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बब्लू सिन्हा

@bablusinha462
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हाथी ने बंधन स्वीकार क्या किया,
रस्सी को अपने ताक़तवर होने का भ्रम हो गया।
<nis:link nis:type=tag nis:id=genalpha nis:value=genalpha nis:enabled=true nis:link/> अगला आंदोलन पढ़ाई पर नहीं मिठाई पर होगा!
धोखेबाजों की बस्ती में, सच्चे आ गए है,
इश्क़ की महफ़िल में अब बच्चे आ गये हैं...
Video 3
जब भी बादल छाए...आसमां में तारों की कमी देखी.... आज फिर हमने, उनकी जिंदगी में अपनी कमी देखी.....
जल्दबाज़ी में.....
काँच टूटने के बाद कमज़ोर नहीं ….. जान लेवा हो जाता है !
मत देख मैं गुनहगार कितना हूं 
ये देख मैं तेरे लिए वफ़ादार कितना हूँ...
ख़ुदा करे हमारा मिलना दोबारा हो…
जो साथ अधूरा था, वो पूरा हो….......
जैसे नमक बिना खाना नहीं बनता 
वैसे प्यार बिना कोई दीवाना नहीं बनता.....
जो लोग जानते है बिछड़ने का गम ,
वो पास बैठे परिंदे को उड़ाया नही करते ।।
माटी मानुष
7 years later 🗓⏳👣
हत्या......
Dhire dhire zindagi
बगहा में घर से निकला कोबरा
शानदार पहल
नचनिया-बजनिया और बारात के साथ डूब गये नितिन नवीन
बाप-बेटे के गढ़ में प्रशांत ने लगायी आग, भाजपा का एक खेमा गदगद

पत्रकार वीरेंद्र यादव  Birendra Yadav News 

पटना जिले के बांकीपुर विधान सभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर जीत गये हैं, लेकिन हारा कौन? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सीएम सम्राट चौधरी या नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। सबसे बड़ा सवाल यही है। प्रधानमंत्री के विकास का रोडमैप, अमित शाह की वोट रणनीति, सम्राट चौधरी का अहंकार या तेजस्वी यादव का प्रवासी व्यक्तित्व इस चुनाव में हारा है। सबके कंधों पर प्रशांत किशोर की जीत का श्रेय जाता है। सबने मिलकर एक ऐसे व्यक्तित्व को खड़ा किया, जो बदलाव की आकांक्षा का प्रतिनिधि बन गया। प्रशांत किशोर ने स्थानीय मुद्दों की व्यापक परिप्रेक्ष्य में व्याख्या की और अपनी बात को जनता को समझाने में सफल रहे। 
यह सीट नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए यह सीट उनके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गयी थी। उपचुनाव में भाजपा के साथ सभी सहयोगी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। एनडीए के सभी सांसद, विधायक और विधान पार्षद दिन-रात भाजपा उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे थे। संसाधन और सुविधाओं को घर-घर पहुंचाया जा रहा था। इसके बावजूद भाजपा चुनाव हार गयी। 
भाजपा की प्रचार टीम में नचनिया, बजनिया के साथ बारात के रूप में बड़े-बड़े सांसद और केंद्रीय मंत्री भी मैदान में मौजूद थे। मतदान के समय ही प्रधानमंत्री की मन की बात भी सुनायी जा रही थी। राजनीति की कोई मर्यादा ऐसी नहीं थी, जिसका मान-मर्दन नहीं किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद मोर्चा संभाल रखे थे। इसलिए मंडल कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया था। सब मिलकर भी जीत से 20 हजार वोट की दूरी पर रह गये। पिछले विधान सभा चुनाव की तुलना में लगभग आधा वोट मिला। 
लालू यादव के परिवारवाद पर प्रहार करने वाली भाजपा ने पटना पश्चिम के पूर्व विधायक नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र और बांकीपुर के विधायक नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। इस सीट पर पिछले 30 वर्षों से बाप-बेटे का कब्जा था। एकदम सौ फीसदी शहरी इलाका है। इसलिए इस सीट को एकदम सुरक्षित माना जा रहा था, लेकिन गढ़ ध्वस्त हो गया। हालांकि गढ़ ध्वस्त होने से भाजपा का एक खेमा खुश भी है।
चुनाव परिणाम और वोट बिहैब की व्याख्या शुरू हो गयी है। लेकिन इतना तय है कि उपचुनाव में भाजपा दरकती नजर आयी और राजद के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। यह चुनाव राजद, भाजपा और जनसुराज सबके लिए सबक, चेतावनी और चुनौती है।
ये कांवरिये नहीं होते तो?
सनातन का अपमान करने का कॉपीराइट सिर्फ एक दल को है।
देवर.....
बंगाल जाकर भगवा पहनकर चंदन का टीका लगाकर मछली खाने पर सनातन का अपमान नहीं होता है।
गांधी के देश में हिंसा की जगह नहीं...
सनातन का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा क्योंकि भगवान पर सिर्फ एक दल का कॉपीराइट है बाकी पतंग बनाकर उड़ाना काफिला के आगे नचाना एकाधिकार है।
माहटर साहेब