भाई अब बैठकर हिसाब लगा रहा है हमें आलू की सब्जी-पूरी, थोड़े पैसे और दो घूंट देकर लगा कि बड़ा फायदा हो गया। उधर, हमें बांटने वाले को 20 लाख का चंदा मिला और खबर है कि बड़े दानदाता की अगले पांच साल तक और बड़ी वसूली की तैयारी है।
अब हिसाब लगाइए—हमने क्या पाया और बदले में क्या सौंप दिया? पेट कुछ देर भरा, जेब थोड़ी देर खनकी, मगर सौदा शायद बहुत लंबा हो गया। यानी हमें चंद टुकड़े दिखाकर पूरी थाली किसी और के नाम कर दी गई।
कमाल यह है कि हर बार कहानी वही रहती है—लालच के दो निवाले दिखाओ, भीड़ को खुश करो और असली हिसाब पर्दे के पीछे निपटा लो।
इतिहास गवाह है: जब लोग अपने हिस्से की कीमत नहीं समझते, तब समझदार लोग उनकी भावनाओं पर कारोबार करते हैं। और फिर हम बैठकर कहते हैं—“अरे, फिर से तो उल्लू बन गए!”
Alwar, Alwar | Oct 2, 2026