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​अखिलेश यादव को कृष्ण रूप में दिखाने पर मचा बवाल
​#AkhileshYadav #SamajwadiParty #PoliticalControversy #Religious

​अखिलेश यादव को कृष्ण रूप में दिखाने पर मचा बवाल ​#AkhileshYadav #SamajwadiParty #PoliticalControversy #Religious

Gautam Buddha Nagar, Gautam Buddh Nagar | Jul 1, 2026

लखीसराय जिले में घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित चानन प्रखंड के रामसीर गांव का मां जलप्पा स्थान आस्था, विश्वास और लोकमान्यताओं का अद्भुत संगम है. सदियों पुराना यह शक्तिपीठ आज भी हजारों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. यहां मां के दरबार में संतान सुख की कामना लेकर आने वाली महिलाओं की मन्नतें पूरी होने की मान्यता है. यही वजह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां माथा टेकने पहुंचते हैं.
कहा जाता है कि कई सौ वर्ष पूर्व एक ग्रामीण को स्वप्न में देवी का संकेत मिला था. इसके बाद झाड़ियों में दबी मां की प्रतिमा को निकालकर यहां स्थापित किया गया. तब से यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार हो गया. मंदिर में काले पत्थर से निर्मित करीब चार फीट ऊंची मां जलप्पा की प्रतिमा विराजमान है. साथ ही भगवान शिव एवं भगवान हनुमान  की प्रतिमा भी स्थापित है.
 *आंचल चढ़ाकर महिलाएं मांगती हैं संतान का आशीर्वाद-* 
मां जलप्पा स्थान की सबसे बड़ी पहचान संतान प्राप्ति से जुड़ी आस्था है. स्थानीय मान्यता के अनुसार जिन महिलाओं को संतान नहीं होती या जन्म के बाद बच्चे जीवित नहीं रह पाते, वे यहां आकर मां से मन्नत मांगती हैं. श्रद्धालु महिलाएं अपने आंचल का एक हिस्सा फाड़कर देवी को अर्पित करती हैं. मन्नत पूरी होने पर बच्चे का मुंडन संस्कार और विशेष पूजा-अर्चना करायी जाती है.
 *मंगलवार और शनिवार को लगता है आस्था का मेला-* 
मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है. इसके अलावा पूर्णिमा, पंचमी और अमावस्या के अवसर पर भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मुंडन संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूरे श्रद्धाभाव से संपन्न कराये जाते हैं.
 *शादी-विवाह के लिए भी प्रसिद्ध है मंदिर परिसर-* 
स्थानीय लोगों के अनुसार शादी-विवाह के मौसम में मंदिर परिसर में कई वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्ता के कारण यह स्थल लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है.
 *पर्यटन स्थल बनने की राह देख रहा जलप्पा स्थान-* 
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित यह धार्मिक स्थल पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए है. प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक मान्यताओं के बावजूद अब तक इसे पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिल पाया है. स्थानीय लोग वर्षों से इसके विकास की मांग करते आ रहे हैं.
 *सुबह पांच बजे खुलता है मां का दरबार-* 
मुख्य पुजारी राकेश शुक्ला एवं उनके सहयोगी रोशन शुक्ला दिनकर कुमार आदि ने बताया कि मंदिर का पट प्रतिदिन सुबह पांच बजे खुलता है और शाम साढ़े छह बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है. कार्तिक माह में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.
 *हाल में ही मुख्य पुजारी का हुआ निधन -* 
लखीसराय स्थित प्रसिद्ध मां जलप्पा (ज्वालपा) मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित गोपाल शुक्ला का निधन 12 जून 2026 को हो गया.वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और पटना में उनका इलाज चल रहा था.
 *मां जलप्पा स्थान की खास बातें-* 
*रामसीर गांव में स्थित प्राचीन शक्तिपीठ
*काले पत्थर की चार फीट ऊंची प्रतिमा
*संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए प्रसिद्ध
*मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़
*पूर्णिमा, पंचमी और अमावस्या पर विशेष पूजा
*मुंडन संस्कार और विवाह आयोजन का प्रमुख केंद्र
*जंगल और पहाड़ियों के बीच स्थित रमणीय स्थल
*पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद आज तक रहा उपेक्षित #police #lakhisarai #admission #religious

लखीसराय जिले में घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित चानन प्रखंड के रामसीर गांव का मां जलप्पा स्थान आस्था, विश्वास और लोकमान्यताओं का अद्भुत संगम है. सदियों पुराना यह शक्तिपीठ आज भी हजारों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. यहां मां के दरबार में संतान सुख की कामना लेकर आने वाली महिलाओं की मन्नतें पूरी होने की मान्यता है. यही वजह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां माथा टेकने पहुंचते हैं. कहा जाता है कि कई सौ वर्ष पूर्व एक ग्रामीण को स्वप्न में देवी का संकेत मिला था. इसके बाद झाड़ियों में दबी मां की प्रतिमा को निकालकर यहां स्थापित किया गया. तब से यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार हो गया. मंदिर में काले पत्थर से निर्मित करीब चार फीट ऊंची मां जलप्पा की प्रतिमा विराजमान है. साथ ही भगवान शिव एवं भगवान हनुमान की प्रतिमा भी स्थापित है. *आंचल चढ़ाकर महिलाएं मांगती हैं संतान का आशीर्वाद-* मां जलप्पा स्थान की सबसे बड़ी पहचान संतान प्राप्ति से जुड़ी आस्था है. स्थानीय मान्यता के अनुसार जिन महिलाओं को संतान नहीं होती या जन्म के बाद बच्चे जीवित नहीं रह पाते, वे यहां आकर मां से मन्नत मांगती हैं. श्रद्धालु महिलाएं अपने आंचल का एक हिस्सा फाड़कर देवी को अर्पित करती हैं. मन्नत पूरी होने पर बच्चे का मुंडन संस्कार और विशेष पूजा-अर्चना करायी जाती है. *मंगलवार और शनिवार को लगता है आस्था का मेला-* मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है. इसके अलावा पूर्णिमा, पंचमी और अमावस्या के अवसर पर भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मुंडन संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूरे श्रद्धाभाव से संपन्न कराये जाते हैं. *शादी-विवाह के लिए भी प्रसिद्ध है मंदिर परिसर-* स्थानीय लोगों के अनुसार शादी-विवाह के मौसम में मंदिर परिसर में कई वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्ता के कारण यह स्थल लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. *पर्यटन स्थल बनने की राह देख रहा जलप्पा स्थान-* जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित यह धार्मिक स्थल पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए है. प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक मान्यताओं के बावजूद अब तक इसे पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिल पाया है. स्थानीय लोग वर्षों से इसके विकास की मांग करते आ रहे हैं. *सुबह पांच बजे खुलता है मां का दरबार-* मुख्य पुजारी राकेश शुक्ला एवं उनके सहयोगी रोशन शुक्ला दिनकर कुमार आदि ने बताया कि मंदिर का पट प्रतिदिन सुबह पांच बजे खुलता है और शाम साढ़े छह बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है. कार्तिक माह में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. *हाल में ही मुख्य पुजारी का हुआ निधन -* लखीसराय स्थित प्रसिद्ध मां जलप्पा (ज्वालपा) मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित गोपाल शुक्ला का निधन 12 जून 2026 को हो गया.वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और पटना में उनका इलाज चल रहा था. *मां जलप्पा स्थान की खास बातें-* *रामसीर गांव में स्थित प्राचीन शक्तिपीठ *काले पत्थर की चार फीट ऊंची प्रतिमा *संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए प्रसिद्ध *मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ *पूर्णिमा, पंचमी और अमावस्या पर विशेष पूजा *मुंडन संस्कार और विवाह आयोजन का प्रमुख केंद्र *जंगल और पहाड़ियों के बीच स्थित रमणीय स्थल *पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद आज तक रहा उपेक्षित #police #lakhisarai #admission #religious

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