
क्या उत्तर प्रदेश में किसानों का कर्ज माफ होना चाहिए?
यह सवाल सिर्फ कर्ज की रकम का नहीं, बल्कि उस किसान की जिंदगी का सवाल है जो मौसम की मार, बढ़ती लागत और फसल के सही दाम न मिलने के बीच खेती करने को मजबूर है।
किसान खेती शुरू करने के लिए कर्ज लेता है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई, मजदूरी और मशीनरी का खर्च बढ़ता जाता है। किसान मेहनत करके फसल तैयार करता है, लेकिन अगर मौसम खराब हो जाए या मंडी में भाव गिर जाए तो उसकी पूरी गणित बिगड़ जाती है। ऐसी स्थिति में किसान के सामने कर्ज चुकाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।
ऐसे किसानों के लिए कर्ज राहत या कर्जमाफी पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। खासकर छोटे और सीमांत किसान, जिनकी आमदनी खेती पर ही निर्भर है और जिनके पास नुकसान सहने की आर्थिक क्षमता बहुत कम है, उन्हें लक्षित राहत मिलनी चाहिए।
लेकिन क्या केवल कर्ज माफ कर देना स्थायी समाधान है?
शायद नहीं।
अगर किसान का कर्ज आज माफ कर दिया जाए और अगले सीजन में फिर वही किसान महंगे बीज, खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो जाए, तो समस्या फिर वहीं खड़ी हो जाएगी।
इसलिए सरकार को कर्जमाफी के साथ खेती की पूरी व्यवस्था पर काम करना होगा।
किसान को समय पर और निर्धारित कीमत पर खाद मिले। प्रमाणित बीज उचित कीमत पर मिले। फसल खराब होने पर बीमा का भुगतान समय पर मिले। किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले। मंडी और खरीद व्यवस्था पारदर्शी हो। सिंचाई की लागत कम हो और संस्थागत कृषि ऋण आसानी से उपलब्ध हो।
किसान को ऐसी खेती चाहिए जिससे वह कर्ज लेकर उसे चुका सके, न कि ऐसी व्यवस्था जिसमें हर कुछ साल बाद उसे कर्जमाफी की जरूरत पड़े।
साथ ही यह भी जरूरी है कि कर्जमाफी का लाभ वास्तव में जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे। बड़े बकायेदारों और वास्तविक रूप से संकट में फंसे छोटे किसानों के बीच अंतर किया जाना चाहिए। राहत की व्यवस्था पारदर्शी और किसान-केंद्रित होनी चाहिए।
आखिर सवाल यह है कि अगर उद्योगों और दूसरे क्षेत्रों के लिए सरकार अलग-अलग प्रकार की वित्तीय सहायता और राहत की व्यवस्था कर सकती है, तो देश का अन्न पैदा करने वाला किसान संकट में हो तो उसके लिए स्थायी समाधान क्यों नहीं बनाया जा सकता?
कर्जमाफी किसान की समस्या का अंतिम समाधान नहीं है, लेकिन गंभीर संकट में फंसे किसान के लिए यह राहत का जरूरी कदम हो सकता है। असली समाधान है-कम लागत, उचित दाम, आसान कृषि ऋण और मजबूत बाजार व्यवस्था।
अब सवाल आपसे है-क्या उत्तर प्रदेश में किसानों का कर्ज माफ होना चाहिए? या सरकार को कर्जमाफी के बजाय खेती की लागत घटाकर और फसल का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करके किसानों को कर्ज के चक्र से बाहर निकालना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
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