
बद्रीपुर मंसूरपुर का करिश्माई हैंडपंप: पानी दे या न दे, पर बजट खींचने में माहिर!
सीतापुर:
विकासखंड खैराबाद की ग्राम पंचायत बद्रीपुर मंसूरपुर में आजकल एक अजीबोगरीब जल-क्रीड़ा चल रही। यहाँ हैंडपंप पानी कम और सरकारी खजाने से लाखों रुपये का फव्वारा ज्यादा उगल रहे! मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चा है कि शायद यहाँ के हैंडपंपों को सोने की प्यास लगती है, तभी तो उनकी मरम्मत और रिबोर पर 19 लाख रुपये का तगड़ा बजट गटक लिया गया।
जासूसी नहीं, सिर्फ पानी की तलाश है!
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश महासचिव प्रवीण कुमार सिंह ने खंड विकास अधिकारी को पत्र लिखकर इन चमत्कारी हैंडपंपों की खोजबीन शुरू कर दी। उनका कहना है कि कागजों में पिछले कुछ सालों से हैंडपंपों की मरम्मत का ऐसा दौर चला कि मानों वे रेगिस्तान में नहीं, बल्कि सीधे किसी तेल के कुएं पर लगे हों। 30 मार्च से लेकर दिसंबर और फिर अगले साल तक, बकायदा किस्तों में लाखों का भुगतान ऐसे हुआ जैसे डॉक्टर मरीज को टॉनिक दे रहा हो।
गायब कबाड़ और जिम वाले हैंडपंप?
शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर सच में इतने हैंडपंप सुधारे गए हैं, तो पुराने वाले लोहे और पार्ट्स का कबाड़ कहाँ गया? क्या उसे कबाड़िए को बेचकर पंचायत ने पार्टी की दावत उड़ाई या वह कबाड़ खुद उड़नछू हो गया?
दिक्कत यहीं खत्म नहीं होती। बात सिर्फ हैंडपंप तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, आरआरसी सेंटर, पुस्तकालय और जिम सेंटर तक जा पहुँची है। अब जनता यह सोचकर हैरान है कि क्या बद्रीपुर मंसूरपुर के हैंडपंप भी जिम में डोले-शोले बनाने जाते हैं, जिनका बिल इतना भारी-भरकम आया है?
जानकारों का मानना है कि यदि इस स्थलीय जांच की आँच सही दिशा में पड़ गई, तो कई कागजी विकास कार्यों को पसीना आ जाएगा। फिलहाल, अधिकारी जांच के मूड में हैं और जनता कतार में है—यह देखने के लिए कि इस बार हैंडपंप से पानी निकलेगा या सिर्फ फाइलें बाहर आएंगी!
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