
🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🇮🇳
मैं, एक मुसलमान की हैसियत से, भारत के हर नागरिक को 15 अगस्त की दिल से मुबारकबाद देता हूँ।
भारत की आज़ादी किसी एक कौम, एक मज़हब या एक सियासी पार्टी की वजह से नहीं मिली। इसके लिए हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, आदिवासी, मज़दूर, किसान, महिलाओं और लाखों आम लोगों ने कुर्बानियाँ दीं हैं।
मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का किरदार भी भारत की आज़ादी की तारीख़ का एक अहम हिस्सा है। 1700 के दशक से ही मुस्लिम फ़क़ीरों, हिंदू संन्यासियों, हैदर अली और टीपू सुल्तान ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और लड़ाई की।
1857 में बहादुर शाह ज़फ़र, मौलवी अहमदुल्लाह शाह और बेगम हज़रत महल ने ब्रिटिश हुकूमत का मुक़ाबला किया। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने हिंदू-मुस्लिम एकता और संयुक्त भारत के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी। ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान ने ख़ुदाई ख़िदमतगार आंदोलन के ज़रिए पुर-अमन विरोध की मिसाल पेश की। अशफ़ाक़उल्लाह ख़ान ने राम प्रसाद बिस्मिल के साथ मिलकर आज़ादी के लिए अपनी जान क़ुर्बान कर दी।
मुस्लिम उलेमा, छात्र, पत्रकार, मज़दूर, किसान और महिलाएँ भी इस जंग में पीछे नहीं रहे। आबादी बानो बेगम, जिन्हें बी अम्मा के नाम से जाना जाता था, ने भी लोगों को ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया।
मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना किसी दूसरे समुदाय के योगदान को कम करना नहीं है। यह भारत की साझा तारीख़ और सच्चाई को स्वीकार करना है।
हमारी आज़ादी सबकी क़ुर्बानियों से मिली है। इसलिए इतिहास को नफ़रत के लिए नहीं, बल्कि एकता और इंसाफ़ के लिए याद करना चाहिए।
मुसलमान होना और भारतीय होना एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नहीं है।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर नफ़रत नहीं, मोहब्बत और हिंदू-मुस्लिम एकता का पैग़ाम दें।
जय हिंद!
हिंदुस्तान ज़िंदाबाद
हिंदू-मुस्लिम एकता ज़िंदाबाद!
✒️ Mohammad Ataullah
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