
68 घर पर प्रसव... जिम्मेदार कौन?
गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य प्रबंधन में लापरवाही पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई; जिला स्वास्थ्य अधिकारी से बीएमओ-बीपीएम तक वेतन कटेगा
मातृ मृत्यु के मामलों में निजी डॉक्टर और अस्पताल भी कार्रवाई के घेरे में, सोनोग्राफी के दिन ही ब्लड टेस्ट कराने के निर्देश
देवास। जिले में गर्भवती महिलाओं और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी व्यवस्था पर जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में गंभीर सवाल सामने आए हैं। 68 गैर-संस्थागत यानी घर पर प्रसव के प्रकरण, एनीमिक गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन में लापरवाही और मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा के बाद कलेक्टर ऋतु राज सिंह ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मॉडरेट एनीमिक गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन में लापरवाही पर बागली बीएमओ की एक वेतन वृद्धि रोकने संबंधी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। अलग-अलग बीपीएम और शहरी नोडल अधिकारी के वेतन काटने के निर्देश दिए गए। वहीं सीवियर एनीमिक गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन में लापरवाही पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी से लेकर निचले स्तर तक जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों का 7-7 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।
यह कार्रवाई केवल एक स्तर तक सीमित नहीं रही। बैठक में साफ संकेत दिया गया कि गर्भवती महिला की पहचान से लेकर जांच, उपचार, रेफरल और प्रसव तक की पूरी व्यवस्था में यदि कहीं चूक होती है तो जिम्मेदारी तय होगी।
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68 घर पर प्रसव ने खड़ा किया सबसे बड़ा सवाल
स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं के बावजूद जिले में 68 गैर-संस्थागत प्रसव के प्रकरण सामने आए। इनकी समीक्षा के बाद संबंधित आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
यहीं से स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—
जब गर्भवती महिलाओं की निगरानी के लिए आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य संस्थाओं का पूरा नेटवर्क मौजूद है, तो 68 प्रसव अस्पताल तक क्यों नहीं पहुंच सके?
क्या इन महिलाओं का समय पर एएनसी पंजीयन हुआ था?
क्या हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान हुई थी?
क्या प्रसव की संभावित तारीख से पहले परिवार को अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई थी?
क्या आशा और एएनएम ने समय पर फॉलोअप किया?
इन सवालों का जवाब अब केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रकरण की जिम्मेदारी तय करके तलाशने की जरूरत है।
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मातृ मृत्यु पर निजी अस्पताल भी घेरे में
बैठक में मातृ मृत्यु के प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने मृतक महिलाओं के परिजनों और स्वास्थ्य अमले से चर्चा कर संबंधित मामलों की जानकारी ली।
शिवनगर इटावा के एक मातृ मृत्यु प्रकरण में निजी चिकित्सक डॉ. राहुल व्यास के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा रामउदय अस्पताल, सीहोर तथा आशीर्वाद अस्पताल और मां पीतांबरा अस्पताल, उज्जैन के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने संबंधित मामलों में शासन स्तर पर पत्र भेजकर प्रकरण दर्ज कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा है।
सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, जवाबदेही का है
मातृ मृत्यु के बाद कार्रवाई के निर्देश महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उससे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्तर पर महिला को समय पर उपचार मिलना चाहिए था, वहां चूक आखिर हुई कहां?
क्या रेफरल में देरी हुई?
क्या मरीज की गंभीर स्थिति को समय पर पहचाना गया?
क्या उपचार के निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हुआ?
क्या निजी अस्पतालों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच रेफरल सिस्टम प्रभावी रहा?
इन सवालों के जवाब प्रत्येक मातृ मृत्यु प्रकरण की जांच से ही सामने आएंगे।
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सोनोग्राफी हुई तो उसी दिन होगा ब्लड टेस्ट
कलेक्टर ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि जिले के शासकीय और निजी संस्थानों में जहां गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी की जाती है, वहां उसी दिन ब्लड टेस्ट भी कराया जाए।
एनीमिया प्रबंधन में सामने आई लापरवाही के बीच यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान जांचों की समयबद्धता सीधे उपचार की प्रक्रिया से जुड़ी है।
सभी शासकीय और निजी संस्थानों को इसकी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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24 घंटे अस्पताल खुले, अनुपस्थित स्टाफ पर कार्रवाई
कलेक्टर ने जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी को पूरी तरह क्रियाशील रखने के निर्देश दिए।
निर्देश स्पष्ट हैं—
अस्पताल 24 घंटे सक्रिय रहें।
मरीजों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुविधाएं मिलें।
स्टाफ अनुपस्थित मिला तो कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य संस्थाओं की इमारतों का नियमानुसार उपयोग हो।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों की निगरानी किस स्तर पर और कितनी नियमितता से होती है।
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1 से 15 अक्टूबर तक घर-घर तलाशें जाएंगे गर्भवती महिलाएं
गर्भवती महिलाओं के एएनसी पंजीयन को बढ़ाने के लिए 1 से 15 अक्टूबर तक सघन अभियान चलेगा।
अभियान के तहत शहरी क्षेत्रों में घर-घर सर्वे कर गर्भवती महिलाओं की पहचान की जाएगी। देवास शहर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से सर्वे किया जाएगा और जानकारी गूगल शीट में दर्ज की जाएगी।
प्रशासन की योजना है कि यह अभियान प्रत्येक तीन माह में 15 दिन तक चलाया जाए।
यानी अब लक्ष्य सिर्फ पंजीयन नहीं, कोई गर्भवती महिला स्वास्थ्य तंत्र की नजर से बाहर न रहे—यह सुनिश्चित करना है।
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एनसीडी स्क्रीनिंग में भी लक्ष्य से पीछे
गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग की समीक्षा में सोनकच्छ को छोड़कर अन्य विकासखंडों की प्रगति लक्ष्य से कम पाई गई। संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
सीएचओ, आशा कार्यकर्ता और एएनएम के काम की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा आगामी छह माह की कार्ययोजना तैयार कर लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।
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15 दिन में पूरा करना होगा क्रिटिकल केयर अस्पताल
निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर अस्पताल के काम को लेकर भी कलेक्टर ने समयसीमा तय कर दी है।
निर्माण कार्य 15 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए सिविल सर्जन और संबंधित एजेंसी को संयुक्त रूप से निर्देशित किया गया।
स्वास्थ्य भवनों के निर्माण में गुणवत्ता और सामग्री की जांच तथा लंबित कार्यों के लिए इंजीनियर और ठेकेदार को नोटिस देने के निर्देश भी दिए गए।
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