
खाद वितरण पर बड़ा सवाल: किसान को दो बोरी मिलेगी या चार?
मध्य प्रदेश में खाद संकट के बीच किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। खाद लेने के लिए किसान सोसायटी और मंडियों के चक्कर लगा रहे हैं, लंबी कतारों में खड़े हैं और कई जगहों पर व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल खाद की उपलब्धता से ज्यादा उसके वितरण को लेकर है। अगर किसी किसान को निर्धारित मात्रा में खाद चाहिए, तो उसे स्पष्ट नियम के अनुसार खाद मिलनी चाहिए। किसान को यह पता होना चाहिए कि उसे कितनी खाद मिलेगी, कहां से मिलेगी और कितनी बार मिलेगी।
अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, अधिकारियों के बयानों को लेकर भी किसानों में असमंजस की स्थिति है। कुछ किसानों को दो बोरी और कुछ को चार बोरी खाद मिलने की बात सामने आने के बाद किसान पूछ रहे हैं कि आखिर खाद वितरण का स्पष्ट नियम क्या है?
अगर खाद की उपलब्धता सीमित है तो सरकार को पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि किसी किसान को जुगाड़ लगाना न पड़े और न ही खाद के लिए बार-बार सोसायटी, मंडी या तहसील के चक्कर लगाने पड़ें।
खाद संकट के समय सबसे जरूरी है कि वितरण व्यवस्था साफ और समान हो। किसान को लाइन में लगने के बाद यह पता नहीं चलना चाहिए कि आज खाद मिलेगी भी या नहीं।
आपके गांव में किसानों को कितनी खाद मिल रही है?
दो बोरी या चार बोरी?
और क्या खाद लेने के लिए आपको भी जुगाड़ लगाना पड़ रहा है? अपनी जमीनी हकीकत कमेंट में बताइए।
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