बिहारी पाठक को साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, रामदरश मिश्र न्यास की सचिव प्रोफेसर स्मिता मिश्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ रामदेव शुक्ल, डॉ चितरंजन मिश्र, साहित्यकार ओम निश्चल,गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजीव कुमार दुबे , डॉ वेद मित्र शुक्ल एवं हरिशंकर राढी ने प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं 21 हजार रुपए का चेक प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर न्यास द्वारा जारी प्रशस्ति में यह रेखांकित किया गया कि कृष्ण बिहारी पाठक समकालीन हिंदी आलोचना के युवा हस्ताक्षर हैं। विवेचक, समीक्षक एवं गद्यकार के रूप में इन्होंने आलोचना विधा को नई दृष्टि एवं वैचारिक गहराई प्रदान की है। वर्ष 2023 में प्रकाशित इनकी आलोचनात्मक कृति "रामचंद्र शुक्ल : दृष्टि-सृष्टि" हिंदी आलोचना परंपरा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में स्वीकृत हुई है। इस कृति में आचार्य रामचंद्र शुक्ल के साहित्य-दर्शन का पुनर्पाठ, मौलिक व्याख्या एवं समकालीन संदर्भों में पुनर्मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है। इस कृति की वैचारिक प्रखरता, विश्लेषणात्मक क्षमता एवं भाषिक परिष्कार के कारण न्यास ने इन्हें आलोचना विधा में रामदरश मिश्र शताब्दी सृजन-सम्मान 2026 हेतु चयनित किया है।