Public App Logo
Jansamasya
News
पुलिस
Bjp
National
Police
Bihar
India
कांग्रेस
बीजेपी
Gujarat
मुख्यमंत्री
Congress
Modi
Delhi
Viral
मारपीट
Crime
Dm
Up
अमित_शाह
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
उत्तरप्रदेश
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
कानपुर

#प्रयागराज कचहरी: बुज़ुर्ग आरोपियों की पेशियों का दृश्य—न्याय प्रक्रिया बनी कारण #प्रयागराज, 12 जून 2026 — जिले की जिला कचहरी परिसर में हाल में कुछ ऐसे दृश्य देखने को मिले जिनमें वरिष्ठ आयु के कई आरोपियों को सहारा देकर तथा पुलिस और सहायक कर्मचारियों की मदद से कोर्ट में पेश किया गया। संबंधित सूत्रों ने बताया कि ये सभी व्यक्ति अलग‑अलग पुराने आपराधिक मामलों में आरोपी रहे हैं और उनकी नियमित पेशी लंबित मामलों के सिलसिले में जारी रखी जाती है। #कचहरी में उपस्थित लोगों के अनुसार इन बुजुर्गों की शारीरिक स्थिति व उम्र के कारण चलने में कठिनाई होती है, इसलिए उन्हें हल्का समर्थन देकर या व्हीलचेयर/सहायता से अदालत परिसर तक लाया गया। पुलिस व कोर्ट स्टाफ ने सुनिश्चित किया कि उन्हें कोर्ट तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जाए और पेशी के दौरान आवश्यक सहायता मिले। #न्यायिक प्रक्रिया और उम्र का मसला कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आरोपी की उम्र स्वाभाविक रूप से किसी भी तरह की छूट का आधार नहीं बनती जब तक अदालत से कोई राहत या आदेश न मिल जाए। इसलिए पुराने मामलों में भी, जब तक मामले का निपटारा न हो, आरोपी की नियमित पेशी आवश्यक मानी जाती है। #पत्रकारों और वकीलों ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता तथा संबंधित न्यायिक निर्देशों के अनुसार अदालतें स्वास्थ्य व उम्र को ध्यान में रखकर सुविधाएँ प्रदान कर सकती हैं, परंतु पेशी की अनिवार्यता तब तक बरकरार रहती है जब तक न्यायालय कोई विशेष आदेश नहीं देता। #लंबी चली न्याय प्रक्रिया की तस्वीर इस घटना ने न्याय व्यवस्था के उस पहलू को उजागर किया है जहाँ जांच और मुकदमों की सुनवाई वर्षों तक चलने के कारण आरोपी—यहाँ तक कि उम्रदराज व्यक्ति—भी पेशियों की प्रक्रिया का हिस्सा बने रहते हैं। कई मामलों में सबूत जुटाने, गवाहों की अनुपस्थिति, अपील‑अपराधिक कानूनी प्रक्रियाओं व ट्रायल की देरी से मुकदमों का समय लम्बा खिंचता है, जिससे ऐसे परिदृश्यों का सामना करना पड़ता है। स्थानिक प्रतिक्रिया #कचहरी परिसर में मौजूद कुछ नागरिकों ने इस दृश्य पर दुःख व्यक्त किया और कहा कि न्यायिक सुनवाई में देरी सामाजिक व मानवीय दृष्टि से चिंतनीय है। वहीं कानून के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता और नियमों का पालन प्राथमिकता है, तथा यदि कोई आरोपी स्वास्थ्य कारणों से पेशी में असमर्थ हो तो उसके लिए कानूनी व्यवस्था के तहत कदम उठाए जाते हैं—जैसे मेडिकल जमानत, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थिति या विशेष कोर्ट‑निर्देश। निष्कर्ष #यह दृश्य भावनात्मक रूप से द्रवित करने वाला तो है, पर कानूनी रूप से इसे न्याय प्रक्रिया के जारी हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। अंतिम निर्णय और किसी भी प्रकार की राहत का अधिकार केवल अदालत के पास है, और वह ही तय करेगी कि किन मामलों में उम्र या स्वास्थ्य के आधार पर अलग प्रावधान किए जाएँ। #explorepage #fesbookreelsvairal #योगी #घटनास्थल #प्रयागराज

Allahabad, Allahabad | Jun 12, 2026

MORE NEWS