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‘शब्द-मंजरी’ में साहित्यिक विभूतियों ने बिखेरी हिंदी की खुशबू
भावांजलि के साहित्यिक आयोजन में कवियों और शायरों ने प्रस्तुत कीं रचनाएं, हिंदी की संवेदना और सामर्थ्य को दिया स्वर
अंबाला, 26 सितंबर। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कला एवं साहित्यिक मंच ‘भावांजलि’ की ओर से हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत अंबाला क्लब के नीलगिरि हॉल में ‘शब्द-मंजरी’ नाम से भव्य साहित्यिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साथ स्थानीय कवियों एवं शायरों ने दोहा, मुक्तक, क्षणिका, माहिया, गीत, ग़ज़ल और मुक्तछंद कविता सहित विभिन्न विधाओं में रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भावांजलि की संस्थापक एवं साहित्यकार अंजलि ‘सिफ़र’ के प्रभावशाली मंच संचालन से हुआ। उन्होंने अपनी पंक्तियों “हिंदी को सम्मान दें और करें उत्थान, जोड़े हिंदुस्तान को, भाषा यही महान” के माध्यम से हिंदी के सम्मान और उत्थान का संदेश दिया।
लगभग सात वर्षों से अंबाला में साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर गति दे रहीं अंजलि ‘सिफ़र’ विशेष रूप से महिला रचनाकारों को मंच और अभिव्यक्ति का अवसर उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली से आए प्रख्यात कवि, पूर्व उपमहानिदेशक आकाशवाणी एवं मीडिया विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने की। प्रसिद्ध कवयित्री एवं ग़ज़लकार तथा राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान से सम्मानित ममता किरण मुख्य अतिथि रहीं। वरिष्ठ कवि राजेंद्र निगम ‘राज’, प्रसिद्ध कवयित्री इंदु राज निगम तथा भावांजलि के संरक्षक ओम बनमाली विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि ममता किरण ने अपनी काव्य एवं ग़ज़ल प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर किया। उनकी पंक्तियां “बाग जैसे गूंजता है पंछियों से, घर मेरा महकता है बेटियों से” ने बेटियों के प्रति स्नेह और संवेदना को अभिव्यक्त किया। वहीं उनकी ग़ज़ल की पंक्तियों ने सामाजिक यथार्थ की ओर ध्यान आकर्षित किया।
इंदु राज निगम ने हिंदी को नमन करते हुए कहा— “माथे पर जैसे बिंदी, जैसे शिव का नंदी, ऐसी हमारी हिंदी।”
वरिष्ठ कवि राजेंद्र निगम ‘राज’ ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति में कहा— “राम, अहिल्या का उद्धार तुमने किया, छोटे-मोटे पत्थर जैसे हम भी हैं।”
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने कविता की सामाजिक भूमिका पर विचार रखते हुए कहा कि कविता समाज के मौन को आवाज देने का माध्यम है। उन्होंने अपनी चर्चित पंक्तियों के माध्यम से कविता की शक्ति को रेखांकित किया। डॉ. वाजपेयी विश्व कविता महोत्सव के लिए वेनेजुएला में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
कार्यक्रम में 88 वर्षीय हंसराज माही ने कैसियो पर मधुर धुनें प्रस्तुत कर वातावरण को संगीतमय बना दिया। उन्होंने “तुमको देखा तो यह ख्याल आया, जिंदगी धूप तुम घना साया” की धुन प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
भावांजलि के संरक्षक ओम बनमाली ने कहा कि उनका मंच नए रचनाकारों को लेखन के लिए तथा कवियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। हिंदी भाषा मंच के संस्थापक डॉ. जयप्रकाश गुप्त ने भी हिंदी को उचित स्थान दिए जाने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
‘शब्द-मंजरी’ में अंबाला के अनेक रचनाकारों ने भी अपनी रचनाओं से साहित्यिक रंग बिखेरे। सवीना सवी, गौरी वंदना, मनीषा नारायण, लाभ सिंह, सुमन जैन लूथरा, माधुरी शर्मा ‘मधुर’, हंसराज माही, जगमाल, केवल कृष्ण, अर्चित शर्मा, कर्नल तेजपाल गुलेरिया, एस.पी. भाटिया और ममता शर्मा सहित अनेक कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
इस अवसर पर प्रसिद्ध राजनीतिक एवं सामाजिक हस्ती राज्य सूचना आयुक्त श्रीमती नीता खेड़ा की विशेष उपस्थिति रही। इसके अलावा रचना बनमाली, मीरा कपूर, सतीश चंद्र पराशर, प्रभाष पराशर, रेडियो वितस्ता से भरत सपोरी, एडवोकेट तेजिंदर जग्गी, समाजसेवी सुनीला विग और कृष्ण लाल सहित अनेक साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान सभी विशिष्ट अतिथियों का पुष्पमालाओं से अभिनंदन किया गया। साहित्यिक विभूतियों ने अंजलि ‘सिफ़र’ के साहित्यिक योगदान और अंबाला में साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर मंच देने के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में यह भाव प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि अंबाला कविता और शायरी के साहित्यिक मानचित्र पर अपनी पहचान बना रहा है और ‘भावांजलि’ जैसे मंच साहित्यिक चेतना को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
‘शब्द-मंजरी’ केवल एक काव्य आयोजन नहीं, बल्कि हिंदी के प्रति सम्मान, साहित्यकारों के प्रति आदर और अंबाला की उभरती साहित्यिक चेतना का उत्सव बनकर सामने आया।
Ambala, Ambala | Sep 27, 2026