हरियाणा के सोनीपत से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। वृद्धाश्रम में रहने वाले 74 वर्षीय कपड़ा कारोबारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियां न तो अंतिम संस्कार में पहुंचीं और न ही तेरहवीं की रस्म में शामिल हुईं। रविवार को सोनीपत के गीता मंदिर में उनकी तेरहवीं की रस्में पूरी की गईं। इस दौरान हवन-यज्ञ हुआ और लोगों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग और स्थानीय लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
बताया गया कि शिवचरण गुप्ता लंबे समय से वृद्धाश्रम में रह रहे थे। बीमारी की जानकारी उनकी बेटियों को करीब 20 दिन पहले ही दे दी गई थी। निधन के बाद बेटियों ने आने में असमर्थता जताई और वीडियो कॉल के जरिए अंतिम विदाई देखी। बड़ी बेटी की ओर से अंतिम संस्कार के लिए 5100 रुपये ऑनलाइन भेजे गए थे। हालांकि, आश्रम प्रबंधन ने यह राशि वापस कर दी और अपने स्तर पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।
अंतिम संस्कार के बाद अस्थि विसर्जन के दौरान भी बेटियां मौजूद नहीं थीं। यह जिम्मेदारी उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता और समाजसेवियों ने निभाई। अब तेरहवीं में भी बेटियों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, बेटियों की ओर से अपने फैसले की विस्तृत वजह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, इसलिए पूरे मामले में सभी पक्षों को जाने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
यह घटना बुजुर्ग माता-पिता, पारिवारिक जिम्मेदारियों और बदलते रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े करती है।