*'सिर्फ शक' पर दर्ज हुई एफआईआर? वीडियो लीक प्रकरण में युवती की भूमिका और जांच की दिशा पर उठे बड़े सवाल*
उन्नाव। जिले के अजगैन कोतवाली क्षेत्र में चर्चित कथित वीडियो लीक प्रकरण में दर्ज एफआईआर और सामने आए अन्य दस्तावेजों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में एक युवक के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि एफआईआर में स्वयं शिकायतकर्ता ने लिखा है कि उसे "शक है" कि फोटो स्टूडियो संचालक या किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी निजी तस्वीरें भेजी हैं। एफआईआर में प्रत्यक्ष रूप से यह नहीं कहा गया कि आरोपी ने ही तस्वीरें प्रसारित कीं।
दूसरी ओर, मामले से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के दावों के अनुसार, *शिकायतकर्ता लगभग दो वर्ष पहले अपने पति से अलग रहने लगी थी। आरोप है कि तलाक हुए बिना ही उसका एक अन्य युवक से संबंध बना और दोनों ने आपसी सहमति से अपने निजी एवं अंतरंग वीडियो और फोटो मोबाइल में रिकॉर्ड किए।*
इन्हीं दस्तावेजों के अनुसार बाद में शिकायतकर्ता नया मोबाइल खरीदकर स्वयं एक फोटो स्टूडियो पहुंची और पुराने मोबाइल का पूरा डेटा नए मोबाइल में ट्रांसफर कराया। इसके बाद निजी फोटो और वीडियो लीक होने का विवाद सामने आया।
अब इस पूरे घटनाक्रम पर कई सवाल उठ रहे हैं। यदि मोबाइल में संवेदनशील निजी सामग्री मौजूद थी, तो उसे किसी सार्वजनिक फोटो स्टूडियो पर बिना अलग किए डेटा ट्रांसफर के लिए क्यों दिया गया? यदि कथित वीडियो और फोटो अन्य लोगों तक भी पहुंच चुके थे, तो शिकायत में केवल एक व्यक्ति को ही क्यों नामजद किया गया? क्या अन्य संभावित व्यक्तियों की भूमिका छिपाई गई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी? इन सभी सवालों का जवाब जांच से ही सामने आ सकेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक, मोबाइल डेटा, व्हाट्सऐप रिकॉर्ड, आईपी लॉग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ही यह तय करेंगे कि निजी सामग्री किसने कॉपी की, किसने भेजी और किसने प्रसारित की।
मामले में यह मांग भी उठ रही है कि जांच केवल नामजद आरोपी तक सीमित न रखी जाए, बल्कि शिकायतकर्ता, उसके कथित साथी, निजी सामग्री तक पहुंच रखने वाले अन्य लोगों और पूरे डिजिटल ट्रेल की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक जिम्मेदार कौन है। @all