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HP 35 - Anni wale

@tt879542
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Pm shri boys school anni boys State level natii sirmour amboya 📍
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राजा ❤️🧿
आनी में सिर्फ एक अल्ट्रासाउंड मशीन आने को इतनी बड़ी उपलब्धि बताकर प्रचार किया जा रहा है, जैसे कोई रोबोटिक सर्जरी सिस्टम आ गया हो। मशीन का आना निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक मशीन से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हो जाएगी?

जरा उन महिलाओं की भी चिंता कीजिए जिन्हें गर्भावस्था के दौरान विशेषज्ञ स्त्री रोग विशेषज्ञ की सुविधा के लिए रामपुर और शिमला जाना पड़ता है। जब Gynecologist, Pediatrician, MD Medicine और ENT Specialist जैसे आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता तक सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऊपर से Pediatrician और MD Medicine जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादले हो चुके हैं और नई अस्पताल बिल्डिंग का निर्माण फंड की कमी के कारण रुका हुआ है।

2022 के विधानसभा चुनावों के अनुसार आनी विधानसभा क्षेत्र में 88,955 पंजीकृत मतदाता थे। इतनी बड़ी आबादी वाले विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक-एक प्रमुख विशेषज्ञ डॉक्टर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित न होना गंभीर चिंता का विषय है।

हम सरकार से स्पष्ट मांग करते हैं कि कम से कम एक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक-एक प्रमुख विशेषज्ञ चिकित्सक की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आनी को Gynecologist, Pediatrician, MD Medicine, ENT Specialist और Radiologist जैसी विशेषज्ञ सेवाओं की नियमित उपलब्धता मिलनी चाहिए, ताकि जनता को आवश्यक उपचार के लिए रामपुर, शिमला या अन्य स्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।

और उन नेताओं से भी एक सवाल—एक छोटी-सी सुविधा के लिए इतने पोस्टर बनाकर बार-बार धन्यवाद और श्रेय लेने की होड़ क्यों? जिस क्षेत्र की जनता को आज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए बाहर जाना पड़ रहा है, वहां एक मशीन को इतनी बड़ी उपलब्धि बनाकर पेश करना क्या उचित है? पहले जनता की वास्तविक जरूरतों और स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों पर ध्यान दीजिए, फिर पोस्टर और प्रचार कीजिए।

अल्ट्रासाउंड मशीन एक सुविधा है, पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं। मशीन के साथ उसकी उचित जांच और रिपोर्टिंग के लिए योग्य विशेषज्ञ/Radiologist, पर्याप्त स्टाफ और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं भी चाहिए।

जनता को केवल मशीन, उद्घाटन और प्रचार नहीं चाहिए; जनता को विशेषज्ञ डॉक्टर, पर्याप्त स्टाफ, पूर्ण अस्पताल भवन और समय पर इलाज चाहिए।

स्वास्थ्य सेवा प्रचार का विषय नहीं, जनता की मूलभूत जरूरत है।
कलपा ❤️🧿
जय शमशरी महादेव ❤️
पहचानिए तो सही! 👀

आउटर सराज के इस युवा नेता की यह फोटो किसकी है? 🤔

अगर आप पहचान गए हैं तो कमेंट में नाम जरूर बताएं। 👇

देखते हैं आउटर सराज में कितने लोग इन्हें पहचानते हैं! ❤️
Kullvi nati❤️🙏🏻
तेबन भुंडा महायज्ञ 1995
ये तस्वीर आज से लगभग 31 वर्ष पहले की है जिसमें देवाधिदेव श्रीममलेश्वर र महादेव जी ममेल, श्री बूढ़ा महादेव जी नित्थर ,श्री सोमेश्वर महादेव जी सोमाकोठी ,श्री बिननी महादेव जी बिनन , गढ़पति श्री च्वासी नाग जी महोग , श्री शूष्णी नाग जी शुशन और श्री ढैंशरी नाग जी जैई जी इस महायज्ञ में शामिल हुए थे ये भुण्डा महायज्ञ 100 साल में एक बार ही होता है
जय च्वासिये कला
IGMC में मरीजों के साथ व्यवहार भी इलाज का हिस्सा है

आज किसी काम से IGMC जाना हुआ। वहाँ Child OPD में एक डॉक्टर साहब से सामना हुआ। डॉक्टर का ज्ञान और इलाज अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन मरीज और उसके परिजनों से बात करने का तरीका भी उतना ही मायने रखता है।

मरीज से उच्ची आवाज़ में बात करना, चिल्लाना और “तू -तड़ाक” से बात करना किसी भी मरीज या उसके परिजन के लिए बेहद दुखद और अपमानजनक महसूस हो सकता है।

मरीज अस्पताल में किसी पर एहसान करने नहीं आता, बल्कि अपनी परेशानी और उम्मीद लेकर आता है। इसलिए डॉक्टर और मरीज के बीच सम्मान, संवेदनशीलता और इंसानियत का होना बहुत जरूरी है।

इलाज सिर्फ दवा से नहीं, अच्छे व्यवहार से भी होता है। उम्मीद है कि IGMC जैसे बड़े संस्थान में मरीजों के साथ व्यवहार को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाएगा जितना उनके इलाज को।
Jai mata di ❤️🙏🏻
आनी (तेशन) गाँव और पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए यह बेहद गर्व का क्षण है, क्योंकि अनुपम जी की इस बहादुरी ने नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही जंग को एक नई मजबूती दी है।
जय हो मालिक ❤️
🎉 आनी के सुभाष जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎂💐

ईश्वर से कामना है कि आपका जीवन हमेशा खुशियों, सफलता और अच्छे स्वास्थ्य से भरा रहे। आने वाला हर साल आपके लिए नई खुशियाँ और नई उपलब्धियाँ लेकर आए।

जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ! 🎂🎉❤️
उद्घाटन के एक दिन बाद ही रुझान आ गए इलेक्ट्रिक बसों के |
(फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ🎖️⭐)
 (द्वितीय विश्व युद्ध (1942) के दौरान बर्मा के मोर्चे पर एक जापानी सैनिक ने अपनी मशीनगन से सैम मानेकशॉ के पेट में 7 गोलियां उतार दी थीं।
जब डॉक्टर ने उनका इलाज करने से मना कर दिया क्योंकि उनके बचने की उम्मीद कम थी, तो सैम ने मजाक में कहा, "मुझे एक गधे ने लात मार दी थी।" उनके इस हौसले को देखकर डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया और उनकी जान बचाई)

फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ भारतीय सेना के इतिहास के सबसे साहसी और सम्मानित सैन्य कमांडरों में से एक हैं। उन्हें 'सैम बहादुर' के नाम से जाना जाता है और वे भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की फाइव-स्टार रैंक से सम्मानित किया गया था। उनके 40 साल के सैन्य करियर में 5 बड़े युद्ध शामिल हैं, लेकिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी रणनीतिक जीत ने इतिहास बदल दिया, जिसके कारण एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ।प्रारंभिक जीवन और सेना में प्रवेशजन्म: 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर, पंजाब के एक पारसी परिवार में हुआ था।जिद की कहानी: उनके पिता डॉ. हॉरमुसजी मानेकशॉ उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे और पढ़ाई के लिए लंदन भेजने से मना कर दिया था। पिता से नाराज होकर सैम ने सैन्य अकादमी की परीक्षा दी।आईएमए बैच: वे 1932 में देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पहले बैच (फर्स्ट पायोनियर्स) के 40 कैडेटों में शामिल हुए।बर्मा युद्ध: मौत को छूकर लौटेद्वितीय विश्व युद्ध (1942) के दौरान बर्मा के मोर्चे पर एक जापानी सैनिक ने अपनी मशीनगन से सैम मानेकशॉ के पेट में 7 गोलियां उतार दी थीं।उनकी बहादुरी देखकर मेजर जनरल डेविड कोवान ने अपनी वर्दी से 'मिलिट्री क्रॉस' (MC) मेडल निकालकर मौके पर ही सैम को पहना दिया, क्योंकि यह मेडल मृत सैनिकों को नहीं दिया जाता था।जब डॉक्टर ने उनका इलाज करने से मना कर दिया क्योंकि उनके बचने की उम्मीद कम थी, तो सैम ने मजाक में कहा, "मुझे एक गधे ने लात मार दी थी।" उनके इस हौसले को देखकर डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया और उनकी जान बचाई।
हर हर महादेव 🔱✨
*निगान शवाड मार्ग निगान में बन्द......
🇮🇳⚡️We salute our brave Indian Army soldiers and officers who make the supreme sacrifice to protect our motherland. 

Their extraordinary acts of courage and sacrifice will forever inspire generations to come. 

Supreme dedication of the Shaurya Chakra awardees.
आजादी की पूर्व संध्या पर रामपुर बुशहर में चोरों का आतंक, 4 मंदिरों एक दुकान के ताले तोड़कर दानपात्र ले उड़े चोर  |
🎖️🪖
🇮🇳 15 अगस्त — वह दिन, जब भारत ने आज़ादी की सांस ली।

लगभग दो सदियों की गुलामी के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। यह केवल अंग्रेज़ी शासन के अंत का दिन नहीं था, बल्कि एक नए भारत के निर्माण की शुरुआत थी।

यह आज़ादी हमें यूँ ही नहीं मिली। इसके पीछे अनगिनत बलिदान, संघर्ष, जेल, यातनाएँ और वीरों का अदम्य साहस था। महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

इतिहास में कुछ नाम हमेशा याद रखे गए, लेकिन उन करोड़ों गुमनाम भारतीयों के योगदान को भी कभी नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में अपना खून-पसीना और जीवन तक समर्पित कर दिया।

14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को जब भारत ने स्वतंत्रता का सूर्योदय देखा, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक “Tryst with Destiny” भाषण दिया। तिरंगा लहराया और भारत ने अपने भविष्य की ओर पहला कदम बढ़ाया।

हालाँकि आज़ादी के साथ देश के विभाजन का दर्द भी जुड़ा था, जिसने लाखों लोगों को विस्थापन और अपार पीड़ा दी।

आज का दिन केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि उन सभी वीरों को याद करने का दिन है जिनके बलिदान की वजह से हम आज़ाद भारत में सांस ले रहे हैं।

🇮🇳 आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की हमेशा रक्षा करेंगे।

जय हिंद! 🇮🇳
वंदे मातरम्! ❤️🇮🇳

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04/Jul/99
Capture of tiger hill 🇮🇳🔥
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जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🎂🌹

डॉ. जनक राज जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 💐

ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें और इसी तरह समाज व जनता की सेवा करते रहें। एक डॉक्टर के रूप में मरीजों की सेवा और एक जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों की आवाज़ उठाने का आपका प्रयास सराहनीय है।

आपके जीवन में खुशियाँ, सफलता और नई ऊँचाइयाँ हमेशा बनी रहें।
जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ डॉ. साहब! 🎉🎂🙏
आनी के राजेश की यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

क्या हिमाचल प्रदेश में विधवा और अनाथ बच्चों को आर्थिक सहायता देने के लिए पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ाना ही एकमात्र रास्ता था? क्या इसके लिए कोई और विकल्प नहीं हो सकता था?

राजेश ने इस वीडियो के माध्यम से एक अहम सवाल उठाया है।
वीडियो को पूरा देखें और अपनी राय जरूर दें।

वीडियो पसंद आए तो शेयर जरूर करें, ताकि यह सवाल ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। 🙏
इंडिया आर्मी का जवान और राजस्थानी ऊंट कभी बूढ़ा नहीं होता 🪖
जब तक ऐसे जवान हमारी सुरक्षा के लिए है तब तक हमें किसी से कोई डर नहीं है |

नाइब सूबेदार भोपाल सिंह चौधरी भारतीय सेना के 5वीं राजपूताना राइफल्स (5 राज राइफ) के एक बेहद सम्मानित और जांबाज सेवानिवृत्त सैनिक हैं। वे देश में अदम्य साहस, देशभक्ति और कभी न टूटने वाले फौजी हौसले के प्रतीक माने जाते हैं।

सैन्य सेवा और वीरता का सफर

तीन बड़े युद्ध: उन्होंने सेना में 22 वर्षों तक सेवा दी। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई लड़ी।

गंभीर चोट: युद्ध और सैन्य सेवा के दौरान रीढ़ की हड्डी में लगी गंभीर चोट के कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह से लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो गया।

व्हीलचेयर पर जीवन: वे पिछले 40 से अधिक वर्षों से व्हीलचेयर पर हैं, लेकिन उनका हौसला आज भी एक युवा सैनिक जैसा है।

खेल के क्षेत्र में कीर्तिमान

पैरा-एथलीट: शारीरिक अक्षमता को खुद पर हावी न होने देते हुए उन्होंने खेलों का रुख किया।

राष्ट्रीय पदक: उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पैरालंपिक खेलों की शॉटपुट (गोला फेंक) और जैवलिन (भाला फेंक) प्रतियोगिताओं में देश के लिए कई स्वर्ण पदक जीते।