
किसान भाइयों, धान की फसल में तना छेदक, पत्ती लपेटक और प्लांट हॉपर जैसे कीटों का प्रकोप अगर शुरुआती अवस्था में बढ़ जाए तो इसका सीधा असर फसल की बढ़वार, कल्लों की संख्या और आगे चलकर उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों के बीच Bayer Bicota जैसे दानेदार कीटनाशी का इस्तेमाल भी किया जाता है।
Bicota में Tetraniliprole 0.4% + Fipronil 0.6% GR सक्रिय तत्वों का संयोजन बताया गया है। यह एक ग्रेन्यूल यानी दानेदार formulation है, जिसे विशेष रूप से रोपाई वाली धान की फसल में खड़े पानी के माध्यम से खेत में broadcast करने के लिए दिया गया है।
इस उत्पाद की खास बात यह है कि इसमें दो अलग-अलग रासायनिक समूहों के सक्रिय तत्वों का संयोजन है। दिए गए विवरण के अनुसार Tetraniliprole IRAC Group 28 और Fipronil IRAC Group 2B से संबंधित हैं। इसलिए यह कीटों पर अलग-अलग प्रकार से प्रभाव डालने वाला संयोजन है।
अब सवाल आता है कि धान में Bicota किन-किन कीटों के लिए इस्तेमाल किया जाता है?
दिए गए स्रोत के अनुसार रोपाई वाली धान की फसल में इसका उपयोग मुख्य रूप से Yellow Stem Borer यानी पीला तना छेदक, Leaf Folder यानी पत्ती लपेटक, Brown Plant Hopper यानी BPH, White-Backed Plant Hopper यानी WBPH, Gall Midge और Green Leafhopper जैसे कीटों के प्रबंधन के लिए बताया गया है।
पीला तना छेदक धान के पौधे के तने के अंदर जाकर नुकसान करता है। शुरुआती अवस्था में इसका प्रकोप बढ़ने पर पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और बाद की अवस्था में dead heart जैसी समस्या दिखाई दे सकती है।
दूसरी तरफ Leaf Folder यानी पत्ती लपेटक धान की पत्तियों को लपेटकर उनके अंदर से हरे हिस्से को खाता है। इससे पत्तियों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है और अधिक प्रकोप होने पर फसल की बढ़वार पर असर पड़ सकता है।
BPH और WBPH जैसे प्लांट हॉपर भी धान के लिए महत्वपूर्ण कीट हैं। ये पौधे के रस को चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। अधिक प्रकोप होने पर पौधे कमजोर पड़ सकते हैं और hopper burn जैसी स्थिति भी बन सकती है।
अब बात करते हैं सबसे महत्वपूर्ण चीज यानी डोज और इस्तेमाल के तरीके की।
दिए गए विवरण के अनुसार transplanted paddy में Bicota की मात्रा 8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़ बताई गई है। इसे पानी में घोलकर स्प्रे नहीं करना है, बल्कि यह ग्रेन्यूल के रूप में सीधे खेत में broadcast किया जाता है।
इसके लिए खेत में करीब 2 से 5 सेंटीमीटर खड़ा पानी होना चाहिए। ग्रेन्यूल को पूरे खेत में समान रूप से फैलाना जरूरी है। किसी एक स्थान पर दाने इकट्ठे नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे उस जगह पर जरूरत से ज्यादा मात्रा पहुंच सकती है।
मान लीजिए किसान के पास 1 एकड़ धान है और उत्पाद के लेबल पर 8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की सिफारिश लागू है, तो उसी क्षेत्र के लिए निर्धारित मात्रा में ही उत्पाद का इस्तेमाल करना चाहिए। खेत का क्षेत्रफल बढ़ने पर मात्रा भी उसी अनुपात में निर्धारित होगी।
यहां एक जरूरी बात समझना बहुत महत्वपूर्ण है। इंटरनेट पर कई जगह 5 किलोग्राम, 8 किलोग्राम या 10 किलोग्राम प्रति एकड़ जैसी अलग-अलग मात्रा दिखाई दे सकती है। इसलिए किसान को केवल किसी दुकानदार, वीडियो या दूसरे किसान की बताई हुई मात्रा देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। आपके पास मौजूद उत्पाद के आधिकारिक लेबल और लीफलेट पर आपकी फसल और कीट के लिए जो मात्रा दर्ज है, वही अंतिम आधार होना चाहिए।
दिए गए विवरण में इसके इस्तेमाल का समय रोपाई के 15 से 25 दिन बाद यानी 15–25 DAT बताया गया है। इस समय धान की फसल स्थापित हो चुकी होती है और कल्ले निकलने की शुरुआत हो रही होती है। इसी अवधि में शुरुआती कीट गतिविधि दिखाई देने पर इसका इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई है।
आवेदन के समय खेत में 2 से 5 सेंटीमीटर पानी रखना बताया गया है। ग्रेन्यूल डालने के बाद पानी को तुरंत बाहर नहीं निकालना चाहिए। दिए गए विवरण में 3 से 5 दिन तक पानी नहीं निकालने की सलाह दी गई है, ताकि दाने धीरे-धीरे घुलें और सक्रिय तत्व पौधे के आसपास प्रभावी रूप से पहुंच सके।
किसान भाइयों, दवा डालते समय एक गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए और वह है पूरे खेत में समान वितरण न करना। अगर ग्रेन्यूल एक जगह ज्यादा और दूसरी जगह कम गिर गया तो पूरे खेत में समान प्रभाव नहीं मिलेगा। इसलिए खेत में चलते हुए समान रूप से broadcast करना जरूरी है। जरूरत हो तो उचित granule applicator या spreader का उपयोग किया जा सकता है।
Bicota के बारे में दिए गए विवरण में लंबे समय तक residual protection की बात भी कही गई है। इसी वजह से इसे एक बार इस्तेमाल करने वाला उत्पाद बताया गया है। लेकिन यहां भी किसान भाइयों को सावधान रहना चाहिए। किसी भी कीटनाशी को केवल इसलिए दोबारा नहीं डालना चाहिए कि कुछ दिनों बाद खेत में कोई दूसरा कीट दिखाई दे गया है। पहले कीट की पहचान करें, प्रकोप की स्थिति देखें और फिर लेबल की सिफारिश के अनुसार निर्णय लें।
कीटनाशक के इस्तेमाल में एक और महत्वपूर्ण विषय है resistance management। अगर किसान हर बार एक ही रासायनिक समूह की दवा लगातार इस्तेमाल करता रहेगा तो समय के साथ कीटों में resistance विकसित होने का खतरा हो सकता है। Bicota में दो अलग-अलग समूहों के सक्रिय तत्व हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे आवश्यकता से अधिक या बार-बार इस्तेमाल किया जाए।
किसान भाइयों को Integrated Pest Management यानी IPM को भी ध्यान में रखना चाहिए। खेत की नियमित निगरानी करें, कीट की पहचान करें, जरूरत के अनुसार ही कीटनाशी का इस्तेमाल करें और अनावश्यक छिड़काव या दवा का प्रयोग न करें।
अब बात करते हैं सुरक्षा की।
ग्रेन्यूल को हाथ से broadcast करते समय भी किसान को सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। दिए गए विवरण के अनुसार दस्ताने, मास्क और सुरक्षात्मक eyewear का इस्तेमाल करना चाहिए। दवा डालते समय खाना, पीना या धूम्रपान नहीं करना चाहिए। काम पूरा होने के बाद हाथ और शरीर के खुले हिस्सों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।
बच्चों और पशुओं को उपचारित खेत से दूर रखना चाहिए। उत्पाद को खाद्य सामग्री, पशु आहार और पीने के पानी से अलग रखना चाहिए। इसे मूल पैकिंग में, ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर तथा सीधी धूप से दूर रखने की जानकारी दी गई है।
अब सबसे जरूरी बात आती है PHI यानी Pre-Harvest Interval की। दिए गए विवरण में धान के लिए PHI 30 दिन बताया गया है। यानी अंतिम उपयोग और फसल की कटाई के बीच निर्धारित अंतराल का पालन करना जरूरी है। किसान को अपने उत्पाद के पैक पर लिखे आधिकारिक निर्देश को प्राथमिकता देनी चाहिए।
किसान भाइयों, यह भी समझना जरूरी है कि Bicota कोई खाद नहीं है। इसका उद्देश्य कीट नियंत्रण है। खेत में कल्ले कम हैं, पौधे पीले हैं या फसल कमजोर है तो हर समस्या का समाधान कीटनाशी नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में पोषण, पानी, जड़ क्षेत्र, रोग और कीट—सभी कारणों की जांच करनी चाहिए।
इसी तरह अगर धान में Leaf Folder या Stem Borer का प्रकोप नहीं है तो केवल दूसरे किसान को देखकर दवा डालने की जरूरत नहीं है। कीटनाशी का इस्तेमाल कीट की वास्तविक स्थिति और अनुशंसित उपयोग के आधार पर होना चाहिए।
और सबसे महत्वपूर्ण बात-किसान भाइयों, डोज बढ़ाने से दवा ज्यादा प्रभावी नहीं हो जाती। सही मात्रा, सही समय, सही पानी की स्थिति और पूरे खेत में समान वितरण ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अगर आप Bicota का इस्तेमाल करने जा रहे हैं तो अपने पैक पर दिए गए लेबल को जरूर पढ़ें। उत्पाद की formulation, फसल, कीट, मात्रा, पानी की स्थिति, PHI और अन्य सुरक्षा निर्देशों में कोई अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग की सलाह लेना भी बेहतर रहेगा।
धान की फसल में अभी आपके खेत में कौन-सा कीट सबसे ज्यादा परेशानी दे रहा है?
तना छेदक, Leaf Folder, BPH, WBPH या कोई दूसरा कीट?
कमेंट में अपनी फसल की उम्र और कीट का नाम जरूर बताइए। इससे दूसरे किसानों को भी अपने खेत में कीट की पहचान करने में मदद मिलेगी।
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