
#भारत से है नफरत तो फिर भारत आना ही क्यूं ? दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की जहांगीर काजी की याचिका, शादी में शामिल होने के लिए आना था भारत
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले में 81 वर्षीय ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्डधारक खालिद जहांगीर काजी की भारत आने की उम्मीदों को झटका देते हुए अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया है। दरअसल, काजी पर कथित रूप से कश्मीर समर्थक अलगाववादी गतिविधियों और भारत-विरोधी प्रचार में शामिल होने के आरोप हैं। इस मामले में असली कानूनी सवाल केवल OCI कार्ड रद्द करने का नहीं, बल्कि नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 (Immigration and Foreigners Act, 2025) के बीच संबंध का भी है।
खालिद जहांगीर काजी का पूरा मामला क्या है?
खालिद जहांगीर काजी एक OCI कार्डधारक हैं। मतलब हैं तो भारतीय मूल के, लेकिन उनके खिलाफ कथित कश्मीर समर्थक अलगाववादी गतिविधियोंऔर भारत-विरोधी प्रचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके OCI दर्जे और भारत में प्रवेश से संबंधित सरकारी कार्रवाई सामने आई। काजी परिवार में होने वाली शादियों में शामिल होने के लिए भारत आना चाहते थे। उन्होंने अंतरिम राहत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था।
खालिद जहांगीर काजी एक OCI कार्डधारक हैं। मतलब हैं तो भारतीय मूल के, लेकिन उनके खिलाफ कथित कश्मीर समर्थक अलगाववादी गतिविधियोंऔर भारत-विरोधी प्रचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके OCI दर्जे और भारत में प्रवेश से संबंधित सरकारी कार्रवाई सामने आई। काजी परिवार में होने वाली शादियों में शामिल होने के लिए भारत आना चाहते थे। उन्होंने अंतरिम राहत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था।
भारत-विरोधी गतिविधियों के आरोपों को देखते हुए OCI कार्डधारक खालिद जहांगीर काजी को दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल भारत आने से रोक दिया है। अदालत ने कहा कि उनके प्रवेश का सवाल नागरिकता अधिनियम और विदेशी कानून के संबंध से जुड़ा है, जिस पर अंतिम सुनवाई जरूरी है।
हाई कोर्ट ने फिलहाल भारत आने की अनुमति क्यों नहीं दी?
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न बेंच ने की। और तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि इस समय काजी को भारत आने की अंतरिम अनुमति देना उचित नहीं होगा। काज़ी के पक्ष में अंतरिम राहत देने के लिए कोई मज़बूत शुरुआती मामला (prima facie case) नहीं बनता है।
अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या अपीलों के अंतिम निपटारे से पहले उन्हें भारत में प्रवेश दिया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि काजी मजबूत प्रथमदृष्टया मामला दिखाने में असफल रहे हैं।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि केंद्र सरकार ने मामले से जुड़ी सामग्री को राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत की संप्रभुता और अखंडता से संबंधित बताया है।
अदालत ने कहा कि सुविधा का संतुलन फिलहाल सरकार के पक्ष में है। न्यायालय ने यह भी माना कि अंतरिम रूप से भारत आने की अनुमति देना उस अंतिम राहत के काफी करीब होगा, जिसकी मांग अपील में की गई है।
इसलिए अदालत ने उस अंतरिम अर्जी को खारिज कर दिया, जो उनके OCI कार्ड को रद्द करने और केंद्र सरकार द्वारा उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के मामले में दायर अपील के साथ लगाई गई।
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Lormi, Mungeli | Aug 13, 2026