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मुख्यमंत्री की उपचुनाव को लेकर रैली #दतिया #दतिया_उपचुनाव #DatiaByElection #BJP #CMMohanYadav

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Datia Nagar, Datia | Jul 28, 2026

दतिया उपचुनाव में छलके नरोत्तम मिश्रा के आंसू, मंच पर रो पड़े नरोत्तम!

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Madhya Pradesh, India | Jul 13, 2026

निष्ठा का शंखनाद: दतिया में दिखा नरोत्तम मिश्रा का 'पार्टी फर्स्ट' अंदाज
​राजनीति में टिकट कटना या चेहरे बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन असली नेतृत्व वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित न हो और संगठन के फैसले को सर्वोपरि माने। मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के नामांकन के दौरान कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। टिकट न मिलने के स्वाभाविक दर्द को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने जिस तरह भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में हुंकार भरी, उसने उनके राजनीतिक कद को और ऊँचा कर दिया है।
​'दूल्हा बदला' पर संकल्प नहीं डिगा
​दतिया उपचुनाव को लेकर नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों में भारी उत्साह था। चुनावी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन ऐन वक्त पर केंद्रीय नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद समर्थकों में आक्रोश और भावुकता का सैलाब उमड़ पड़ा। ग्वालियर-झांसी हाईवे पर चक्काजाम और असंतोष की खबरें भी आईं। कई निष्ठावान समर्थकों ने सामूहिक इस्तीफे तक की पेशकश कर दी।
​एक पल के लिए लगा कि दतिया भाजपा में बड़ा बिखराव आ जाएगा, लेकिन दिल्ली और भोपाल में पार्टी आलाकमान से हुई मुलाकातों के बाद नरोत्तम मिश्रा ने जो परिपक्वता दिखाई, उसने पूरी बाजी पलट दी।
​जब मंच पर छलका दर्द, पर जीत गया 'संगठन धर्म'
​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में जब आशुतोष तिवारी का नामांकन दाखिल हुआ, तो सबकी नजरें नरोत्तम मिश्रा पर थीं। अपने भाषण के दौरान मिश्रा भावुक जरूर हुए, उनका दर्द भी शब्दों के जरिए सामने आया, लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने भरे मंच से संकल्प लेते हुए कहा:
​"मैं एक-एक दरवाजे पर जाऊंगा और आशुतोष को जिताऊंगा।"
​यह बयान इस बात का गवाह है कि एक सच्चा सिपाही वही होता है जो कमांडर का फैसला आने के बाद अपनी पूरी ताकत से युद्ध जीतने में जुट जाता है, भले ही सेनापति कोई और क्यों न हो।
​रूठों को मनाया, बिखरने से बचाया
​नरोत्तम मिश्रा ने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि एक कुशल अभिभावक की तरह अपने नाराज कार्यकर्ताओं को भी ढांढस बंधाया। उन्होंने मीडिया के सामने आकर साफ कहा कि "हम एक-एक कार्यकर्ता को मनाएंगे और वे हमारी बात मानेंगे।" उनका यह भरोसा रंग भी लाया। जो समर्थक कल तक नारेबाजी कर रहे थे, वे आज फिर से कमल के फूल को जिताने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। इस्तीफों का दौर थम गया है और बिखराव की आशंका एकजुटता में बदल चुकी है।
​निष्कर्ष: दतिया में अब 'कमल' ही चेहरा है
​इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा में व्यक्ति से बड़ा संगठन होता है। नरोत्तम मिश्रा ने भावुक क्षणों के बीच भी अनुशासन की जो लकीर खींची है, उसने दतिया उपचुनाव की चुनावी फिजा को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी ने इस एकजुटता को और मजबूती दी है। अब दतिया में मुकाबला चेहरे का नहीं, बल्कि भाजपा की साख और कार्यकर्ताओं के उस संकल्प का है, जिसकी कमान खुद नरोत्तम मिश्रा ने अपने हाथों में ले ली है।
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निष्ठा का शंखनाद: दतिया में दिखा नरोत्तम मिश्रा का 'पार्टी फर्स्ट' अंदाज ​राजनीति में टिकट कटना या चेहरे बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन असली नेतृत्व वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित न हो और संगठन के फैसले को सर्वोपरि माने। मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के नामांकन के दौरान कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। टिकट न मिलने के स्वाभाविक दर्द को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने जिस तरह भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में हुंकार भरी, उसने उनके राजनीतिक कद को और ऊँचा कर दिया है। ​'दूल्हा बदला' पर संकल्प नहीं डिगा ​दतिया उपचुनाव को लेकर नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों में भारी उत्साह था। चुनावी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन ऐन वक्त पर केंद्रीय नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद समर्थकों में आक्रोश और भावुकता का सैलाब उमड़ पड़ा। ग्वालियर-झांसी हाईवे पर चक्काजाम और असंतोष की खबरें भी आईं। कई निष्ठावान समर्थकों ने सामूहिक इस्तीफे तक की पेशकश कर दी। ​एक पल के लिए लगा कि दतिया भाजपा में बड़ा बिखराव आ जाएगा, लेकिन दिल्ली और भोपाल में पार्टी आलाकमान से हुई मुलाकातों के बाद नरोत्तम मिश्रा ने जो परिपक्वता दिखाई, उसने पूरी बाजी पलट दी। ​जब मंच पर छलका दर्द, पर जीत गया 'संगठन धर्म' ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में जब आशुतोष तिवारी का नामांकन दाखिल हुआ, तो सबकी नजरें नरोत्तम मिश्रा पर थीं। अपने भाषण के दौरान मिश्रा भावुक जरूर हुए, उनका दर्द भी शब्दों के जरिए सामने आया, लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने भरे मंच से संकल्प लेते हुए कहा: ​"मैं एक-एक दरवाजे पर जाऊंगा और आशुतोष को जिताऊंगा।" ​यह बयान इस बात का गवाह है कि एक सच्चा सिपाही वही होता है जो कमांडर का फैसला आने के बाद अपनी पूरी ताकत से युद्ध जीतने में जुट जाता है, भले ही सेनापति कोई और क्यों न हो। ​रूठों को मनाया, बिखरने से बचाया ​नरोत्तम मिश्रा ने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि एक कुशल अभिभावक की तरह अपने नाराज कार्यकर्ताओं को भी ढांढस बंधाया। उन्होंने मीडिया के सामने आकर साफ कहा कि "हम एक-एक कार्यकर्ता को मनाएंगे और वे हमारी बात मानेंगे।" उनका यह भरोसा रंग भी लाया। जो समर्थक कल तक नारेबाजी कर रहे थे, वे आज फिर से कमल के फूल को जिताने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। इस्तीफों का दौर थम गया है और बिखराव की आशंका एकजुटता में बदल चुकी है। ​निष्कर्ष: दतिया में अब 'कमल' ही चेहरा है ​इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा में व्यक्ति से बड़ा संगठन होता है। नरोत्तम मिश्रा ने भावुक क्षणों के बीच भी अनुशासन की जो लकीर खींची है, उसने दतिया उपचुनाव की चुनावी फिजा को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी ने इस एकजुटता को और मजबूती दी है। अब दतिया में मुकाबला चेहरे का नहीं, बल्कि भाजपा की साख और कार्यकर्ताओं के उस संकल्प का है, जिसकी कमान खुद नरोत्तम मिश्रा ने अपने हाथों में ले ली है। ​#DatiaByElection ​#NarottamMishra ​#BJPMP ​#MadhyaPradeshPolitics ​#AshutoshTiwari ​#पार्टी_फर्स्ट ​#संगठन_में_ही_शक्ति_है ​#राजनीतिक_बड़प्पन ​#कार्यकर्ता_गौरव ​#भाजपा_एकजुटता ​#दतिया_उपचुनाव ​#DrMohanYadav ​#HemantKhandelwal ​#दतिया_भाजपा ​#BundelkhandPolitics

Chanderi, Ashok Nagar | Jul 13, 2026

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