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सरनौल मेले में उमड़ी हजारों की भीड़ 
TopFan 
यमुनावैली के बड़कोट तहसील अंतर्गत पांडव गांव के नाम से प्रसिद्ध सरनौल गांव में मां रेणुका के पौराणिक ज्येष्ठ मेले की धूम रही। धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं से सराबोर इस मेले में दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां रेणुका के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मेले के दौरान पांच गांवों की आराध्य देवी मां रेणुका की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने मां रेणुका से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मेले में पारंपरिक तांदी, रासो और डोली नृत्य आकर्षण का केंद्र रहे। ढोल-दमाऊं की थाप पर लोक कलाकारों और ग्रामीणों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीणों ने लोक संस्कृति के रंग बिखेरते हुए मेले को यादगार बना दिया।
इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता दीपक बिजल्वाण ने मेले में पहुंचकर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पहाड़ों के मेले केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और लोक परंपराओं के संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।
सरनौल स्थित मां रेणुका का प्राचीन मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ माह की 22 गते को यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देवी की डोली गांव के प्रत्येक घर पहुंचती है और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करती है।
मेले का सबसे रोमांचक और आस्था से जुड़ा दृश्य कपुआ कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला। मान्यता के अनुसार देवी के अवतरण के बाद पश्वा ने नंगे पैर धारदार फरसों पर चलकर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही पश्वा फरसों पर चले, पूरा परिसर मां रेणुका के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के समापन पर डोली नृत्य, तांदी और रासो की शानदार प्रस्तुतियां हुईं। देर शाम तक श्रद्धालु लोक संस्कृति और आस्था के इस महापर्व का आनंद लेते रहे।
#मां_रेणुका_मेला #सरनौल #पांडव_गांव #उत्तरकाशी #बड़कोट #यमुनावैली #देवी_आस्था #लोकसंस्कृति #ज्येष्ठ_मेला #डोली_नृत्य #तांदी #रासो #उत्तराखंड_संस्कृति #देवभूमि_उत्तराखंड #पहाड़_की_पहचान #धार्मिक_आस्था #वायरल_न्यूज़ #Uttarkashi #JaunsarBawar

सरनौल मेले में उमड़ी हजारों की भीड़ TopFan यमुनावैली के बड़कोट तहसील अंतर्गत पांडव गांव के नाम से प्रसिद्ध सरनौल गांव में मां रेणुका के पौराणिक ज्येष्ठ मेले की धूम रही। धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं से सराबोर इस मेले में दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां रेणुका के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मेले के दौरान पांच गांवों की आराध्य देवी मां रेणुका की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने मां रेणुका से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मेले में पारंपरिक तांदी, रासो और डोली नृत्य आकर्षण का केंद्र रहे। ढोल-दमाऊं की थाप पर लोक कलाकारों और ग्रामीणों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीणों ने लोक संस्कृति के रंग बिखेरते हुए मेले को यादगार बना दिया। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता दीपक बिजल्वाण ने मेले में पहुंचकर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पहाड़ों के मेले केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और लोक परंपराओं के संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं। सरनौल स्थित मां रेणुका का प्राचीन मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ माह की 22 गते को यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देवी की डोली गांव के प्रत्येक घर पहुंचती है और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करती है। मेले का सबसे रोमांचक और आस्था से जुड़ा दृश्य कपुआ कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला। मान्यता के अनुसार देवी के अवतरण के बाद पश्वा ने नंगे पैर धारदार फरसों पर चलकर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही पश्वा फरसों पर चले, पूरा परिसर मां रेणुका के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर डोली नृत्य, तांदी और रासो की शानदार प्रस्तुतियां हुईं। देर शाम तक श्रद्धालु लोक संस्कृति और आस्था के इस महापर्व का आनंद लेते रहे। #मां_रेणुका_मेला #सरनौल #पांडव_गांव #उत्तरकाशी #बड़कोट #यमुनावैली #देवी_आस्था #लोकसंस्कृति #ज्येष्ठ_मेला #डोली_नृत्य #तांदी #रासो #उत्तराखंड_संस्कृति #देवभूमि_उत्तराखंड #पहाड़_की_पहचान #धार्मिक_आस्था #वायरल_न्यूज़ #Uttarkashi #JaunsarBawar

Puraula, Uttarkashi | Jun 6, 2026

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