
सरकारी विभागों का कमाल — राशन गायब, पर ज़िम्मेदारी किसी की नहीं! 🎭
अखबार की इस खबर को पढ़कर ऐसा लगता है कि हमारे यहाँ सरकारी महकमों की ‘आपसी जुगलबंदी’ किसी बेहतरीन कॉमेडी फिल्म से कम नहीं।
अब जरा इन महाशयों के जवाबों पर एक नजर डालें:
जिला पूर्ति अधिकारी (अखिलेश श्रीवास्तव) का कहना: "विपणन विभाग के अधीन निरीक्षक ने केस दर्ज कराया था, ऐसे में उनका अभियोग से कोई मतलब नहीं।" — वाह! मतलब मामला राशन और कोटे की दुकान का, लेकिन पूर्ति विभाग इससे ऐसे पल्ला झाड़ रहा है जैसे राशन नहीं, कोई अजनबी हो।
मार्केटिंग इंस्पेक्टर (शांतु मिश्रा) का कहना: "चूँकि शहर से जुड़ा मामला है, इसलिए केस दर्ज कराया गया, आगे जाँच में क्या हुआ, उन्हें इसकी जानकारी नहीं।" — यानी केस हमने ही दर्ज कराया, पर आगे क्या हुआ, राम जाने! ज़िम्मेदारी का ऐसा सुंदर फुटबॉल मैच शायद ही कहीं और देखने को मिले।
मुख्य आरोपी का हाल: कोटेदार महिला ने सरकारी राशन चुराए जाने का वीडियो खुद विभागीय ग्रुप में डाला, डीएम साहब ने भी इसे गंभीरता से लिया, लेकिन सात महीने के भीतर पुलिस ने जाँच पूरी करके मुख्य आरोपी का नाम ही केस से बाहर कर दिया!
निष्कर्ष:
जनवरी में राशन चोरी का वीडियो बनता है, अधिकारी आमने-सामने आकर अपने हाथ खड़े कर देते हैं, और मुख्य आरोपी हवा में उड़ जाता है।
क्या बात है! सरकारी तंत्र हो तो ऐसा, जहाँ गलती हो, पर गलती करने वाला कोई न मिले! 🇮🇳👏
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