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मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं, किसानों, कृषि उद्यमियों और ग्रामीण बेरोजगारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। राज्य सरकार ने कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराने वाली कस्टम हायरिंग सेंटर यानी CHC स्थापित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 1,000 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने के बजाय जरूरत के अनुसार किराए पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना है, ताकि खेती की लागत कम हो और कृषि कार्य समय पर पूरा किया जा सके। कृषि यंत्रीकरण आज खेती की जरूरत बन चुका है। खेत की जुताई, बुवाई, रोपाई, निराई-गुड़ाई, फसल कटाई, अवशेष प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों के लिए आधुनिक मशीनों की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, रोटावेटर, मल्चर, रीपर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्र खरीदना हमेशा संभव नहीं होता। ऐसे में कस्टम हायरिंग सेंटर किसानों और कृषि उद्यमियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में इस बार 1,000 CHC स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इच्छुक पात्र व्यक्ति निर्धारित अवधि में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 7 अगस्त 2026 से शुरू होगी और 21 अगस्त 2026 तक चलेगी। इसलिए जो लोग इस योजना का लाभ उठाकर कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराने का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। आवेदन से पहले सभी पात्रता शर्तों, आवश्यक दस्तावेजों और बैंक ड्राफ्ट से संबंधित जानकारी को ध्यान से जांच लेना बेहतर रहेगा। इस योजना के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों को ₹10,000 का बैंक ड्राफ्ट जमा करना होगा। यानी केवल ऑनलाइन फॉर्म भरना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन राशि का बैंक ड्राफ्ट भी तैयार रखना होगा। बैंक ड्राफ्ट बनवाते समय उसके नाम, राशि और अन्य विवरण में किसी प्रकार की गलती न हो, इसका विशेष ध्यान रखें। गलत बैंक ड्राफ्ट या अधूरे दस्तावेज के कारण आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CHC की जिलावार प्राथमिकता कंप्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से निर्धारित की जाएगी। इसके लिए 22 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे कंप्यूटरीकृत लॉटरी की प्रक्रिया होगी। लॉटरी के बाद चयनित या प्राथमिकता सूची में आने वाले आवेदकों की जानकारी उसी दिन शाम 5 बजे से संबंधित पोर्टल पर देखी जा सकेगी। इसका मतलब यह है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति को केवल आवेदन करके निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। उसे निर्धारित तारीख पर पोर्टल पर अपनी स्थिति भी जांचनी होगी। लॉटरी में प्राथमिकता निर्धारित होने के बाद दस्तावेज और बैंक ड्राफ्ट जमा करने की प्रक्रिया 24 और 25 अगस्त 2026 को पूरी करनी होगी। इसलिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को अभी से अपने दस्तावेज व्यवस्थित कर लेने चाहिए। अंतिम समय पर दस्तावेज जुटाने में परेशानी हो सकती है और किसी महत्वपूर्ण कागज के अभाव में प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। इस योजना को केवल सरकारी अनुदान या मशीन लेने की योजना के रूप में नहीं देखना चाहिए। कस्टम हायरिंग सेंटर ग्रामीण क्षेत्र में एक कृषि सेवा व्यवसाय का अवसर भी बन सकता है। यदि किसी क्षेत्र में किसानों को समय पर कृषि मशीनें उपलब्ध नहीं होती हैं, तो वहां CHC के माध्यम से मशीनें किराए पर देकर किसानों को सुविधा दी जा सकती है। किसान अपनी जरूरत और खेती के क्षेत्रफल के अनुसार मशीन किराए पर ले सकते हैं और उन्हें हर मशीन खरीदने के लिए बड़ी पूंजी लगाने की जरूरत नहीं होगी। कस्टम हायरिंग सेंटर का सबसे बड़ा फायदा छोटे किसानों को मिल सकता है। उदाहरण के लिए किसी किसान के पास केवल कुछ एकड़ जमीन है और उसे साल में कुछ ही दिनों के लिए रोटावेटर, सीड ड्रिल, मल्चर या रीपर की आवश्यकता होती है। ऐसे किसान के लिए पूरी मशीन खरीदना आर्थिक रूप से उचित नहीं हो सकता। CHC से मशीन किराए पर लेकर वह कम लागत में अपना कृषि कार्य पूरा कर सकता है। दूसरी ओर CHC संचालक एक ही मशीन को अलग-अलग किसानों को किराए पर देकर उसका बेहतर उपयोग कर सकता है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। केवल मशीन खरीद लेना CHC को सफल नहीं बनाता। CHC की सफलता के लिए स्थानीय किसानों की वास्तविक जरूरत, मशीनों की मांग, फसल पैटर्न, क्षेत्रफल, मशीनों का रखरखाव, ऑपरेटर की उपलब्धता और किराए की उचित दर जैसे कई पहलुओं पर ध्यान देना होगा। जिस क्षेत्र में धान की खेती अधिक है, वहां धान से संबंधित मशीनों की मांग अधिक हो सकती है। गेहूं, सोयाबीन, चना, मक्का या अन्य फसलों वाले क्षेत्रों में मशीनों की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने क्षेत्र का कृषि सर्वेक्षण करना समझदारी होगी। आसपास के गांवों में किसानों से पता करें कि उन्हें किन कृषि यंत्रों की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। यह भी देखें कि पहले से कितने ट्रैक्टर और कृषि यंत्र उपलब्ध हैं तथा कौन-सी मशीनें किसानों को समय पर नहीं मिल पातीं। यदि किसी मशीन की मांग बहुत ज्यादा है और उपलब्धता कम है, तो CHC के लिए वह मशीन आर्थिक रूप से अधिक उपयोगी हो सकती है। किसानों के लिए भी यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता खेती में समय और श्रम दोनों बचा सकती है। सही समय पर बुवाई और कटाई होने से फसल प्रबंधन बेहतर हो सकता है। फसल अवशेष प्रबंधन जैसी गतिविधियों में भी मशीनों की भूमिका बढ़ रही है। खासकर ऐसे समय में जब ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि मजदूरों की उपलब्धता और मजदूरी दोनों कई जगह चुनौती बन रहे हैं, कृषि यंत्रीकरण किसानों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनता जा रहा है। हालांकि किसानों को मशीन किराए पर लेते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। मशीन की स्थिति, किराया, ईंधन का खर्च, ऑपरेटर का शुल्क, मशीन उपलब्ध होने का समय और किसी नुकसान की जिम्मेदारी पहले से स्पष्ट कर लेनी चाहिए। केवल कम किराया देखकर मशीन बुक करना उचित नहीं है। खराब या अनुपयुक्त मशीन से समय और पैसा दोनों का नुकसान हो सकता है। जो लोग CHC खोलने के लिए आवेदन करने जा रहे हैं, उन्हें आवेदन की पूरी प्रक्रिया आधिकारिक पोर्टल और संबंधित कृषि विभाग के निर्देशों के अनुसार ही पूरी करनी चाहिए। आवेदन के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंट को पैसे देने से बचें। ₹10,000 की निर्धारित बैंक ड्राफ्ट राशि और अन्य दस्तावेजों के संबंध में केवल आधिकारिक सूचना को आधार बनाएं। सोशल मीडिया पर चल रही अधूरी या पुरानी जानकारी पर भरोसा करने के बजाय विभागीय निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी है। ऑनलाइन आवेदन के लिए निर्धारित पोर्टल उपलब्ध कराया गया है: CHC मध्य प्रदेश आवेदन पोर्टल - http://www.chc.mpdag.org आवेदन की महत्वपूर्ण तारीखों को एक बार फिर ध्यान में रखें। ऑनलाइन आवेदन 7 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक किए जा सकेंगे। जिलावार प्राथमिकता निर्धारित करने के लिए कंप्यूटरीकृत लॉटरी 22 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे होगी। लॉटरी के बाद सूची 22 अगस्त को शाम 5 बजे से पोर्टल पर देखी जा सकेगी। इसके बाद दस्तावेज और ₹10,000 के बैंक ड्राफ्ट जमा करने की प्रक्रिया 24 और 25 अगस्त 2026 को पूरी करनी होगी। किसी भी इच्छुक आवेदक को अंतिम तारीख 21 अगस्त का इंतजार नहीं करना चाहिए। पहले अपनी पात्रता जांचें, जरूरी दस्तावेज तैयार करें, बैंक ड्राफ्ट समय से बनवाएं और ऑनलाइन आवेदन सावधानीपूर्वक पूरा करें। आवेदन भरते समय मोबाइल नंबर, बैंक संबंधी जानकारी, पता और अन्य विवरण सही दर्ज करें। आवेदन जमा करने के बाद उसकी रसीद या आवेदन संख्या सुरक्षित रखें, क्योंकि आगे की प्रक्रिया में इसकी आवश्यकता पड़ सकती है। यह योजना उन लोगों के लिए विशेष अवसर हो सकती है जो कृषि क्षेत्र में रोजगार या व्यवसाय का नया मॉडल विकसित करना चाहते हैं। लेकिन CHC को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी योजना पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। मशीनों का सही चयन, समय पर सर्विस, प्रशिक्षित ऑपरेटर, किसानों तक आसान पहुंच और पारदर्शी किराया व्यवस्था ही इसे लंबे समय तक टिकाऊ बना सकती है। किसानों के नजरिए से भी यह पहल तभी सफल मानी जाएगी जब CHC वास्तव में गांवों के नजदीक आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराएं और किसान उचित किराए पर समय पर मशीन प्राप्त कर सकें। यदि मशीनें कागजों पर उपलब्ध रहें लेकिन फसल के महत्वपूर्ण समय पर किसान को मशीन न मिले, तो योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए निगरानी, मशीनों की वास्तविक उपलब्धता और किसानों की सुविधा पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश में 1,000 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य निश्चित रूप से बड़ा अवसर है। जरूरत इस बात की है कि इच्छुक लोग इसे केवल आवेदन और लॉटरी तक सीमित न रखें, बल्कि अपने क्षेत्र की कृषि जरूरतों को समझकर व्यावहारिक और टिकाऊ कृषि सेवा केंद्र के रूप में विकसित करें। वहीं किसानों को भी आधुनिक मशीनों की सुविधा गांव के स्तर पर मिले, ताकि खेती का समय, श्रम और लागत कम हो सके। अगर आप मध्य प्रदेश में CHC खोलने की योजना बना रहे हैं, तो 7 से 21 अगस्त 2026 की आवेदन अवधि, ₹10,000 के बैंक ड्राफ्ट, 22 अगस्त की दोपहर 12 बजे होने वाली कंप्यूटरीकृत लॉटरी और 24-25 अगस्त को दस्तावेज जमा करने की तारीख को जरूर याद रखें। जानकारी की पुष्टि आधिकारिक पोर्टल और संबंधित कृषि विभाग से करें और किसी भी बिचौलिए के झांसे में न आएं। #मध्यप्रदेशकृषि #CustomHiringCentre #कृषियंत्रीकरण #किसानयोजना

Mariahu, Jaunpur | Aug 11, 2026

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Delegate डालने से पहले ये जानकारी जरूर जान लें #Delegate #DelegateInsecticide #Spinetoram #Spinetoram117SC

Delegate डालने से पहले ये जानकारी जरूर जान लें #Delegate #DelegateInsecticide #Spinetoram #Spinetoram117SC

Mariahu, Jaunpur | Aug 11, 2026

🌳 खेत की मेड़ खाली क्यों छोड़ें? इसे भविष्य की अतिरिक्त आय का साधन बनाइए! 💰
अगर आपके पास 2–3 एकड़ जमीन है और आप हर साल गेहूं, धान या सब्जियां उगाते हैं, तो खेत की मेड़ यानी Boundary को आपने कितनी बार income source की तरह देखा है?
अधिकतर किसान मेड़ को खाली छोड़ देते हैं। लेकिन सही planning के साथ इसी जगह पर African Mahogany और Malabar Neem जैसे commercial timber trees लगाए जा सकते हैं।
🌱 Boundary Agroforestry के फायदे:
✅ मुख्य फसल का क्षेत्र बचाते हुए अतिरिक्त पेड़
✅ लंबे समय के लिए Timber Asset तैयार
✅ खेत की खाली मेड़ का बेहतर उपयोग
✅ भविष्य में लकड़ी से अतिरिक्त आय की संभावना
✅ सही pruning और spacing से crop पर अनावश्यक छाया को कम किया जा सकता है
लेकिन ध्यान रखें—पेड़ लगाना सिर्फ पौधा लगाने का काम नहीं है। सही species, spacing, direction, pruning, irrigation और स्थानीय बाजार की जानकारी बेहद जरूरी है।
और सबसे महत्वपूर्ण बात: सोशल मीडिया पर महोगनी से करोड़ों की कमाई के जो दावे किए जाते हैं, उन्हें गारंटी न समझें। वास्तविक कमाई पेड़ की उम्र, तने के आकार, लकड़ी की गुणवत्ता, स्थानीय बाजार भाव, कटाई और परिवहन लागत पर निर्भर करती है।
⚠️ पेड़ लगाने से पहले अपने राज्य में कटाई, परिवहन और बिक्री से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लें और पौधे विश्वसनीय नर्सरी से ही खरीदें।
🌾 आप अपने खेत की मेड़ पर कौन-सा पेड़ लगाना पसंद करेंगे—महोगनी या मालाबार नीम?
कमेंट में जरूर बताइए। 👇
#MahoganyFarming #MalabarNeem #Agroforestry #BoundaryPlantation #TimberFarming #महोगनी #मालाबारनीम #एग्रोफॉरेस्ट्री #खेती #किसान #IndianFarming #Agriculture #TreeFarming

🌳 खेत की मेड़ खाली क्यों छोड़ें? इसे भविष्य की अतिरिक्त आय का साधन बनाइए! 💰 अगर आपके पास 2–3 एकड़ जमीन है और आप हर साल गेहूं, धान या सब्जियां उगाते हैं, तो खेत की मेड़ यानी Boundary को आपने कितनी बार income source की तरह देखा है? अधिकतर किसान मेड़ को खाली छोड़ देते हैं। लेकिन सही planning के साथ इसी जगह पर African Mahogany और Malabar Neem जैसे commercial timber trees लगाए जा सकते हैं। 🌱 Boundary Agroforestry के फायदे: ✅ मुख्य फसल का क्षेत्र बचाते हुए अतिरिक्त पेड़ ✅ लंबे समय के लिए Timber Asset तैयार ✅ खेत की खाली मेड़ का बेहतर उपयोग ✅ भविष्य में लकड़ी से अतिरिक्त आय की संभावना ✅ सही pruning और spacing से crop पर अनावश्यक छाया को कम किया जा सकता है लेकिन ध्यान रखें—पेड़ लगाना सिर्फ पौधा लगाने का काम नहीं है। सही species, spacing, direction, pruning, irrigation और स्थानीय बाजार की जानकारी बेहद जरूरी है। और सबसे महत्वपूर्ण बात: सोशल मीडिया पर महोगनी से करोड़ों की कमाई के जो दावे किए जाते हैं, उन्हें गारंटी न समझें। वास्तविक कमाई पेड़ की उम्र, तने के आकार, लकड़ी की गुणवत्ता, स्थानीय बाजार भाव, कटाई और परिवहन लागत पर निर्भर करती है। ⚠️ पेड़ लगाने से पहले अपने राज्य में कटाई, परिवहन और बिक्री से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लें और पौधे विश्वसनीय नर्सरी से ही खरीदें। 🌾 आप अपने खेत की मेड़ पर कौन-सा पेड़ लगाना पसंद करेंगे—महोगनी या मालाबार नीम? कमेंट में जरूर बताइए। 👇 #MahoganyFarming #MalabarNeem #Agroforestry #BoundaryPlantation #TimberFarming #महोगनी #मालाबारनीम #एग्रोफॉरेस्ट्री #खेती #किसान #IndianFarming #Agriculture #TreeFarming

Mariahu, Jaunpur | Aug 11, 2026

आम के पेड़ में खाद कब और कितनी डालें? तुड़ाई के बाद पूरी देखभाल #आमकीखेती #आमकीफसल #आमकाबाग #आमकीतुड़ाई #MangoFarming

आम के पेड़ में खाद कब और कितनी डालें? तुड़ाई के बाद पूरी देखभाल #आमकीखेती #आमकीफसल #आमकाबाग #आमकीतुड़ाई #MangoFarming

Mariahu, Jaunpur | Aug 10, 2026

मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं, किसानों, कृषि उद्यमियों और ग्रामीण बेरोजगारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। राज्य सरकार ने कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराने वाली कस्टम हायरिंग सेंटर यानी CHC स्थापित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 1,000 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने के बजाय जरूरत के अनुसार किराए पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना है, ताकि खेती की लागत कम हो और कृषि कार्य समय पर पूरा किया जा सके। कृषि यंत्रीकरण आज खेती की जरूरत बन चुका है। खेत की जुताई, बुवाई, रोपाई, निराई-गुड़ाई, फसल कटाई, अवशेष प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों के लिए आधुनिक मशीनों की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, रोटावेटर, मल्चर, रीपर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्र खरीदना हमेशा संभव नहीं होता। ऐसे में कस्टम हायरिंग सेंटर किसानों और कृषि उद्यमियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में इस बार 1,000 CHC स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इच्छुक पात्र व्यक्ति निर्धारित अवधि में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 7 अगस्त 2026 से शुरू होगी और 21 अगस्त 2026 तक चलेगी। इसलिए जो लोग इस योजना का लाभ उठाकर कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराने का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। आवेदन से पहले सभी पात्रता शर्तों, आवश्यक दस्तावेजों और बैंक ड्राफ्ट से संबंधित जानकारी को ध्यान से जांच लेना बेहतर रहेगा। इस योजना के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों को ₹10,000 का बैंक ड्राफ्ट जमा करना होगा। यानी केवल ऑनलाइन फॉर्म भरना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन राशि का बैंक ड्राफ्ट भी तैयार रखना होगा। बैंक ड्राफ्ट बनवाते समय उसके नाम, राशि और अन्य विवरण में किसी प्रकार की गलती न हो, इसका विशेष ध्यान रखें। गलत बैंक ड्राफ्ट या अधूरे दस्तावेज के कारण आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CHC की जिलावार प्राथमिकता कंप्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से निर्धारित की जाएगी। इसके लिए 22 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे कंप्यूटरीकृत लॉटरी की प्रक्रिया होगी। लॉटरी के बाद चयनित या प्राथमिकता सूची में आने वाले आवेदकों की जानकारी उसी दिन शाम 5 बजे से संबंधित पोर्टल पर देखी जा सकेगी। इसका मतलब यह है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति को केवल आवेदन करके निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। उसे निर्धारित तारीख पर पोर्टल पर अपनी स्थिति भी जांचनी होगी। लॉटरी में प्राथमिकता निर्धारित होने के बाद दस्तावेज और बैंक ड्राफ्ट जमा करने की प्रक्रिया 24 और 25 अगस्त 2026 को पूरी करनी होगी। इसलिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को अभी से अपने दस्तावेज व्यवस्थित कर लेने चाहिए। अंतिम समय पर दस्तावेज जुटाने में परेशानी हो सकती है और किसी महत्वपूर्ण कागज के अभाव में प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। इस योजना को केवल सरकारी अनुदान या मशीन लेने की योजना के रूप में नहीं देखना चाहिए। कस्टम हायरिंग सेंटर ग्रामीण क्षेत्र में एक कृषि सेवा व्यवसाय का अवसर भी बन सकता है। यदि किसी क्षेत्र में किसानों को समय पर कृषि मशीनें उपलब्ध नहीं होती हैं, तो वहां CHC के माध्यम से मशीनें किराए पर देकर किसानों को सुविधा दी जा सकती है। किसान अपनी जरूरत और खेती के क्षेत्रफल के अनुसार मशीन किराए पर ले सकते हैं और उन्हें हर मशीन खरीदने के लिए बड़ी पूंजी लगाने की जरूरत नहीं होगी। कस्टम हायरिंग सेंटर का सबसे बड़ा फायदा छोटे किसानों को मिल सकता है। उदाहरण के लिए किसी किसान के पास केवल कुछ एकड़ जमीन है और उसे साल में कुछ ही दिनों के लिए रोटावेटर, सीड ड्रिल, मल्चर या रीपर की आवश्यकता होती है। ऐसे किसान के लिए पूरी मशीन खरीदना आर्थिक रूप से उचित नहीं हो सकता। CHC से मशीन किराए पर लेकर वह कम लागत में अपना कृषि कार्य पूरा कर सकता है। दूसरी ओर CHC संचालक एक ही मशीन को अलग-अलग किसानों को किराए पर देकर उसका बेहतर उपयोग कर सकता है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। केवल मशीन खरीद लेना CHC को सफल नहीं बनाता। CHC की सफलता के लिए स्थानीय किसानों की वास्तविक जरूरत, मशीनों की मांग, फसल पैटर्न, क्षेत्रफल, मशीनों का रखरखाव, ऑपरेटर की उपलब्धता और किराए की उचित दर जैसे कई पहलुओं पर ध्यान देना होगा। जिस क्षेत्र में धान की खेती अधिक है, वहां धान से संबंधित मशीनों की मांग अधिक हो सकती है। गेहूं, सोयाबीन, चना, मक्का या अन्य फसलों वाले क्षेत्रों में मशीनों की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने क्षेत्र का कृषि सर्वेक्षण करना समझदारी होगी। आसपास के गांवों में किसानों से पता करें कि उन्हें किन कृषि यंत्रों की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। यह भी देखें कि पहले से कितने ट्रैक्टर और कृषि यंत्र उपलब्ध हैं तथा कौन-सी मशीनें किसानों को समय पर नहीं मिल पातीं। यदि किसी मशीन की मांग बहुत ज्यादा है और उपलब्धता कम है, तो CHC के लिए वह मशीन आर्थिक रूप से अधिक उपयोगी हो सकती है। किसानों के लिए भी यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता खेती में समय और श्रम दोनों बचा सकती है। सही समय पर बुवाई और कटाई होने से फसल प्रबंधन बेहतर हो सकता है। फसल अवशेष प्रबंधन जैसी गतिविधियों में भी मशीनों की भूमिका बढ़ रही है। खासकर ऐसे समय में जब ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि मजदूरों की उपलब्धता और मजदूरी दोनों कई जगह चुनौती बन रहे हैं, कृषि यंत्रीकरण किसानों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनता जा रहा है। हालांकि किसानों को मशीन किराए पर लेते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। मशीन की स्थिति, किराया, ईंधन का खर्च, ऑपरेटर का शुल्क, मशीन उपलब्ध होने का समय और किसी नुकसान की जिम्मेदारी पहले से स्पष्ट कर लेनी चाहिए। केवल कम किराया देखकर मशीन बुक करना उचित नहीं है। खराब या अनुपयुक्त मशीन से समय और पैसा दोनों का नुकसान हो सकता है। जो लोग CHC खोलने के लिए आवेदन करने जा रहे हैं, उन्हें आवेदन की पूरी प्रक्रिया आधिकारिक पोर्टल और संबंधित कृषि विभाग के निर्देशों के अनुसार ही पूरी करनी चाहिए। आवेदन के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंट को पैसे देने से बचें। ₹10,000 की निर्धारित बैंक ड्राफ्ट राशि और अन्य दस्तावेजों के संबंध में केवल आधिकारिक सूचना को आधार बनाएं। सोशल मीडिया पर चल रही अधूरी या पुरानी जानकारी पर भरोसा करने के बजाय विभागीय निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी है। ऑनलाइन आवेदन के लिए निर्धारित पोर्टल उपलब्ध कराया गया है: CHC मध्य प्रदेश आवेदन पोर्टल - http://www.chc.mpdag.org आवेदन की महत्वपूर्ण तारीखों को एक बार फिर ध्यान में रखें। ऑनलाइन आवेदन 7 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक किए जा सकेंगे। जिलावार प्राथमिकता निर्धारित करने के लिए कंप्यूटरीकृत लॉटरी 22 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे होगी। लॉटरी के बाद सूची 22 अगस्त को शाम 5 बजे से पोर्टल पर देखी जा सकेगी। इसके बाद दस्तावेज और ₹10,000 के बैंक ड्राफ्ट जमा करने की प्रक्रिया 24 और 25 अगस्त 2026 को पूरी करनी होगी। किसी भी इच्छुक आवेदक को अंतिम तारीख 21 अगस्त का इंतजार नहीं करना चाहिए। पहले अपनी पात्रता जांचें, जरूरी दस्तावेज तैयार करें, बैंक ड्राफ्ट समय से बनवाएं और ऑनलाइन आवेदन सावधानीपूर्वक पूरा करें। आवेदन भरते समय मोबाइल नंबर, बैंक संबंधी जानकारी, पता और अन्य विवरण सही दर्ज करें। आवेदन जमा करने के बाद उसकी रसीद या आवेदन संख्या सुरक्षित रखें, क्योंकि आगे की प्रक्रिया में इसकी आवश्यकता पड़ सकती है। यह योजना उन लोगों के लिए विशेष अवसर हो सकती है जो कृषि क्षेत्र में रोजगार या व्यवसाय का नया मॉडल विकसित करना चाहते हैं। लेकिन CHC को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी योजना पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। मशीनों का सही चयन, समय पर सर्विस, प्रशिक्षित ऑपरेटर, किसानों तक आसान पहुंच और पारदर्शी किराया व्यवस्था ही इसे लंबे समय तक टिकाऊ बना सकती है। किसानों के नजरिए से भी यह पहल तभी सफल मानी जाएगी जब CHC वास्तव में गांवों के नजदीक आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराएं और किसान उचित किराए पर समय पर मशीन प्राप्त कर सकें। यदि मशीनें कागजों पर उपलब्ध रहें लेकिन फसल के महत्वपूर्ण समय पर किसान को मशीन न मिले, तो योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए निगरानी, मशीनों की वास्तविक उपलब्धता और किसानों की सुविधा पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश में 1,000 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य निश्चित रूप से बड़ा अवसर है। जरूरत इस बात की है कि इच्छुक लोग इसे केवल आवेदन और लॉटरी तक सीमित न रखें, बल्कि अपने क्षेत्र की कृषि जरूरतों को समझकर व्यावहारिक और टिकाऊ कृषि सेवा केंद्र के रूप में विकसित करें। वहीं किसानों को भी आधुनिक मशीनों की सुविधा गांव के स्तर पर मिले, ताकि खेती का समय, श्रम और लागत कम हो सके। अगर आप मध्य प्रदेश में CHC खोलने की योजना बना रहे हैं, तो 7 से 21 अगस्त 2026 की आवेदन अवधि, ₹10,000 के बैंक ड्राफ्ट, 22 अगस्त की दोपहर 12 बजे होने वाली कंप्यूटरीकृत लॉटरी और 24-25 अगस्त को दस्तावेज जमा करने की तारीख को जरूर याद रखें। जानकारी की पुष्टि आधिकारिक पोर्टल और संबंधित कृषि विभाग से करें और किसी भी बिचौलिए के झांसे में न आएं। #मध्यप्रदेशकृषि #CustomHiringCentre #कृषियंत्रीकरण 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