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मऊगंज में दो छात्रों की मौत पर बवाल! हाईवे पर उतरे परिजन, घंटों चक्काजाम
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500 रुपये की रिश्वत पर दुख जताने वाले IAS राहुल बंसल का पुराना मॉक इंटरव्यू वीडियो एक बार फिर चर्चा में है। उस समय उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कड़ी सोच और ईमानदार प्रशासन की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने यह भी बताया था कि उनके भाई के जन्म प्रमाण पत्र के लिए कथित तौर पर 500 रुपये की रिश्वत मांगी गई थी, जिसे लेकर उन्हें बेहद दुख हुआ था।

अब वर्षों बाद वही राहुल बंसल खुद 1 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं। इसी बीच उनका पुराना मॉक इंटरव्यू वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग उनके पुराने बयानों और मौजूदा आरोपों के बीच विरोधाभास की चर्चा कर रहे हैं।

वीडियो में राहुल बंसल ने भ्रष्टाचार, शासन व्यवस्था में सुधार और बेहतर सार्वजनिक सेवा की आवश्यकता पर विस्तार से बात की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ अधिकारियों की गलतियों के आधार पर पूरी व्यवस्था को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए और पुलिस व प्रशासनिक सुधार बेहद जरूरी हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस क्लिप ने एक बार फिर सिविल सेवा में नैतिकता, जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास को लेकर बहस छेड़ दी है। वहीं, मामले की जांच जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट होगी।

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मऊगंज के नरैनी में खूनी खेल! दो पक्ष भिड़े, टांगा-तलवार से हमले का आरोप, 3 गंभीर रीवा रेफर
नेहा ठाकुर ने रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा से किया सवाल?
लोकायुक्त की बड़ी कार्यवाही...
 रीवा में 50 हजार की रिश्वत लेते PWD के मुख्य अभियंता अपने दोस्त के साथ रंगेहाथ हुए ट्रैप।
 शासकीय आवास में ले रहे थे रिश्वत की रकम, निजी कंपनी के मैनेजर से ट्यूब टेस्ट के नाम पर हर माह मांगी थी 1 लाख की चढ़ोत्तरी।

सतना के संविदाकार की शिकायत पर PWD रीवा का मुख्य अभियंता रिश्वत लेते गिरफ्तार!
सरकारी आवास में 50 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त के हत्थे चढ़े मुख्य अभियंता केके लक्षे
रिश्वत की रकम लेते साथी धर्मवीर भारती भी पकड़ा गया, PWD के गलियारों में मचा हड़कंप

पेट्रोल न्यूज़ रीवा/सतना। सतना के एक संविदाकार की शिकायत पर रीवा PWD के मुख्य अभियंता केके लक्षे को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने का मामला सामने आया है। कार्रवाई के दौरान मुख्य अभियंता के सरकारी आवास पर हड़कंप मच गया।
बताया जा रहा है कि मुख्य अभियंता केके लक्षे द्वारा PLTD कंपनी के सोनू सिंह से 50 हजार रुपये की रिश्वत ली जा रही थी। इसी दौरान कार्रवाई करते हुए संबंधित जांच एजेंसी ने मुख्य अभियंता केके लक्षे को उनके साथी धर्मवीर भारती के साथ पकड़ लिया।
सतना के संविदाकार की शिकायत बनी कार्रवाई की वजह
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मामला सतना के संविदाकार की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के बाद रिश्वतखोरी की पुष्टि के लिए कार्रवाई की गई और सरकारी आवास में रकम लेते मुख्य अभियंता को पकड़ लिया गया।
PWD के मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में आगे की कार्रवाई और रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद होने की उम्मीद है।
*गांव-गांव पहुंच रही शराब की पैकारी, खुलेआम बिक रही देशी-विदेशी शराब, नशामुक्ति अभियान फेल*

*मऊगंज के BKD कंपोजिट शराब दुकान से दिनभर सप्लाई। मोटरसाइकिल और बिना नंबर की फोर व्हीलर से गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा नशा। पुलिसअधीक्षक-आबकारी मौन, युवा सबसे ज्यादा चपेट में*

*मऊगंज।* सरकार और पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान मऊगंज में पूरी तरह फेल होते नजर आ रहा है। मऊगंज क्षेत्र में शराब कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब शराब की पैकारी खुलेआम की जा रही है। जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।

*खुलेआम हो रही सप्लाई*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मऊगंज में संचालित BKD शराब की दुकान से दिनभर खुलेआम पैकारी हो रही है। शराब तस्कर मोटरसाइकिल और बिना नम्बर की सफेद कलर की फोर व्हीलर गाड़ियों का इस्तेमाल कर गांव-गांव तक शराब पहुंचा रहे हैं। मऊगंज  स्थित "कंपोजिट एवं देशी शराब" दुकान से ही इसकी सप्लाई की जा रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि शराब माफिया बिना किसी डर के दिनदहाड़े पैकारी कर रहे हैं। जिसके कारण पूरा क्षेत्र नशेड़ियों और शराबियों से भरा पड़ा है।

*युवाओं में पड़ रहा सबसे ज्यादा असर*
गांव-मोहल्लों में शराब की बिक्री बढ़ने से नशेड़ियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर युवा पीढ़ी इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आ रही है। गांवों में तीसरा व्यक्ति नशे का आदी बनता जा रहा है। 

जिन परिवारों के लोग नशे के आदी हो गए हैं उनका हाल बेहाल है। आर्थिक स्थिति खराब होने के साथ-साथ घरों में झगड़े और मारपीट की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। साथ ही नशेड़ियों के आतंक से आम लोगों का भी जीना दूभर हो गया है। शाम ढलते ही शराबियों और नशेड़ियों का दल गली-मोहल्लों में लग जाता है, जिसके कारण सभ्य समाज के लोगों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है।

*नशामुक्ति अभियान नहीं आ रहा काम*
नशे के आदी व्यक्ति द्वारा नशे के लिए आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। क्षेत्र में ऐसी कई घटनाएं घटित भी हो चुकी हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा। शासन और प्रशासन का नशा मुक्ति अभियान भी नशेड़ियों को नशा मुक्त करने में नाकाम साबित हो रहा है।

नशे की सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है जिसको चखकर लोग नशा नहीं छोड़ पाते। लोगों ने पुलिस अधीक्षक  से शराब की पैकारी पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

आबकारी और पुलिस विभाग की मिलीभगत या लापरवाही के कारण ही कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं? अब देखना होगा कि प्रशासन इस अवैध पैकारी पर कब अंकुश लगाता है?
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🛑 एमपी :  बड़ी खबर
फर्जी 'पॉकेट गवाह' मामले में इंदौर के तत्कालीन TI दिनेश वर्मा का किया गया डिमोशन, बने SI

इंदौर :  पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने विभागीय जांच के बाद पूर्व खजराना ⁠थाना प्रभारी रहे दिनेश वर्मा पर बड़ी कार्यवाही की है,
वर्मा पर 700 से अधिक आपराधिक मामलों में ⁠फर्जी 'पॉकेट गवाह' पेश करने का गंभीर आरोप जो जांच में सही पाया गया,
कड़ी सजा के तौर पर उन्हें इंस्पेक्टर पद से डिमोट कर तीन साल के लिए सब इंस्पेक्टर (SI) बना दिया गया है।
आरक्षण सिर्फ छात्रों पर ही क्यों 
सरकारी कर्मचारी नौकरी पर ही क्यों 
जनप्रतिनिधियों पर भी आरक्षण होना लागू होना चाहिए,,,,,,,,,,

वर्तमान में पूरे देश में कम से कम 80 से 90 सीट आरक्षित कर दी गई है जबकि होना यह चाहिए 
कि सभी सीट से सभी को लड़ने का अधिकार होना चाहिए ओर जब काउंटिंग होती है जब आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए 

यदि किसी सामान्य वर्ग के प्रत्याशी को डाले गए वोट का 70% वोट मिलता है 
और वहीं पर इस चुनाव में SCST  उम्मीदवार को यदि 15% या 20% वोट मिलते हैं तो SCST उम्मीदवार को जीता घोषित किया जाना चाहिए,,,,,

शायद जब यह नियम लागू हो जाएगा तो गली से लेकर दिल्ली तक के नेताओं को छात्रों का दर्द पता चल जाएगा
🇮🇳 अटल बिहारी वाजपेयी जी का आरक्षण पर दृष्टिकोण आज भी देश में चर्चा का विषय है।
उन्होंने सामाजिक न्याय, समान अवसर और राष्ट्रीय एकता पर ज़ोर दिया। उनका मानना था कि समाज के वंचित वर्गों का उत्थान आवश्यक है, लेकिन साथ ही शिक्षा, अवसर और विकास के माध्यम से एक ऐसे भारत की ओर बढ़ना चाहिए जहाँ हर नागरिक को उसकी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
🇮🇳 "राष्ट्र पहले, समाज साथ, और विकास सबका।"

Video credit :- Desh
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ऑपरेशन सफल या अधूरा? माल जब्त, मगर तस्कर फिर पुलिस की पकड़ से बाहर
अलमारी के लॉकर से निकली शराब की बोतलें, मऊगंज में दंग रह गए अधिकारी
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ट्रक चालक से लूट करने वालों पर पुलिस का शिकंजा, एक गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
UGC के नए कानूनों और शहीद भरत तिवारी हत्याकांड के बाद देश में ये पहला चुनाव था,

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट और बिहार की बांकीपुर सीट BJP की गढ़ थी या ये कहें कि बीजेपी की नाक थी,।

दोनों सीट पर भाजपा चुनाव हार गई और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना बूथ तक नहीं बचा पाए।

ऐसी दशा में ये कहना ग़लत नहीं होगा की सवर्णों ने भाजपा की नाक काट ली है।

भाजपा को लगा कि उनका पारंपरिक (सवर्ण) वोट बैंक कहीं नहीं जाएगा क्योंकि उनके पास ‘कोई और विकल्प’ नहीं है लेकिन भाजपा भूल गई की सवर्ण ‘विकल्प तैयार करने वाले’ लोग हैं 🔥

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जाति धर्म पर आरक्षण समाप्त हो 
सौजन्य सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय ज़ी के विचार देश हित मे.......
देश मे सख्त नागरिक कानून लागू होना चाहिए । हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है और हर कार्य का अपना अलग महत्व है सम्मान सबका जरुरी है देश हित.....आप अपनी राय अवश्य दें
रिटायर्ड मेजर जनरल जी.डी. बख्शी (GD Bakshi) ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस विषय पर व्यापक और गंभीर राष्ट्रीय चर्चा होनी चाहिए।

जी.डी. बख्शी ने कहा, "700 साल पहले शोषण हुआ, तो अगले 7,000 या 70,000 साल मुझे रिजर्वेशन दो! This is nonsense!"

उन्होंने तर्क दिया कि सदियों पुराने शोषण के आधार पर अनिश्चितकाल तक आरक्षण जारी रखने की नीति पर पुनर्विचार होना चाहिए और योग्यता तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर खुली बहस होनी चाहिए।
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*मऊगंज में शराब ठेकेदार की मनमानी! एमआरपी सिर्फ दिखावा, सुराप्रेमियों से हर क्वार्टर पर खुलेआम हो रही 25 से 50 रुपये तक अतिरिक्त वसूली?*

*पेट्रोल न्यूज़🔥 | मऊगंज*

मऊगंज जिले में शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि *चाक मोड़ स्थित मैरिज गार्डन के पास  संचालित शराब दुकान* पर ग्राहकों से बोतलों पर अंकित *एमआरपी से अधिक कीमत वसूली जा रही है।* स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रत्येक क्वार्टर पर *25 से 50 रुपये तक अतिरिक्त राशि* ली जा रही है। इससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

*एमआरपी सिर्फ बोतल पर, वसूली मनमर्जी से?*

ग्राहकों का आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बावजूद दुकान पर अलग ही नियम लागू हैं। शराब लेने पहुंचने वाले लोगों से तय कीमत से अधिक पैसे मांगे जाते हैं। विरोध करने पर ग्राहकों को शराब देने से इनकार करने या बहस करने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। इससे आम उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

*एक ही जिले में अलग-अलग रेट, आखिर क्यों?*

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले की अन्य शराब दुकानों की तुलना में इस दुकान पर कई ब्रांड की शराब अधिक कीमत पर बेची जा रही है। सवाल उठता है कि जब पूरे प्रदेश में प्रत्येक ब्रांड का एमआरपी तय है, तो एक ही जिले में अलग-अलग दरों पर शराब कैसे बेची जा रही है? क्या नियम केवल कागजों तक सीमित हैं?

*आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल?*

क्षेत्र में चर्चा है कि कथित ओवररेटिंग का यह खेल कोई नया नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी है। इसके बावजूद आबकारी विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही?

*उपभोक्ताओं का सवाल—एमआरपी है तो ज्यादा पैसे क्यों?*

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी भी उत्पाद पर एमआरपी अंकित है तो उससे अधिक राशि वसूलना नियमों के विरुद्ध है। उनका कहना है कि यदि शराब दुकानों पर खुलेआम अतिरिक्त पैसे लिए जा रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

*कलेक्टर मऊगंज से निष्पक्ष जांच की मांग*

स्थानीय लोगों ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में ओवररेटिंग की शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार, सेल्समैन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि उपभोक्ताओं के साथ कथित मनमानी पर रोक लग सके।

*अब प्रशासन की परीक्षा ?*

मामला सामने आने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन और आबकारी विभाग पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एमआरपी से कितनी अधिक वसूली हो रही  है और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है? फिलहाल, यह मुद्दा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
😱 मऊगंज में खुलेआम बिक रही शराब और नशे की पुड़िया! वायरल VIDEO से मचा बवाल!