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हरियाणा के संगठनात्मक कौशल को राष्ट्रीय विस्तार, संजय भाटिया बने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री जमीनी कार्यकर्ता से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर, संगठन के प्रति समर्पण और रणनीतिक कौशल का मिला सम्मान ‘हरियाणा भाजपा के कुशल संगठनकर्ता’ की राष्ट्रीय भूमिका, चुनावी प्रबंधन और कार्यकर्ता निर्माण के लंबे अनुभव पर पार्टी ने जताया भरोसा करनाल की ऐतिहासिक जीत से राज्यसभा तक और अब राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी, संजय भाटिया का बढ़ा कद पश्चिम बंगाल से असम, उत्तर प्रदेश से गुजरात और कर्नाटक तक संगठनात्मक अनुभव, राष्ट्रीय राजनीति में मिली बड़ी भूमिका हरियाणा की धरती से निकला संगठन का कर्मठ चेहरा,अब देशभर में भाजपा को मजबूत करने में निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका नई दिल्ली/चंडीगढ़/पानीपत 17 अगस्त। भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए हरियाणा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद श्री संजय भाटिया को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय टीम में संजय भाटिया को आठ राष्ट्रीय महासचिवों में स्थान दिया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हुई है। संजय भाटिया को मिली यह जिम्मेदारी उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव, चुनावी प्रबंधन की क्षमता, कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संवाद, लक्ष्य आधारित कार्यशैली और पार्टी के प्रति निरंतर समर्पण की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता के रूप में देखी जा रही है। हरियाणा की राजनीति और संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद अब उन्हें देशव्यापी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका मिली है। संगठन को लक्ष्य में बदलने और लक्ष्य को परिणाम में बदलने की पहचान संजय भाटिया की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता संगठनात्मक लक्ष्य को स्पष्ट रणनीति में बदलना और कार्यकर्ताओं की सामूहिक शक्ति के माध्यम से उसे परिणाम तक पहुंचाना रही है। वे लो-प्रोफाइल रहकर संगठन के काम को प्राथमिकता देने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। विभिन्न राज्यों में पार्टी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों को समझते हुए संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने पर विशेष जोर दिया। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व ने समय-समय पर उन्हें हरियाणा से बाहर भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक और चुनावी जिम्मेदारियां सौंपीं। पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक जैसे राज्यों में पार्टी के काम से जुड़े अनुभव ने उनके संगठनात्मक दायरे को प्रदेश की सीमाओं से आगे राष्ट्रीय स्तर तक विस्तार दिया। करनाल लोकसभा चुनाव की ऐतिहासिक जीत बनी राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण अध्याय संजय भाटिया के राजनीतिक सफर में वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने करनाल लोकसभा सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को 6,56,142 मतों के अंतर से पराजित किया था। यह हरियाणा के लोकसभा चुनावी इतिहास में सबसे बड़े जीत अंतर के रूप में दर्ज हुआ। यह जीत केवल चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके व्यापक जनसंपर्क, संगठनात्मक तैयारी और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बनी। लोकसभा सांसद के रूप में उन्होंने क्षेत्रीय विकास, आधारभूत ढांचे, रेलवे, सड़क, उद्योग, युवाओं और किसानों से जुड़े विषयों को संसद में उठाने का प्रयास किया। 2024 में संगठन को प्राथमिकता, 2026 में राज्यसभा और अब राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी द्वारा करनाल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद संजय भाटिया ने संगठनात्मक भूमिका को प्राथमिकता दी। इसके बाद भी उनका राजनीतिक और संगठनात्मक सक्रियता का सिलसिला जारी रहा। मार्च 2026 में भाजपा ने उन्हें हरियाणा से राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया और वे निर्वाचित हुए। उन्होंने अप्रैल 2026 में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। वर्तमान में वे उच्च सदन के सदस्य के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। अब राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक जीवन में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यसभा सदस्य के साथ राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण दायित्व मिलने से उनके अनुभव का उपयोग व्यापक स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने में किया जा सकेगा। छात्र जीवन से शुरू हुआ संगठनात्मक सफर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा संजय भाटिया का सार्वजनिक जीवन लंबे संगठनात्मक अनुभव से निर्मित हुआ है। पानीपत में 29 जुलाई 1967 को जन्मे संजय भाटिया छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हुए। 1980 के दशक में मंडल स्तर से संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने मंडल अध्यक्ष, युवा मोर्चा के विभिन्न दायित्व, जिला स्तर की जिम्मेदारियां और प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 2015 से 2021 तक वे भाजपा हरियाणा के प्रदेश महासचिव रहे। हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। मंडल से लेकर जिला, प्रदेश और अब राष्ट्रीय संगठन तक का उनका सफर भाजपा की उस कार्यकर्ता-आधारित संगठनात्मक व्यवस्था को रेखांकित करता है जिसमें लंबे समय तक निरंतर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दायित्व देकर आगे बढ़ाया जाता है। चुनावी प्रबंधन में अनुभव बना राष्ट्रीय जिम्मेदारी की बड़ी वजह संजय भाटिया की पहचान केवल जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि संगठनात्मक और चुनावी प्रबंधन के अनुभवी चेहरे के रूप में भी बनी है। हरियाणा के चुनावों के अलावा उन्हें विभिन्न राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारियां मिलीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रबंधन से लेकर गुजरात, असम और जम्मू-कश्मीर में संगठनात्मक कार्य तथा कर्नाटक में विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी तक उनके अनुभव का दायरा लगातार बढ़ता गया। कठिन परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाने की उनकी क्षमता को पार्टी नेतृत्व ने लगातार महत्व दिया। कर्नाटक चुनाव के दौरान तुमकुर जिले की गुब्बी विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी उन्होंने पार्टी के चुनावी एवं संगठनात्मक कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत- इसी सोच के साथ काम करने की शैली संजय भाटिया की संगठनात्मक शैली में कार्यकर्ता केंद्र में रहा है। बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, वरिष्ठ नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने तथा प्रत्येक जिम्मेदारी को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर उनका विशेष जोर रहा है। उनकी यही कार्यशैली उन्हें ऐसे संगठनात्मक नेताओं की श्रेणी में रखती है जो मंच पर दिखाई देने से अधिक संगठन की जमीन पर काम करने को प्राथमिकता देते हैं। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक ऐसे नेता की बनी है जो जिम्मेदारी मिलने के बाद लगातार क्षेत्र में रहकर कार्यकर्ताओं के साथ काम करने में विश्वास रखते हैं। सामाजिक सरोकार और जनसंपर्क भी राजनीतिक जीवन की महत्वपूर्ण पहचान राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों के साथ संजय भाटिया का सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ाव रहा है। शिक्षा, सामाजिक समरसता, जनकल्याण और विभिन्न सामाजिक अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच सहज एवं सुलभ नेता की पहचान दी।पानीपत और करनाल क्षेत्र से जुड़े सामाजिक एवं विकासात्मक विषयों को उन्होंने राजनीतिक दायित्वों के साथ प्राथमिकता दी। जनप्रतिनिधि के रूप में भी उनका प्रयास रहा कि क्षेत्रीय आवश्यकताओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जाए। समर्पण की मिसाल-परिवारिक अवसरों के बीच भी संगठन के कार्य को प्राथमिकता संजय भाटिया के संगठन के प्रति समर्पण का उदाहरण वर्ष 2026 में भी देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के चुनावी दायित्व के दौरान वे लगातार संगठनात्मक कार्य में सक्रिय रहे। उनके बेटे के विवाह से ठीक पहले तक वे पश्चिम बंगाल में चुनावी जिम्मेदारी निभाते रहे और पारिवारिक कार्यक्रम के बाद फिर संगठन के कार्य में लौट गए। यह प्रसंग उनके राजनीतिक जीवन में उस कार्यशैली को दर्शाता है जिसमें संगठन द्वारा दी गई जिम्मेदारी को वे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और व्यक्तिगत सुविधाओं से ऊपर संगठनात्मक दायित्व को रखते हैं। हरियाणा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा प्रतिनिधित्व संजय भाटिया की राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नियुक्ति हरियाणा भाजपा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश से लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे एक जमीनी नेता को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका मिलने से हरियाणा की संगठनात्मक कार्यशैली और अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। उनका अनुभव केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रहा है। अलग-अलग राज्यों में काम करने के कारण उन्हें विविध सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव प्राप्त हुआ है। यही व्यापक अनुभव राष्ट्रीय महासचिव के दायित्व में उनके लिए महत्वपूर्ण पूंजी साबित हो सकता है। राज्यसभा से राष्ट्रीय संगठन तक-दोहरी भूमिका में व्यापक जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद के रूप में संसदीय दायित्व और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारी-दोनों भूमिकाएं अब संजय भाटिया के सामने हैं। इससे उन्हें एक ओर राष्ट्रीय नीतिगत विमर्श में सक्रिय रहने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पार्टी संगठन को विभिन्न राज्यों में मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें शामिल किया जाना पार्टी नेतृत्व द्वारा संगठनात्मक अनुभव और परिणाम आधारित कार्यशैली पर भरोसे का संकेत है। जमीनी कार्यकर्ता से राष्ट्रीय नेतृत्व तक-एक प्रेरक यात्रा संजय भाटिया का सफर भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता से शुरू होकर मंडल, जिला, प्रदेश, लोकसभा, राज्यसभा और अब राष्ट्रीय महासचिव तक पहुंचा है। उनकी राजनीतिक यात्रा इस बात का उदाहरण है कि संगठन में निरंतर सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता किसी भी कार्यकर्ता को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकती है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में अब उनके सामने पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत करने,कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। हरियाणा की धरती से राष्ट्रीय संगठन के शीर्ष दायित्व तक पहुंचे संजय भाटिया की यह नई भूमिका उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय होने के साथ-साथ प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए भी गौरव और प्रेरणा का विषय है। - Thanesar News