
बीजेपी सरकार की एक बात का समर्थन करना पड़ेगा—ग्रुप C और D की भर्तियों में गरीब घर के बच्चों को बिना पैसे और बिना किसी नेता-दलाल के नौकरी मिलने का भरोसा बढ़ा है।
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है।
क्या यही पारदर्शिता A और B ग्रेड की नौकरियों में भी दिखाई देती है?
प्रदेश के लाखों बच्चे सालों तक पढ़ते हैं, कोचिंग सेंटरों में पैसा लगाते हैं, दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन जब बात बड़े पदों और उच्च ग्रेड की सरकारी नौकरियों की आती है, तो आज भी यह सवाल उठता है कि हरियाणा के युवाओं की हिस्सेदारी कितनी है और दूसरे राज्यों से आने वाले उम्मीदवारों की कितनी?
अगर सरकार सच में हरियाणा के युवाओं के हित में है तो A, B, C और D—हर ग्रेड की भर्ती का पूरा डेटा सार्वजनिक करे।
कितने पदों पर हरियाणा के युवाओं का चयन हुआ?
कितने चयनित उम्मीदवार दूसरे राज्यों से हैं?
किस भर्ती में कितने स्थानीय उम्मीदवारों को मौका मिला?
आंकड़े सामने रखिए—बहस अपने आप खत्म हो जाएगी।
क्योंकि सिर्फ चतुर्थ श्रेणी और ग्रुप C की नौकरियों में पारदर्शिता दिखाकर यह दावा नहीं किया जा सकता कि पूरी भर्ती व्यवस्था पारदर्शी है।
और एक बात साफ है—
पहले के समय में नौकरी के लिए गरीब परिवारों के बच्चों को दलालों, नेताओं और गांव के चौधरियों के दरवाजे पर माथा टेकने की मजबूरी बताई जाती थी। अगर आज किसी गरीब घर का बच्चा बिना पैसे और सिफारिश के अपनी मेहनत से नौकरी पा रहा है, तो वह सरकार की तारीफ करेगा ही। उसे कोई रोक नहीं सकता।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि सरकार की हर कमी पर चुप हो जाएं।
जहाँ नीति सही होगी, खुलकर समर्थन करेंगे।
जहाँ कमी होगी, खुलकर सवाल करेंगे।
जहाँ भर्ती में गड़बड़ी का सवाल होगा, वहाँ सरकार से जवाब मांगेंगे।
बीजेपी सरकार की कमियां बहुत हैं, भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल भी उठे हैं। लेकिन अगर कोई नीति गरीब के बच्चे को बिना पैसा दिए नौकरी तक पहुंचाती है, तो उसका समर्थन करना भी जरूरी है।
Ballah, Karnal | Aug 9, 2026