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अजब है व्यवस्था! सरपंच फरियादी बनी, गांव आज भी प्यासा

डिंडौरी कहते हैं "हर घर जल" सरकार की प्राथमिकता है। लेकिन डिंडौरी जिले के अमरपुर जनपद की ग्राम पंचायत सक्का में यह नारा शायद फाइलों तक ही सीमित रह गया है। यहां लगभग बीते दो वर्षों से नल-जल योजना बंद पड़ी है, और ग्रामीण आज भी नदी, कुएं और तालाब के दूषित पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि शिकायत कोई आम ग्रामीण नहीं, बल्कि खुद ग्राम पंचायत की महिला सरपंच कर रही हैं। यानी जिस जनप्रतिनिधि को गांव की समस्याओं के समाधान के लिए चुना गया, वही अब दफ्तर-दफ्तर गुहार लगाने को मजबूर है।

कहानी की शुरुआत सड़क निर्माण से हुई। सड़क बनी या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन निर्माण कंपनी ने नल-जल योजना की पाइपलाइन जरूर तोड़ दी। इसके बाद शुरू हुआ शिकायतों का अंतहीन सफर। आवेदन दिए गए, निवेदन किए गए, अधिकारियों के चक्कर लगाए गए, कलेक्टर तक गुहार पहुंची। इस बीच अधिकारी बदलते रहे, कलेक्टर बदलते रहे, लेकिन सक्का की किस्मत नहीं बदली। पाइपलाइन आज भी टूटी है और नल आज भी सूखे हैं।

सरपंच का कहना है कि गांव के लोग मजबूरी में दूषित पानी पी रहे हैं। बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब तक नहीं टूटी। शायद किसी बड़े हादसे या बीमारी के इंतजार में पूरा सिस्टम मौन है।

विडंबना देखिए... एक ओर स्वच्छ पेयजल, जल जीवन मिशन और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, दूसरी ओर सक्का के लोग आज भी प्रकृति के भरोसे अपनी प्यास बुझा रहे हैं। ऐसा लगता है कि योजनाओं का पानी गांव तक नहीं, केवल सरकारी रिपोर्टों तक ही पहुंच पाया है।

अब सवाल यह है कि जब एक निर्वाचित महिला सरपंच की आवाज़ दो साल तक अनसुनी रह सकती है, तो आम ग्रामीण की शिकायतों का क्या हाल होगा? क्या प्रशासन की प्राथमिकताओं में यह गांव शामिल है, या फिर यह भी उन फाइलों में दबा रहेगा जिन पर सिर्फ "शीघ्र कार्रवाई की जाए" लिखकर आगे बढ़ा दिया जाता है?

फिलहाल सक्का के ग्रामीणों को इंतजार है—न किसी नए वादे का, न किसी नए शिलान्यास का। इंतजार सिर्फ उस दिन का है, जब उनके गांव के सूखे नलों में दोबारा पानी बहेगा।

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अजब है व्यवस्था! सरपंच फरियादी बनी, गांव आज भी प्यासा डिंडौरी कहते हैं "हर घर जल" सरकार की प्राथमिकता है। लेकिन डिंडौरी जिले के अमरपुर जनपद की ग्राम पंचायत सक्का में यह नारा शायद फाइलों तक ही सीमित रह गया है। यहां लगभग बीते दो वर्षों से नल-जल योजना बंद पड़ी है, और ग्रामीण आज भी नदी, कुएं और तालाब के दूषित पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि शिकायत कोई आम ग्रामीण नहीं, बल्कि खुद ग्राम पंचायत की महिला सरपंच कर रही हैं। यानी जिस जनप्रतिनिधि को गांव की समस्याओं के समाधान के लिए चुना गया, वही अब दफ्तर-दफ्तर गुहार लगाने को मजबूर है। कहानी की शुरुआत सड़क निर्माण से हुई। सड़क बनी या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन निर्माण कंपनी ने नल-जल योजना की पाइपलाइन जरूर तोड़ दी। इसके बाद शुरू हुआ शिकायतों का अंतहीन सफर। आवेदन दिए गए, निवेदन किए गए, अधिकारियों के चक्कर लगाए गए, कलेक्टर तक गुहार पहुंची। इस बीच अधिकारी बदलते रहे, कलेक्टर बदलते रहे, लेकिन सक्का की किस्मत नहीं बदली। पाइपलाइन आज भी टूटी है और नल आज भी सूखे हैं। सरपंच का कहना है कि गांव के लोग मजबूरी में दूषित पानी पी रहे हैं। बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब तक नहीं टूटी। शायद किसी बड़े हादसे या बीमारी के इंतजार में पूरा सिस्टम मौन है। विडंबना देखिए... एक ओर स्वच्छ पेयजल, जल जीवन मिशन और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, दूसरी ओर सक्का के लोग आज भी प्रकृति के भरोसे अपनी प्यास बुझा रहे हैं। ऐसा लगता है कि योजनाओं का पानी गांव तक नहीं, केवल सरकारी रिपोर्टों तक ही पहुंच पाया है। अब सवाल यह है कि जब एक निर्वाचित महिला सरपंच की आवाज़ दो साल तक अनसुनी रह सकती है, तो आम ग्रामीण की शिकायतों का क्या हाल होगा? क्या प्रशासन की प्राथमिकताओं में यह गांव शामिल है, या फिर यह भी उन फाइलों में दबा रहेगा जिन पर सिर्फ "शीघ्र कार्रवाई की जाए" लिखकर आगे बढ़ा दिया जाता है? फिलहाल सक्का के ग्रामीणों को इंतजार है—न किसी नए वादे का, न किसी नए शिलान्यास का। इंतजार सिर्फ उस दिन का है, जब उनके गांव के सूखे नलों में दोबारा पानी बहेगा। #Dindori #Sakka #NalJalYojana #HarGharJal #JalJeevanMission #WaterCrisis #GroundReality #MPNews #MadhyaPradesh #RuralIndia #VillageIssues #PublicVoice #Accountability #BreakingNews #JansamparkDigital #ViralNews

Dindori, Dindori | Jul 28, 2026

जिला अस्पताल में बढ़ा विवाद: नर्सिंग अधिकारियों ने निलंबन के खिलाफ खोला मोर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग

'निरंतर सेवा का मिला फल अपमान' का आरोप, सीसीटीवी जांच और कार्रवाई निरस्त करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

जिला चिकित्सालय डिंडौरी में मरीज के उपचार से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। आपातकालीन कक्ष में भर्ती एक मरीज के उपचार के दौरान मिनरल वाटर का उपयोग किए जाने के वायरल वीडियो के बाद निलंबित की गई नर्सिंग ऑफिसर के समर्थन में जिला अस्पताल के नर्सिंग अधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई पर पुनर्विचार और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ज्ञापन में नर्सिंग अधिकारियों ने कहा कि 22 जुलाई 2026 को आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में भर्ती मरीज के उपचार के दौरान चिकित्सक के निर्देशानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्य किया गया था। उनका दावा है कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई, लेकिन बिना उनका पक्ष सुने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए नर्सिंग ऑफिसर को निलंबित कर दिया गया, जिससे पूरे नर्सिंग स्टाफ का मनोबल प्रभावित हुआ है।

नर्सिंग अधिकारियों ने मांग की है कि अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि उपचार चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुरूप किया गया था।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि सिविल सर्जन द्वारा नर्सिंग स्टाफ को डॉक्टरों के निर्देश के बिना मरीजों का उपचार नहीं करने की बात कही गई, जबकि संबंधित उपचार चिकित्सक के निर्देश पर ही किया गया था।

नर्सिंग अधिकारियों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर न्यायसंगत निर्णय लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

गौरतलब है कि इस मामले में वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने संबंधित नर्सिंग ऑफिसर को निलंबित किया था। अब नर्सिंग स्टाफ खुलकर उनके समर्थन में सामने आ गया है, जिससे जिला अस्पताल का यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

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जिला अस्पताल में बढ़ा विवाद: नर्सिंग अधिकारियों ने निलंबन के खिलाफ खोला मोर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग 'निरंतर सेवा का मिला फल अपमान' का आरोप, सीसीटीवी जांच और कार्रवाई निरस्त करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी जिला चिकित्सालय डिंडौरी में मरीज के उपचार से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। आपातकालीन कक्ष में भर्ती एक मरीज के उपचार के दौरान मिनरल वाटर का उपयोग किए जाने के वायरल वीडियो के बाद निलंबित की गई नर्सिंग ऑफिसर के समर्थन में जिला अस्पताल के नर्सिंग अधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई पर पुनर्विचार और निष्पक्ष जांच की मांग की है। ज्ञापन में नर्सिंग अधिकारियों ने कहा कि 22 जुलाई 2026 को आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में भर्ती मरीज के उपचार के दौरान चिकित्सक के निर्देशानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्य किया गया था। उनका दावा है कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई, लेकिन बिना उनका पक्ष सुने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए नर्सिंग ऑफिसर को निलंबित कर दिया गया, जिससे पूरे नर्सिंग स्टाफ का मनोबल प्रभावित हुआ है। नर्सिंग अधिकारियों ने मांग की है कि अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि उपचार चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुरूप किया गया था। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि सिविल सर्जन द्वारा नर्सिंग स्टाफ को डॉक्टरों के निर्देश के बिना मरीजों का उपचार नहीं करने की बात कही गई, जबकि संबंधित उपचार चिकित्सक के निर्देश पर ही किया गया था। नर्सिंग अधिकारियों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर न्यायसंगत निर्णय लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। गौरतलब है कि इस मामले में वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने संबंधित नर्सिंग ऑफिसर को निलंबित किया था। अब नर्सिंग स्टाफ खुलकर उनके समर्थन में सामने आ गया है, जिससे जिला अस्पताल का यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। #Dindori #DistrictHospital #NursingStaff #Healthcare #MadhyaPradesh #HospitalControversy #BreakingNews #JansamparkDigital #MedicalNews #DindoriNews

Dindori, Dindori | Jul 26, 2026

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