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Kurukshetra Bhoomi news

@kurukshetrabhoomi04
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पत्रकारिता, युवा और पारदर्शिता की रक्षा जरूरी : राजेश कनीपला
युवा मंच की आवाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कनीपला ने कहा कि सरकार पत्रकारों और देश के युवाओं को अपना निशाना न बनाए। लोकतंत्र में सवाल पूछने वालों की आवाज दबाने के बजाय पारदर्शिता और संवाद को मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज का युग पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। देश का लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया से जुड़ा है। आज बच्चे भी सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बना रहे हैं और बड़ी संख्या में युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता और डिजिटल अभिव्यक्ति को संदेह की नजर से देखने के बजाय उसे लोकतंत्र की मजबूती के रूप में समझने की आवश्यकता है।
राजेश कनीपला ने कहा कि पत्रकार समाज और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। पत्रकार का उद्देश्य केवल खबर प्रकाशित करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं, सवालों और सच्चाई को सामने लाना भी है। यदि कोई पत्रकार किसी संस्था या सरकार से विज्ञापन की बात करता है तो उसे तुरंत ‘ब्लैकमेलर’ कहना उचित नहीं है। समाचार माध्यमों को भी अपना संस्थान चलाने के लिए आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। विज्ञापन और पत्रकारिता के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सच्चाई यदि कड़वी है तो उसे दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। किसी खबर या सवाल से असहमति हो सकती है, लेकिन उसका जवाब तथ्य और संवाद से दिया जाना चाहिए। लोकतंत्र में आलोचना को दुश्मनी समझना स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
राजेश कनीपला ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक शक्ति का गलत इस्तेमाल न करें। सत्ता जनता की सेवा के लिए होती है, किसी की आवाज दबाने के लिए नहीं। पत्रकार, युवा और आम नागरिक यदि सवाल पूछते हैं तो उनके सवालों का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारें जितनी पारदर्शी होंगी, जनता का विश्वास उतना ही मजबूत होगा। पत्रकारों और युवाओं को डराने या दबाने के बजाय उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश का युवा और पत्रकार वर्ग लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों को निशाना बनाने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित करना समय की जरूरत है। क्योंकि जब सवालों का सम्मान होता है, तभी व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश पैदा होती है।
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आजादी का पर्व: तिरंगे के साथ जिम्मेदारी का संकल्प
🇮🇳 तिरंगा यात्रा निकालने वालों से एक सवाल—क्या हमने कभी सोचा है कि आजादी का असली मतलब क्या है?
15 अगस्त हमारे लिए गर्व, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का पर्व है। तिरंगा हमारी आन-बान-शान है और देश के वीर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। लेकिन क्या आजादी केवल तिरंगा यात्रा, बड़े-बड़े कार्यक्रम और लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने तक सीमित रह गई है?
इस वीडियो को ध्यान से देखिए और खुद से एक सवाल पूछिए—क्या देश के उस गरीब व्यक्ति तक भी आजादी का लाभ पहुंच रहा है, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात मेहनत करता है?
इस देश का गरीब भी टैक्स देता है और अमीर भी। जब एक गरीब अपने परिवार के लिए राशन, कपड़े, दवा या रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदता है, तो वह भी टैक्स देता है। यानी देश के विकास में उसका भी योगदान है।
फिर क्यों न आजादी के पर्व पर हम उन लोगों के बारे में भी सोचें, जिनके घर में आज भी दो वक्त की रोटी, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार एक बड़ी चुनौती है?
देशभक्ति केवल हाथ में तिरंगा लेकर चलने का नाम नहीं है। देशभक्ति उस गरीब के चेहरे पर मुस्कान लाने, जरूरतमंद की मदद करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का नाम भी है।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे को केवल हाथ में नहीं, बल्कि अपने दिल में लेकर चलें। समारोह जरूर मनाएं, तिरंगा यात्रा जरूर निकालें, लेकिन साथ ही यह संकल्प भी लें कि देश के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान, अवसर और विकास पहुंचाने में अपना योगदान देंगे।
🇮🇳 तिरंगा हमारा गौरव है, गरीब हमारा अपना है और देश की जिम्मेदारी हम सबकी है।
जय हिंद! 🇮🇳
वंदे मातरम्! 🇮🇳
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